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शुरू करें वित्त वर्ष 2014 के लिए टैक्स प्लानिंग

प्रकाशित Thu, 11, 2013 पर 16:56  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

नया वित्त वर्ष शुरू हो गया है और हर बार की तरह इस बार भी बहुत से लोग बिना टैक्स प्लानिंग किए टैक्स भरेंगे और फिर टैक्स छूट पाने के लिए वित्तीय वर्ष के आखिरी महीने में दौड़-भाग करेंगे। आइए जानते हैं ऑप्टिमा मनी मैनेजर्स के डायरेक्टर पंकज मठपाल से क्यों समय पर जरूरी होती है टैक्स प्लानिंग और नए वित्त वर्ष में टैक्स के लिहाज से किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है।


पंकज मठपाल का कहना है कि टैक्स प्लानिंग का उद्देश सिर्फ 80सी, 80डी या 80 सीसीडी के तहत टैक्स छूट मिलने वाले साधनों में इंवेस्ट करना नहीं है। टैक्स प्लानिंग में काफी बातों का ध्यान रखना पड़ता है। अगर आप समय से पहले टैक्स प्लानिंग करेंगे तो और टैक्स बचा सकते हैं या अतिरिक्त टैक्स देने से बच सकते हैं। लेकिन अगर आप अंतिम समय में टैक्स प्लानिंग करते है तो बिना अपना लक्ष्य जाने निवेश करके फंस जाते हैं।


इसलिए अगर आप अभी से फाइनेंशियल प्लानिंग करके अपने लक्ष्य, जरूरत और जोखिम उठाने की क्षमता को समझ कर निवेश करेंगे तो आगे जाकर फायदा होगा। टैक्स प्लानिंग आपकी फाइनेंशियल प्लानिंग का एक हिस्सा हैं। आपको अपनी टैक्स प्लानिंग ठीक से करनी चाहिए ताकि आप ज्यादा से ज्यादा टैक्स बचाकर अपना पैसा सही तरीके से निवेश करके अपने वित्तीय लक्ष्य हासिल कर सकें।


पंकज मठपाल के मुताबिक वेतनभोगी कर्मचारियों को सैलरी के अंदर एचआरए मिलता है। किराए के मकान में रहने वाले कर्मचारी किराए की रसीद देकर एचआरए पर टैक्स छूट का लाभ उठा सकते हैं। लेकिन अगर कोई कर्मचारी अपने माता-पिता के साथ रह रहे हैं और उन्हें कोई किराया नहीं दे रहे हैं। तो सलाह होगी कि आप माता-पिता के साथ रेंट एग्रीमेंट बनाकर उनको हर महीना किराया दे और किराए की रसीद ऑफिस में जमा करके एचआरए पर टैक्स छूट का फायदा उठाएं। टैक्स छूट के लिए कितना निवेश करना है ये ठीक हिसाब लगाकर ही तय करें।


अगर पति, पत्नी के बैंक खाते में पैसे डालता है तो सेक्शन 64 के तहत पत्नी की सेविंग पर मिलने वाली ब्याज आय पति की आय में जुड़ती है। इसके अलावा बच्चों के नाम पर निवेश का ब्याज भी आप पिता-माता की आमदनी में जुड़ता है। इसलिए इससे आपका टैक्स नहीं बचेगा।


पंकज मठपाल का कहना है कि अगर किसी करदाता को कारोबारी साल की शुरूआत में एकमुश्त निवेश करना है तो प्राइवेट प्रॉव्हिडेंट फंड में करना चाहिए। 80 डी के तहत करदाता हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम पर 15,000 रुपये तक छूट ले सकते हैं। किसी करदाता की सैलरी 12 लाख रुपये तक है और अभी तक इक्विटी में निवेश नहीं किया है तो वो राजीव गांधी इक्विटी सेविंग स्कीम में निवेश शुरू करके टैक्स छूट का फायदा उठा सकते हैं। इसके अलावा 80ई के तहत करदाता 40 लाख रुपये से कम की प्रॉपर्टी खरीद पर और 25 लाख रुपये तक के लोन पर 1 लाख रुपये तक का अतिरिक्त टैक्स छूट ले सकते हैं। 


शॉर्ट टर्म कैपिटल एसेट बेचने पर टैक्स का भुगतान करना ही पड़ता है। लेकिन अगर कोई लॉन्ग टर्म कैपिटल एसेट बेचा है तो उस पर टैक्स बचाने के लिए दूसरी रेसिडेंशियल प्रॉपर्टी में निवेश करके टैक्स बचाया जा सकता हैं। अगर आपने कोई प्रॉपर्टी या सोना बेचा है तो उन पैसों पर टैक्स छूट पाने के लिए आपको उन पैसे को अगले 2 साल में अन्य दूसरी प्रॉपर्टी में लगाने चाहिए। 


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