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जोखिम बनाम मुनाफा

प्रकाशित Fri, 23, 2010 पर 10:37  |  स्रोत : Hindi.in.com

हर निवेश से जुड़ा है एक जोखिम


यह बात आप अक्सर सुनते होंगे कि इस ब्लूचिप शेयर को खरीद लीजिए इसमें कोई जोखिम नहीं है। बांड और डिपाजिट में जो लोग धन लगाते हैं, उनका विचार यही रहता है कि मैं कोई जोखिम नहीं लेना चाहता। मुझे मेरा धन सुरक्षित चाहिए।


क्या यह सही बात है? नहीं।


जब भी आप कोई निवेश करेंगे उसके साथ कोई न कोई जोखिम जरूर है। जोखिम का स्तर कम ज्यादा हो सकता है।

जोखिम बनाम संभावित लाभ


जब निवेश करें तो जोखिम के जरिए ही आप संभावित लाभ का आकलन कर सकते हैं। सिद्धांत यह है कि जितना ज्यादा जोखिम होगा, उतना ज्यादा मुनाफा हो सकता है। विभिन्न संपत्तियों में निवेश के विश्लेषण से पता चलता है कि इक्विटी शेयरों में लंबी अवधि में ज्यादा रिटर्न मिलता है। उसके बाद बैंक डिपाजिट और सरकारी बांड में ज्यादा रिटर्न मिलता है।


आप कहेंगे कि ऋणपत्र (या डेट) कैसे जोखिम वाला हो सकता है?

जिन कंपनियों की वित्तीय स्थिति लड़खड़ा जाती है वे आपके ब्याज भुगतान रोक सकती है और आपका धन लौटाने से पीछे हट सकती हैं। सरकारी बांड में भी कुछ जोखिम है। कंपनियों की तरह ही सरकार के साथ भी कुछ जोखिम हैं। कंपनी के पास पर्याप्त धन नहीं होने पर वह भुगतान में डिफाल्टर हो सकती है, लेकिन सरकार ज्यादा मुद्रा छापकर भुगतान कर सकती है। इसमें जोखिम छुपा है। ज्यादा मुद्रा छापने का अर्थ है कि मुद्रास्फीति बढ़ना। इससे आपके निवेश पर आपको कम प्रतिफल मिलेगा।


वैसे सरकार या अच्छे प्रबंधन वाली कंपनियों में वित्तीय संकट की आशंका कम रहती है।

जोखिम का अध्ययन जरूरी


आप सवाल कर सकते हैं कि जोखिम बनाम प्रतिफल के समीकरण का विश्लेषण करना इतना जरूरी क्यों है? हो सकता है कि आप ज्यादा जोखिम ले रहे हों और प्रतिफल कम मिल रहा हो। अगर कोई अवसर छूट गया तो आपकी संपत्ति में बड़ा अंतर आ जाएगा।