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दान देने की प्रक्रिया को समझें, बचाएं टैक्स

प्रकाशित Wed, 17, 2013 पर 11:55  |  स्रोत : Moneycontrol.com

ज्यादातर व्यक्ति समाज के लिए कुछ अच्छा करने की चाह के साथ साथ कुछ टैक्स बचाने के लिए दान देने का रास्ता अपनाते हैं। दान देने का उद्देश्य सामाजिक होने के साथ साथ आर्थिक भी होता है। हालांकि अगर टैक्स लाभ लेना चाहते हैं तो दाम देने की प्रक्रिया में कुछ खास बातों का ध्यान रखना चाहिए। यहां पर कुछ ऐसी बातें बताई गई हैं जो दान देते समय ध्यान में रखी जानी चाहिए। 


दान


सबस पहले दान शब्द का मतलब समझना चाहिए क्योंकि इसी से आगे की प्रक्रिया निर्धारित होती है। दान देने के तहत कौन सी चीजें इसके अंतर्गत आती हैं और कौन सी चीजें इससे बाहर रहती हैं ये जानकारी होनी चाहिए। दान देने का मतलब है कि कोई व्यक्ति किसी को कुछ धन देता है और इसके बदले में कोई वस्तु नहीं ली जानी चाहिए। ये पैसा अपनी मर्जी से दिया जाना चाहिए और इसके लिए किसी को बाध्य नहीं किया जा सकता है। ये तथ्य काफी ध्यान में रखना चाहिए क्योंकि इसी के आधार पर दान की परिभाषा को समझा जाता है।  


हालांकि कई तरह के दान होते हैं जो इंसान देता है जैसे स्कूल या कॉलिज में दाखिले के लिए कोई दान देता है तो इसे टैक्स छूट के दायरे में नहीं लाया जा सकता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि दान के बदले में आप कुछ हासिल कर रहे हैं और इसे दान नहीं माना जा सकता है।


दान की रसीद होनी जरूरी है


व्यक्ति को ये सुनिश्चित करना चाहिए कि दान के बदले में एक रसीद मिली हो जिससे दान का सबूत मिलता हो। इस रसीद में कई जानकारियां होती हैं जैसे दान प्राप्त करने वाले से कुल दान की संख्या लिखा जाना। इसके अलावा दान देने वाले का परमानेंट अकाउंट नंबर (पैन) के साथ भुगतान का वर्णन जैसे चेक नंबर या ड्राफ्ट नंबर की जानकारी रसीद में होनी चाहिए। इससे इंकम टैक्स रिटर्न भरते समय करदाता को टैक्स छूट का सही लाभ मिल सकेगा।


हालांकि इसके अलावा दान देने की स्थिति में एक अपवाद है जब व्यक्ति अपने नियोक्ता के द्वारा कुछ धनराशि दान में देता है। अक्सर प्राकृतिक आपदाओं के समय नियोक्ता अपने विभिन्न कर्मचारियों से दान इकट्ठा करता है और इसे कुछ खास फंड जैसे नेशनल डिफेंस फंड, प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष या मुख्यमंत्री राहत कोष में जमा कराता है। इस स्थिति में नियोक्ता अपने कर्मचरियो को एक सर्टिफिकेट जारी करता है जिसमें कर्मचारी द्वारा दी गई धनराशि का वर्णन होता है और इसके आधार पर व्यक्ति टैक्स छूट के लिए अर्जी दे सकता है। इस स्थिति में टैक्स लाभ लेने के लिए कुछ अतिरिक्त प्रयास करने की जरूरत नहीं है। 


दान से जुडी़ कुछ अन्य जानकारियां


ऐसा कुछ नहीं है कि दान देने की रकम किसी खास स्त्रोत से आई हो और जो दान दिया जा रहा है वो किसी खास क्षेत्र को दिया जाए। हालांकि कई बार ये जरूरी होता है कि दान दी जा रही राशि आपकी करयोग्य आय में से दी जा रही हो। अगर ऐसा नहीं होता है तो जो आय कर माफ है उस पर टैक्स छूट कैसे ली जा सकती है। ऐसा भी जरूरी नहीं है कि दान देने वाले को मौजूदा साल में प्राप्त हुई राशि से ही दान देना होगा। व्यक्ति अपनी सहूलियत के हिसाब से किसी भी साल में दान दे सकते हैं।


ये लेख अर्णव पंडया द्वारा लिखा गया है जो फाइनेंशियल प्लानर हैं।