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महंगाई के सकारात्मक पहलुओं के बारे में जानें

प्रकाशित Mon, 22, 2013 पर 10:44  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

किसी भी आम आदमी के लिए महंगाई सबसे बड़ी दुश्मन साबित होती है क्योंकि ये धीरे धीरे खर्च करने की शक्ति को खत्म करती जाती है। सभी जानकार इस बात की वकालत करते हैं कि आपके निवेश इस तरह के होने चाहिए जो महंगाई को हरा सकें और वास्तविक और अच्छे रिटर्न दे सकें। अगर आपके रिटर्न बढ़ती महंगाई से ज्यादा रिटर्न नहीं दे पाते हैं तो आप अपनी निवेश रणनीति से खुश नहीं होते हैं। हम ज्यादातर दो लक्ष्यों के लिए पैसा उधार लेते हैं जैसे होम लोन और पर्सनल लोन। 


ऐसा मुमकिन नहीं है कि आप अपने उधार ली गई धनराशि के मुताबिक महंगाई को देख सकें जैसा हम ज्यादातर अपनी निवेश रणनीति बनाते समय करते हैं। इसका मतलब है कि अगर अगर आपने 10 फीसदी ब्याज दर पर उधार ले रखा है और महंगाई दर 8 फीसदी है तो हम अपने उधार लेने की लागत को 2 फीसदी पर नहीं मान सकते हैं।


हालांकि महंगाई दर से हमें कुछ फायदे भी होते हैं जब ब्याज दरें ऊंची होती हैं। ये फायदा भत्तों के बढ़ने या सैलरी बढ़ने के रूप में मिल सकता है। ये महंगाई ही है जो आपकी सैलरी बढ़ाने के लिए एक अहम कारण होती है। तो जब महंगाई बढ़ने पर केंद्रीय कर्मचारियों का डीए बढ़ता है तो निजी सेक्टर के कर्मचारियों को सालाना इंक्रीमेंट मिलता है जिससे वो महंगाई को हरा सकें। इसका अर्थ है कि महंगाई किसी भी व्यक्ति की आय को बढ़ाने के लिए एक साधन होती है।


आरबीआई के सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक पिछले कुछ सालों में ग्रामीण इलाकों में लोगों की आय और भत्तों में अच्छी बढ़ोतरी हुई है जिससे महंगाई को हराने में मदद मिली है। इसके अलावा संगठित क्षेत्रों में भी आमदनी और भत्तों में ऐसी ही बढ़त देखने को मिली है। तो ये साफ है कि महंगाई इस दौरान बढ़ी है लेकिन उसके अनुपात में सैलरी और अन्य आय भी बढ़ी हैं। महंगाई बढ़ने के साथ साथ आम आदमी की सैलरी और भत्तों में जो बढ़ोतरी होती है वो काफी होती है।


आईए एक उदाहरण से इसे समझते हैं। मान लीजिए कि किसी व्यक्ति ने होम लोन लिया है। जब उसने होम लोन लिया तो उसकी सालाना ईएमआई 2.5 लाख रुपये थी और आमदनी 10 लाख रुपये थी। इसका मतलब है कि वो अपनी सैलरी का 25 फीसदी ईएमआई के रुप में अदा कर रहा है। 10 साल के बाद उसकी सैलरी 21 लाख रुपये हो जाती है लेकिन उसकी ईएमआई समान रहती है। इस तरह वो अपनी सैलरी का 11.69 फीसदी होम लोन के रीपेंमेंट के रूप में अदा कर रहा है। इस तरह उसकी होम लोन तो समान रहा लेकिन उसकी लायबिलिटी कम हो गई। जब ब्याज दरों में गिरावट आती है तो इसका फायदा होमलोन लेने वाले व्यक्तियों को मिलता है।


हालांकि अगर होम लोन फिक्स्ड रेट पर लिया जाता तो इसका ज्यादा फायदा मिल सकता था। इसके अलावा महंगाई के चलते उसके घर की कीमत भी बढ़ चुकी होती है। भारत में होम लोन लेने वाले ज्यादातर मध्यमवर्गीय परिवारों को महंगाई के साथ घर की कीमत बढ़ने का फायदा मिलता है। हालांकि इस बात पर बहस हो सकती है कि महंगाई के चलते घर से जुड़े अन्य खर्चे भी बढ़त जाते हैं लेकिन इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है कि महंगाई बढ़ने के साथ साथ लगातार निवेश करने से वैल्थ क्रिएशन होता है।


ये उदाहरण बताता है कि जब महंगाई ज्यादा होती है और व्यक्ति लोन लेता है तो समय के साथ उसकी लोन रीपेमेंट की मात्रा कम होती जाती है और मकान की वैल्यू बढ़ती जाती है जो महंगाई के एक फायदे को दिखाता है। महंगाई हमेशा आपके दुश्मन की तरह ही नहीं बल्कि आपके दोस्त की तरह भी पेश आ सकती है। ये एक सच है कि जो लोग रियल एस्टेट में पैसा लगाते हैं उनके लिए महंगाई फायदा भी करा सकती है। जो लोग रियल एस्टेट में निवेश करते हैं उन्हें महंगाई का ध्न्यवाद करना चाहिए क्योंकि इसके जरिए उनके मकानों की कीमत काफी बढ़ चुकी होती है।    


(ये लेख विवेक शर्मा ने लिखा है, जो फाइनेंशियल प्लानर और ट्रेनर हैं। उनसे Viveksharma95@rediffmail.com पर संपर्क किया जा सकता है)