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निर्माणाधीन प्रॉपर्टी पर कैसे पाएं टैक्स छूट!

प्रकाशित Wed, 15, 2013 पर 12:47  |  स्रोत : Moneycontrol.com

आप सभी को जानकारी होगी कि आप अपने होम लोन की ईएमआई पर निम्नलिखित टैक्स लाभ पा सकते हैं-


1.ईएमआई के ब्याज पर 1.5 लाख रुपये तक की टैक्स छूट (आयकर की धारा 24 के तहत)


2.ईएमआई की मूल राशि पर 1 लाख रुपये तक की टैक्स छूट जो सेक्शन 80 सी के तहत मिलती है।


हालांकि ये छूट तभी लागू होती है जब प्रॉपर्टी बनकर तैयार हो जाती है और रहने के लिए तैयार होती है।


चूंकि कई प्रॉपर्टी निर्माणाधीन समय के दौरान खरीदी जाती हैं तो भी डेवलपर को रकम का भुगतान करना होता है, इस दौरान लोन का डिस्बर्मेंट हो सकता है। इसलिए बहुत से लोग तभी से ईएमआई का भुगतान शुरु कर देते हैं जब प्रॉपर्टी का काम चल रहा हो। दूसरे शब्दों में प्रॉपर्टी का काम पूरा नहीं होता लेकिन ये अधिग्रहण के लिए तैयार हो जाती है।


इस तरह की ईएमआई के लिए जो अंडर कंस्ट्रक्शन पीरियड के लिए चुकाई जाती हैं, निम्नलिखित टैक्स प्रावधान लागू होते हैं।


1.सेक्शन 80सी के अंतर्गत मूल राशि पर कोई टैक्स छूट नहीं मिलती है, दूसरे शब्दों में कंस्ट्रक्शन के दौरान चुकाए गए मूल राशि पर कोई टैक्स छूट नहीं मिल सकती है।


2.चुकाए गए ब्याज पर तुरंत कोई टैक्स छूट नहीं मिलती है। इसकी बजाए प्रॉपर्टी का काम पूरा होने के साल के पहले साल में चुकाए गए सारे ब्याज को जोड़ा जोता है और इसके 1/5 भाग को छूट के तौर पर दिया जाता है। ये प्रॉपर्टी पर काम पूरा होने के 5 साल बाद तक दिया जाता है।


अगर साल के दौरान प्रॉपर्टी का काम पूरा हो जाता है तो काम पूरा होने के पहले देने वाला ब्याज काम पूरा होने के बाद देने वाले ब्याज के साथ जो़ड़ दिया जाता है।


उदाहरण के लिए अगर आपको काम पूरा होने का सर्टिफिकेट दिसंबर 2013 में मिला तो इसके लिए दिया गया ब्याज काम पूरा होने के बाद के महीनों के ब्याज में जोड़ दिया जाएगा (जनवरी से मार्च 2014 तक) और इस पर सामान्य 1.5 लाख रुपये की टैक्स छूट लागू होगी। मार्च 2013 तक चुकाए गया सारा ब्याज जोड़ लिया जाएगा और 2013-14 से 2017-18 के दौरान 5 सालाना किश्तों में छूट चुकाई जाएगी।


दुर्भाग्य से बढ़ती प्रॉपर्टी कीमतों के चलते होमलोन की राशि भी लगातार बढ़ती जा रही है। इसी के आधार पर कई बार होमलोन के ब्याज की रकम सालाना 1.5 लाख रुपये की सीमा को भी पार कर जाता है। इसलिए 1/5 अंडर कंस्ट्रक्शन ब्याज कटने पर भी ये राशि पर्याप्त नहीं पड़ पाती है। इसीलिए कई मामलों में अंडर कंस्ट्रक्शन प्रॉपर्टी में मूल राशि के साथ साथ चुकाए गए ब्याज पर भी टैक्स छूट का लाभ नहीं मिल पाता है।


अच्छी बात ये है कि छोटे शहरों और कस्बों में प्रॉपर्टी कीमतें और उसी अनुपात में लोन की रकम इतनी ज्यादा उंची नहीं है। और दूसरा हाल ही के बजट में सिर्फ पहली बार घर खरीदने वालों को 40 लाख रुपये तक की प्रॉपर्टी के 25 लाख रुपये तक के लोन के ऊपर अतिरिक्त 1 लाख रुपये की छूट दी गई है। तीसरा हाल के महीनों में ब्याज दरों में गिरावट आई है। इसलिए टियर2 और टियर3 शहरों में अंडर कंस्ट्रक्शन प्रॉपर्टी के ब्याज पर टैक्स छूट का लाभ उठाना आसान हो गया है।


ये लेख संजय मताई द्वारा लिखा गया है जो पर्सनल फाइनेंस एडवाइजर, लेखक और ऑनलाइन फाइनेंशियल ट्रेनर हैं। उनके ब्लॉग thewealtharchitects.blogspot.in पर और अधिक जानकारी ली जा सकती है।