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भारत परिवार दिवस: करें सहीं फाइनेंशियल प्लानिंग

प्रकाशित Wed, 15, 2013 पर 14:29  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

एक परिवार की खुशियों के लिए पैसा बहुत जरूरी है जो बढ़ता है सही फाइनेंशियल प्लानिंग से। भारत परिवर दिवस के खास मौके पर जानिए फ्रीडम फाइनेंशियल प्लानर के सीईओ सुमीत वैद से कि किसी परिवार के लिए कितनी जरूरी है फाइनेंशियल प्लानिंग और आपको अपने पैसे कहां इन्वेस्ट करने चाहिए ताकि वक्त पड़ने पर काम आ सकें।


सवाल : हाल ही में शादी हुई तो कैसी हो आपकी फाइनेंशियल प्लानिंग?


सुमीत वैद : नव दंपत्ति को अपने एक-दूसरे की खर्च करने की आदतों को समझना चाहिए।  मिलकर अपने लक्ष्य तय करने चाहिए और फाइनेंशियल प्लानिंग करनी चाहिए। नव दंपत्ति को पर्याप्त हेल्थ इंश्योरेंस लेना चाहिए और साथ ही लाइफ कवर भी पर्याप्त होना चाहिए। मेडिकल इमरजेंसी की हालत में हेल्थ इंश्योरेंस बहुत काम आता है। परिवार जिस पर निर्भर हो उसे अपने लिए टर्म कवर लेना चाहिए। पति-पत्नी दोनों कमाते हैं तो दोनों को टर्म कवर लेना चाहिए। साथ ही किसी भी इमरजेंसी से निपटने के लिए तैयार रहना


चाहिए। अक्सर युवाओं को घर खरीदने की जल्दी होती है। घर लेने की जल्दी में युवाओं को जरूरी लक्ष्यों को नजर अंदाज नहीं करना चाहिए। जितना महंगा घर लेंगे ईएमआई का बोझ भी उतना ज्यादा होगा। नव दंपत्ति कंपनी के ग्रुप हेल्थ कवर में माता-पिता को जोड़ें तो अच्छा होगा। बच्चे के जन्म के साथ ही उसकी उच्च शिक्षा के लिए निवेश शुरू कर देना चाहिए। युवाओं का रिटायरमेंट प्लानिंग पर अक्सर ध्यान नहीं जाता। लेकिन रिटायरमेंट की तैयारी जितनी जल्दी करेंगे उतना आराम रहेगा। नवयुगल को मौजूदा खर्चों के हिसाब से रिटायरमेंट का लक्ष्य तय करना चाहिए।


सवाल : बच्चे बड़े होने के बाद फाइनेंशियल प्लानिंग कैसी हो?


सुमीत वैद : बच्चे बड़े हो जाने के बाद निवेश स्ट्रैटेजी बदल जाती है। निवेश को नई दिशा देनी पड़ती है और वक्त के साथ प्लानिंग भी बदलती है। दंपत्तियों को अपने साथ अपने बच्चों का भी पर्याप्त हेल्थ इंश्योरेंस कराना चाहिए। पर्सनल एक्सिडेंट और क्रिटिकल इलनेस इंश्योरेंस भी जरूर करवाना चाहिए।

लाइफ इंश्योरेंस के लिए प्योर टर्म प्लान लेना उचित होगा। बजाज  आलियांज हेल्थ गार्ड और अपोलो म्युनिख ये कुछ अच्छे हेल्थ प्लान है।  एनडाउमेंट, मनी बैक और यूलिप जैसी पॉलिसी का प्रीमियम बहुत ज्यादा होता है और लाइफ कवर बेहद कम। मौजूदा पॉलिसी को जारी रखना है, पेड-अप कराना है या सरेंडर करना है तो पहले आपको इसकी समीक्षा करनी चाहिए। इमरजेंसी फंड के पैसों को बचत खाते की जगह लिक्विड फंड में रखें ताकि ज्यादा रिटर्न मिले सकें। अगर आपके बचत खाते में ज्यादा पैसे हैं तो उनसे आपको ऊंचे ब्याज वाले कर्ज चुकाने चाहिए।

रिटायरमेंट के पहले आपको सारे कर्ज चुकाने का लक्ष्य बनाना चाहिए। बच्चों के ग्रेजुएशन का औसत खर्च 4-7 लाख रुपये हो सकता है। वहीं पोस्ट ग्रेजुएशन का औसत खर्च 5-10 लाख रुपये हो सकता है। एक बच्चे की शादी का औसत खर्च 12 लाख रुपये हो सकता है।


इन सभी लक्ष्यों की रकम और समय सीमा करते वक्त आपको अपने रिटायरमेंट भी का खयाल रखना चाहिए। अगर आय के हिसाब से आपकी लाइफस्टाइल होगी तो बचत संभव हो पाएंगी। आपको ध्यान रखना चाहिए कि छुट्टी में घूमने पर कहीं पूरी बचत खर्च न हो जाएं। बुढ़ापे में माता-पिता के मेडिकल खर्चों के लिए भी बचत जरूर करनी चाहिए। रिटायरमेंट के बाद का कोई लक्ष्य है तो उस पर भी खास ध्यान दें। 
 
सवाल : कैसे करें रिटायरमेंट के बाद फाइनेंशियल प्लानिंग?


सुमीत वैद : जिम्मेदारियां घटने के बाद भी निवेश स्ट्रैटेजी बदल जाती है। रिटायरमेंट के बाद चाहिए सुकून और अब लाइफ कवर की जरूरत नहीं होती है।


आम तौर पर लोग 55 साल की उम्र के बाद रिटायरमेंट लेते हैं। रिटायर्ड लोगों के बच्चे आम तौर पर आत्मनिर्भर होते हैं। रिटायरमेंट के बाद मेडिकल खर्चों का खास ध्यान रखना जरूरी होता है। आप बच्चों की कंपनी से मिलने वाले ग्रुप इंश्योरेंस में खुद को जोड़ सकते हैं। अगर परिवार की जिम्मेदारी नहीं है तो आपको लाइफ इंश्योरेंस लेने की भी जरूरत नहीं है।


पति-पत्नी को अपनी वसीयत जरूर तैयार करनी चाहिए। इमरजेंसी के लिए बचत खाते में हमेशा पैसे रखने चाहिए। रिटायरमेंट के बाद सालाना खर्च कितना होगा ये पहले से तय करना चाहिए। एक से ज्यादा प्रॉपर्टी है तो उसे बेचने के बारे में भी आप सोच सकते हैं।



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