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इंश्योरेंस में पोर्टेबिलिटी का उठाएं लाभ

प्रकाशित Sat, 15, 2013 पर 11:17  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

पॉलिसीबाजार डॉट कॉम के मार्केटिंग हेड अनुज भागिया और रूंगटा सिक्योरिटीज के हर्षवर्धन रूंगटा बता रहे हैं इंश्योंरेंस लेते समय किन बातों का ध्यान रखें, वहीं कौन सी पॉलिसी लेना बेहतर रहेगा।


सवाल: मैंने साल 2006 में बजाज की मेडिक्लेम पॉलिसी ली थी। लेकिन अब इसे बदलकर पोर्टेबिलिटी के तहत मैक्स बूपा या फिर अपोलो म्युनिख की पॉलिसी लेना चाहता हूं। क्या पोर्टेबिलिटी के तहत ऐसा किया जा सकता है?


अनुज भागिया: मौजूदा पॉलिसी से यदि संतुष्ट नहीं हैं तो पोर्टेबिलिटी के तहत दूसरी पॉलिसी ले सकते हैं। इसके लिए जिस कंपनी की पॉलिसी आप लेना चाहते हो उसके पास एक अर्जी देना होगा। इस प्रक्रिया को कम से कम 45 दिन लगते हैं। वहीं मैक्स बूपा की पॉलिसी अच्छी है इसे लिया जा सकता है।  हालांकि कुछ परिस्थितियों में ऐसा भी हो सकता है मैक्स बूपा आपकी पोर्टेबिलिटी की अर्जी खारिज कर दे।


सवाल: मैंने एलआईसी से 18 लाख रुपये का टर्म प्लान लिया है। जिसका सालाना 9,000 रुपये प्रीमियम जाता है। एलआईसी के मुकाबले निजी इंश्योरेंस कंपनियों के प्लान सस्ते क्यों है। क्या निजी कंपनियों सस्ते प्लान देकर क्लेम रिजेक्ट कर देती है?


अनुज भागिया: आप जितने प्रीमियम का भुगतान कर रहे हैं, उसमें 30 साल के लिए 75 लाख रुपये का कवर मिल जाएगा। वहीं निजी कंपनियों से कोई भी इंश्योरेंस पॉलिसी लेते हैं तो क्लेम रिजेक्ट होने का खतरा नहीं होता है। बस पॉलिसी लेते समय अपनी संपूर्ण और सही जानकारी इंश्योरेंस कंपनी को मुहैया कराएं।


सवाल: मेरी पत्नी बैंक में सरकारी नौकरी करती है, उसके बैंक से पूरे परिवार के लिए मेडीकल इंश्योरेंस है। मेरे पास भी कंपनी की ओर से 3 लाख का हेल्थ कवर है। वहीं माता-पिता के लिए भी अलग से कवर लिया हुआ है। ऐसे में क्या खुद के लिए अलग से हेल्थ कवर लेना जरूरी है?


हर्ष रूंगटा: कंपनी से मिले हेल्थ कवर के अलावा अलग से कवर लेना जरूरी है। यदि आपकी नौकरी जाती है तो कवर नहीं रहेगा। अपने लिए एक अलग से पॉलिसी से ले सकते हैं। आप टाटा एआईजी मेडिप्राइम या फिर अपोलो म्युनिख हेल्थ प्लान ले सकते हैं।


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