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टैक्स गुरु: जानें टैक्स बचत के गुरु मंत्र

प्रकाशित Sat, 15, 2013 पर 15:44  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

टैक्स से जुड़े आपके हर सवाल का जबाव जानिए टैक्स गुरु सुभाष लखोटिया जी से।


सवाल : 1 जून से लागू होने वाले टीडीएस के नए नियम कितने जरूरी है? 


सुभाष लखोटिया : सरकार ने हाल ही में इनकम टैक्स (5वां संशोधन) नियम 2013 का नोटिफिकेशन जारी किया है। इस नोटिफिकेशन में कृषि भूमि के अलावा अचल संपत्ति की खरीद पर टीडीएस से जुड़े नए नियम बताए है। 50 लाख रुपये या इससे ज्यादा की प्रॉपर्टी के सौदों पर 1 फीसदी टैक्स कटेगा। यह 1 फीसदी टैक्स टीडीएस काटने और उसे हफ्ते भर के अंदर सरकारी खाते में जमा करने की जिम्मेदारी खरीदारी की होती है।    


सवाल : पुश्तैनी प्रॉपर्टी की बिक्री पर कैसे टैक्स छूट ले सकते हैं?    


सुभाष लखोटिया : यदि करदाता सर्किल रेट से कम पर भी प्रॉपर्टी बेचते हैं तो इनकम टैक्स, सर्किल रेट के हिसाब से ही निकाला जाएगा। टैक्स बचाने के लिए करदाता 2 प्रॉपर्टी नहीं खरीद सकते। केवल एक प्रॉपर्टी पर ही टैक्स छूट मिल सकती हैं। 


सवाल :  जुलाई 2013 में पिता बनने वाला हूं क्या इस दौरान पत्नी के मैटरनिटी खर्च पर टैक्स छूट मिल सकती है?


सुभाष लखोटिया : आयकर की धारा 80डी के तहत मैटेरनिटी खर्च पर छूट नहीं मिलेगी। लेकिन अगर आपने हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी ली है और मैटेरनिटी खर्च उस पॉलिसी का हिस्सा है तो आपको छूट मिलेगी।  
 
सवाल : अगर पिताजी बहु को गिफ्ट के तौर पर कैश देंगे तो टैक्स की देनदारी किसकी होगी? 


सुभाष लखोटिया : पिता की ओर से बहु को मिलने वाले गिफ्ट पर टैक्स नहीं लगेगा। लेकिन गिफ्ट से होने वाली इनकम पर क्लबिंग के प्रावधान लागू होंगे। लेकिन अगर टैक्स फ्री बॉंड में निवेश किया जाएं तो इनकम क्लब नहीं होगी।


सवाल : किस एफडी पर करदाता टैक्स छूट का फायदा उठा सकते हैं?  

सुभाष लखोटिया : बैंक एफडी पैसा वसूल फॉर्म्यूला है। बैंक में कम से कम 5 साल की एफडी होना जरूरी है। लेकिन ध्यान रखें कि एफडी किसी शेड्यूल्ड बैंक में ही हों। क्योंकि कॉर्पोरेट एफडी में निवेश पर टैक्स छूट का फायदा नहीं मिलता है। एफडी में निवेश पर करदाता 80 सी के तहत टैक्स छूट का लाभ उठा सक्ते हैं। बैंक एफडी में निवेश करके इंडिविजुअल और एचयूएफ दोनों छूट के हकदार बन सकते हैं। करदाता बैंक एफडी में साल भर में 1 से ज्यादा बार निवेश कर सकते हैं।   


सवाल : क्रेडिट कार्ड पर टैक्स के नए नियम क्या है? 


सुभाष लखोटिया : साल में 2 लाख रुपये से ज्यादा क्रेडिट कार्ड से खर्चा होता है तो एआईआर में पूरा ब्यौरा आ जाता है। आपको आईटीआर में क्रेडिट कार्ड ट्रांजेक्शन का ब्यौरा देने की जरूरत नहीं है। लेकिन अगर आईटी विभाग का नोटिस आता है तब आपको पूरा ब्यौरा देना होगा।


सवाल : सीपीसी, बंगलुरू से नोटिस में वित्त वर्ष 2008-09 के बकाया का रिटर्न सही भरा था, लेकिन वित्त वर्ष 2009-10 के रिटर्न में भूल से वित्त वर्ष 2008-09 हे एलिख दिया, अब क्या करें? 


सुभाष लखोटिया : वित्त वर्ष 2008-09 या वित्त वर्ष 2009-10 के लिए रिवाइज्ड रिटर्न फॉर्म अब नहीं भरा जा सकता है। इसलिए आप आयकर विभाग के ऑफिसर को पूरी स्थिति बताते हुए चिठ्ठी लिखें। 


सवाल : वित्त वर्ष 2012-13 में 20,000 रुपये के इंफ्रास्ट्रक्चर बॉन्ड खरीदें, ब्याज मार्च 2013 में मिला, क्या इस पर टैक्स देना होगा?


सुभाष लखोटिया : इंफ्रास्ट्रक्चर बॉन्ड में निवेश पर मिले ब्याज पर टैक्स देना होगा। इसे आप अपने इनकम टैक्स रिटर्न में जरूर दिखलाएं।
 
सवाल : क्या सभी के लिए ई-रिटर्न भरना जरूरी है? 


सुभाष लखोटिया : रिटर्न कैसे भरे, ये फैसला टैक्सपेयर का है। कुछ कैतेगरी के लिए ई-रिटर्न भरना जरूरी है। डिजिटल सिग्नेचर के साथ ई-रिटर्न भरना बेहतर होता है। ई-रिटर्न भरने पर प्रोसेसिंग और रिफंड तेजी से होता है। डिजिटल सिग्नेचर के बिना ई-रिटर्न भरने पर आईटीआरवी बंगलुरू भेजना जरूरी है। 


सवाल : एक कंसल्टिंग फर्म में 15 महीने तक काम किया, कंपनी ने टीडीएस काटा लेकिन फॉर्म 16 नहीं दिया, रिटर्न नहीं भर पा रहा हूं, क्या करू?  


सुभाष लखोटिया : टीडीएस जमा नहीं करने और फॉर्म 16 नहीं देने के लिए कार्रवाई की मांग की जा सकती है। आप इनकम टैक्स कमिश्नर से संपर्क करें और कंसल्टेंसी फर्म की शिकायत करें।  


सवाल : रिकरिंग डिपॉजिट पर टैक्स छूट कैसे ले सकते हैं?


सुभाष लखोटिया : सिर्फ रिकरिंग डिपॉजिट पर मिले ब्याज पर टैक्स लगता है। मैच्योरिटी पर मिली मूल रकम पर टैक्स नहीं लगता। आप रेकरिंग डिपॉजिट से पैसा निकालकर टैक्स फ्री बॉंन्ड में पैसा लगाए तब आपका टीडीएस बिल्कुल नहीं कटेगा।  


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