होम लोन के लिए फिक्स्ड रेट लोन बेहतर -
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होम लोन के लिए फिक्स्ड रेट लोन बेहतर

प्रकाशित Thu, 04, 2013 पर 15:22  |  स्रोत : Moneycontrol.com

ब्याज दरें लागू होने के बारे में निम्न 3 तरह के प्रकार सामने आते हैं-


1. फ्लोटिंग ब्याज दर होम लोनः ये सबसे ज्यादा मिलने वाले विकल्प होते हैं जहां बैंक की ब्याज दर बैंक के बेस रेट से जुड़ी होती है। जैसे जैसे बेस रेट में बदलाव होता है (ये हरेक तिमाही पर हो सकता है) उसी के अनुसार आपके होम लोन पर लगने वाला ब्याज भी बदल जाता है।


2.  छोटी अवधि के फिक्स्ड रेट होम लोनः ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए बैंक टीजर लोन की तरह लोन देते हैं जिसमें शुरुआती कुछ समय के लिए निचली ब्याज दरें लागू होती हैं। जैसे 2 से 5 साल के लिए। इसके बाद या तो इस लोन को साधारण फ्लोटिंग रेट लोन में बदल दिया जाता है या फिर अगले 2-5 सालों के लिए फिर से ब्याज दरें तय की जाती हैं।


3. लंबी अवधि के फिक्स्ड रेट होम लोनः इस तरह के होम लेन में या तो पूरे लोन की अवधि के लिए ब्याज दर फिक्स की जाती है या फिर 7-8 सालों के लिए। सावधान रहें क्योंकि बैंक के पास ये अधिकार होता है कि स्थिति बहुत ज्यादा खराब होने पर बैंक के पास ब्याज दरें बढ़ाने का अधिकार होता है। आदर्श रुप से इस तरह के क्लॉज स्वीकार नहीं किए जाने चाहिए।


हालांकि अलग अलग बैंको के अलग अलग स्कीमों के हिसाब से अलग नियम हो सकते हैं।


इन तीनों में फ्लोटिंग रेट लोन सबसे सस्ते होते हैं। छोटी अवधि के फिक्स्ड रेट लोन फ्लोटिंग रेट से 0.25 फीसदी से 2 फीसदी तक महंगे होते हैं और लंबी अवधि के फिक्स्ड रेट लोन फ्लोटिंग रेट की तुलना में सबसे ज्यादा 2 से 4 फीसदी महंगे होते हैं।


ये सामान्य बात है कि आप जब तक ब्याज दरों के उतार चढ़ाव को झेलने के लिए तैयार रहते हैं आपका जोखिम कम रहता है। हालांकि अगर बैंक ये जोखिम उठाता है तो वो ज्यादा दर पर आपसे चार्ज कर सकते हैं।


फ्लोटिंग रेट होमलोन लेने से आपको सस्ती ईएमआई का विकल्प मिल सकता है जो किसी भी लेनदार के लिए पहली प्राथमिकता होता है। चूंकि आगे चलकर अर्थव्यवस्था में ब्याज दरें गिरने की उम्मीद है इसलिए फिक्स्ड रेट होम लोन लेना अच्छा विचार नहीं है।


इसके साथ ही आरबीआई इस बात को भी ध्यान में रखकर कदम उठा रहा है कि बैंक घटती दरों के बावजूद अपनी ब्याज दरें नहीं घटा रहे हैं। बैंक नए ग्राहकों को सस्ती ब्याज दरें देने को तैयार रहते हैं लेकिन पुराने ग्राहकों को बढ़ी हुई ब्याज दरों पर ही लोन जारी रखते हैं। 


कई बार कुछ लोग ब्याज दरों के उतार चढ़ाव से डरते हैं और फिक्स्ड रेट पर होम लोन लेना पसंद करते हैं खासतौर पर तब जब लोन 1-2 दशक के लिए हो। अगर आप जोखिम उठाना पसंद नहीं करते हैं तो आप लंबी अवधि के फिक्स्ड रेट होम लोन ले सकते हैं भले ही थोड़े महंगे हों। ये एक इंश्योरेंस प्रीमियम चुकाने जैसा है जिससे बढ़ती ब्याज दरों से सुरक्षा मिल सकती है।


हालांकि आप कितना जोखिम उठा सकते हैं इस बात को तय करना आप के ऊपर ही निर्भर करता है। तो आप कैसे तय करें कि आप कितना जोखिम ले सकते हैं और इसके आधार पर सही चुनाव कैसे करें?


आर्थिक जानकारों के मुताबिक आपकी कुल ईएमआई जिसमें सभी लोन के साथ साथ होम लोन भी शामिल हो, आपकी मासिक आमदनी के 45-50 फीसदी से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। इसे वित्तीय भाषा में डेट टू इनकम (डीटीआई) रेश्यो कहा जाता है।


इसलिए अगर मौजूदा ब्याज दरों पर आपका डीटीआई पहले से ही इस सीमा के नजदीक पहुंच चुका है तो भविष्य में ब्याज दरें बढ़ने से आप आर्थिक खतरे में आ सकते हैं। इसलिए आपका फिक्स्ड रेट लोन लेना ज्यादा सुरक्षित हो सकता है।


जब आपका डीटीआई 30-35 फीसदी से कम हो और आप सुरक्षित स्थिति में हों और ब्याज दरें बढ़ने का स्थिति में आप जोखिम उठाने के काबिल हों, आपको सिर्फ तब ही फ्लोटिंग रेट लोन लेने चाहिए। 


वैसे तो फिक्स्ड रेट और फ्लोटिंग रेट लोन के बीच चुनाव करना एकमुश्त फैसला नहीं हो सकता है जो अगले 10-20 सालों के लिए फायदेमंद साबित हो क्योंकि इस दौरान कई बदलाव सामने आते हैं। इसलिए ऐसी स्थिति में आपको अपने लोन की समयसीमा में 2-3 विकल्प रखने ही चाहिए।


अगर आपका फिक्स्ड रेट लोन है और ब्याज दरें नीचे आने पर आपका डीटीआई नीचे आता है तो आप समय से पहले लोन चुका सकते हैं और किसी सस्ते फ्लोटिंग रेट लोन में स्विच कर सकते हैं। और अगर आपने पहने फ्लोटिंग रेट लोन ले रखा है और ब्याज दरें बहुत महंगी होनी शुरु हो जाती हैं तो आप फिक्स्ड रेट लोन में स्विच कर सकते हैं। जाहिर तौर पर आपके इस स्विचिंग में लगने वाली लागत का अनुमान लगाना जरूरी होगा।


हालांकि आपको ये जान लेना चाहिए कि ज्यादातर बैंक आपको फ्लोटिंग रेट पर ही लोन देने की इच्छा रखते हैं और बैंकों में से बहुत कम हैं जो आपको फिक्स्ड रेट होम लोन प्रदान करते हैं। इसलिए आपको अपने उपयुक्त फिक्स्ड रेट लोन लेने के लिए थोड़ी ज्यादा मेहनत से खोज करनी पड़ेगी।


इस लेख के लेखक संजय मताई हैं जो पर्सनल फाइनेंस एडवाइजर, और ऑनलाइन फाइनेंशियल ट्रेनर हैं। उनके ब्लॉग
thewealtharchitects.blogspot.in पर उनके बारे में और अधिक जानकारी ली जा सकती है।