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भारत में इंश्योंरेंस और निचली निवेश दर की समस्या

प्रकाशित Fri, 05, 2013 पर 11:01  |  स्रोत : Moneycontrol.com

इंश्योरेंस आजकल के जमाने में एक वरदान की तरह है। हालांकि इंश्योरेंस और निवेश के बारे में कुछ तथ्य जानकार आप सबको बहुत हैरानी होगी। क्या आप जानते हैं कि देश की कुल जनसंख्या के केवल 0.2 फीसदी हिस्से के पास हैल्थ इंश्योरेंस है। इंश्योरेंस के फायदे ना समझने के चलते देश की जनसंख्या का एक बड़ा भाग बिना इंश्योरेंस के रह रहा है। इससे कम निवेश की समस्या पैदा होती है। जहां शहरों में इंश्योरेंस कराने वालों की संख्या अच्छी खासी है वहीं ग्रामीण क्षेत्रों बहुत कम लोगों के पास इंश्योरेंस पॉलिसी हैं। ये समस्या आईआरडीए द्वारा पहचानी गई है और इसको सुधारने और निवेश की दर बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।


भारत में बिना इंश्योंरेंस कराने वालों की संख्या


देश में इंश्योरेंस सेक्टर तेजी से बढ़ रहा है और साल 2012 में कुल 60,000 करोड़ रुपये रुपये इंश्योरेंस प्रीमियम के रुप में इकट्ठा किए गए। लेकिन इसके बावजूद इस तथ्य को झुठलाया नहीं जा सकता कि देश के बहुत से लोगों के पास इंश्योरेंस नहीं है। जब हमने जाना कि केवल 0.2 फीसदी लोगों के पास हैल्थ इंश्योरेंस है उनमें से केवल 25 फीसदी लोगों के पास जनरल इंश्योरेंस कवर है। इसके अलावा आपको ये जानकर भी हैरान होगी कि ज्यादातर लोगों के पास या तो जरूरत से ज्यादा इंश्योंरेस है या अपनी जरूरत के हिसाब से अपर्याप्त कवरेज है। पिछने महीने टाइम्स ऑफ इंडिया में प्रकाशित एक लेख के मुताबिक भारतीय सड़को पर 35 फीसदी कारें बिना इंश्योरेंस के दौड़ रही हैं। इस लेख में न्यू इंडिया इंश्योरेंस के चेयरमैन जी श्रीनिवासन ने बताया कि करीब 70 फीसदी 2 व्हीलर और 30-35 फीसदी 4 व्हीलर बिना इंश्योरेंस के हैं। ये समाज के लिए एक चुनौती है क्योंकि इस तरह के वाहनों से होने वाले एक्सीडेंट के पीडितों को पर्याप्त मुआवजा नहीं मिल पाता है। 


निवेश की कम दर


कम इंश्योरेंस के अलावा एक और बात है जो इंश्योंरेंस सेक्टर के लिए परेशानी वाली है। वो है लो पेनीट्रेशन या निवेश की निचली दर। इंश्योरेंस का पेनीट्रेशन जी़डीपी के इंश्योंरेस प्रीमियम के रेश्यो से नापा जाता है। इंडिया लाइफ इंश्योरेंस 2012 में मैकेन्जी एंड कंपनी ने बताया कि शहरी इलाकों में इंश्योरेंस का पेनीट्रेशन बाजार के 65 फीसदी के बराबर है। और ये निचली आय वाले सेगमेंट में और भी कम हो सकता है। ग्रामीण इलाकों में तो इंश्योरेंस कराने वालों की संख्या और भी कम है और पेनीट्रेशन दर काफी नीचे है। लाइफ इंश्योरेंस की कम दर का एक सबसे बड़ा कारण है इंश्योरेंस की मिस सेलिंग। आईआरडीए ने बताया है कि उनके पास ज्यादातर समस्याएं जो निवारण के लिए आती हैं वो इंश्योंरेस पॉलिसी की गलत सेलिंग की होती हैं। इश्योंरेंस सेक्टर में प्रोडक्ट को ग्राहकों के अनूकूल और आसान बनाने की जरूरत है जिससे ये आन जनता तक आसानी से पहुंच सके।


ऊपर बताए गए तथ्य तेजी से बढ़ते इंश्योंरेंस सेक्टर की कुछ खामियों की ओर इशारा करते हैं। हालांकि शहरी इलाकों में इंश्योरेंस की दर अच्छी है लेकिन सिर्फ इसलिए हम ग्रामीण इलाकों को नजरंदाज नहीं कर सकते। इश्योंरेंस सेक्टर में कुछ बदलावों की तुरंत जरूरत है जिससे अधिक से अधिक ग्राहक इंश्योरेंस की ओर आकर्षित हो सकें। इसके अलावा लोगों को इश्योंरेंस की जरूरत और फायदों के बारे में जागरुक करने की भी जरूरत है। सिर्फ इसी के बाद कम इंश्योंरेंस और निवेश की निचली दर की समस्या से निपटा जा सकता है।


ये लेख डीपक योहानन ने लिखा है जो माईइंश्योंरेंसक्लब डॉटकॉम के सीईओ हैं। Deepak@myinsuranceclub.com पर आप उनसे संपर्क कर सकते हैं।