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एजूकेशन लोन का निपटारा समय से करें

प्रकाशित Fri, 05, 2013 पर 16:38  |  स्रोत : Moneycontrol.com

किसी कोर्स में दाखिला लेने के लिए दिनों दिन ऊंची चढ़ती कट ऑफ लिस्ट के चलते छात्र अपने मनपसंद कोर्स में दाखिल नहीं हो पाते हैं। एक तरफ तो कट ऑफ लिस्ट का बढ़ता प्रतिशत और दूसरी तरफ शिक्षा के बढ़ते खर्च के चलते छात्रों के लिए शिक्षा हासिल करना मुश्किल काम होता जा रहा है। वहीं दूसरी तरफ रुपये की गिरती कीमते से उन छात्रों के लिए परेशानी खड़ी हो गई है जो विदेश में पढ़ाई करना चाहते हैं। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये की गिरती कीमत के चलते पिछले 2 सालों में रुपये में बात की जाए तो शिक्षा फीस करीब 40 तक महंगी हो चुकी है। जो लोग अपने मनपसंद शिक्षा संस्थान में दाखिला पा लेते हैं और फीस देने में असमर्थ होते हैं वो एजूकेशन लोन का सहारा लेते हैं।
 
देश में कई बैंक हैं जो एजूकेशन लोन दे रहे हैं लेकिन उनमें ज्यादा उत्पाद मौजूद नहीं हैं। एजूकेशन लोन में छात्र को उतने समय के लिए लोन मिलता है जितने समय वो पढ़ाई करता है। जब छात्र पढ़ाई पूरी कर लेता है तो उसके बाद उसे लोन चुकाना होता है। एजूकेशन लोन उन दोनों ही कोर्स के लिए, लिए जा सकते हैं जो भारतीय विश्वविद्यालय और विदेशी विश्वविद्यालय द्वारा कराए जाते हैं। कोई भी 30 लाख रुपये तक का एजूकेशन लोन ले सकता है और इस पर 11.5 फीसदी से लेकर 17 फीसदी तक की ब्याज दर लगती है। इसके अलावा इस पर आपको आयकर की धारा 80ई के तहत टैक्स छूट भी मिलती है। इसके तहत एजूकेशन लोन पर जो ब्याज दिया जाता है वो आपकी कर योग्य आय में से कट जाता है।   
 
अगर आप आईसीटीई, यूजीसी, आईएमसी जैसी नियामक संस्थाओं से सत्यापित कोर्स में दाखिला लेते हैं या किसी मान्यता प्राप्त विदेशी यूनिवर्सिटी के कोर्स में एडमिशन लेते हैं तो एजूकेशन लोन पाना शायद बहुत मुश्किल काम नहीं है। हालांकि असली मुश्किल लोन मिलने के बाद शुरु होती है।
 
भारत में बहुत से छात्र अपना एजूकेशन लोन नहीं चुकाते हैं। बैंकों के रिटेल एसेट पोर्टफोलियो में ये नॉन पर्फॉर्मिंग एसेट (एनपीए) का बड़ा हिस्सा रखते हैं। इंड्स्ट्री के अनुमान के मुताबिक जहां बैंको के सारे लोन पोर्टफोलियो का 2 फीसदी हिस्सा खराब लोन यानी बैड लोन में जाता है वहीं एजूकेशन लोन का 6 फीसदी हिस्सा बैड लोन में जाता है। कई बार ऐसे असली मामले आते हैं जब छात्र को कोर्स पूरा करने के बाद तुरंत नौकरी नहीं मिलती वहीं कई बार जानबूझकर डिफॉल्ट करने वाले छात्र भी आते हैं। लेकिन इन दोनों ही मामलों में बैंक लोन ना चुकाने वालों के आगे डिफॉल्टर लिख देते हैं। ये किसी भी छात्र का सिबिल रिपोर्ट बिगाड़ देती है जब वो अपना करियर शुरु करता है। ऐसे छात्रों को फिर किसी भी बैंक से लोन नहीं मिलता है। साथ ही जब वो होम लोन या बिजनेस लोन के लिए आवेदन करते हैं तो भी उन्हें कोई लोन नहीं मिलता और वो अपना पैसा लगाने के बावजूद मुश्किल में पड़ जाते हैं।


अगर आप जान लेते हैं कि आपको कोर्स खत्म करने के बाद तुरंत नौकरी नहीं मिल रही है तो आपके लिए बेहतर यही होगा कि आप बैंक के पास जाएं और उन्हें सच बता दें। ये बात बैंक समझ सकते हैं कि भारत की धीमी आर्थिक ग्रोथ के चलते इस तरह की स्थिति आ रही है। इसलिए किसी भी नौकरी से शुरुआत करें और बैंक का लोन चुकाने की स्थिति में आएं। लोन से पूरी तरह मुक्त हों और अपना सिबिल स्कोर सकारात्मक रखें। कई छात्र ऐसे होते हैं जो कोर्स पूरा करने के बाद विदेश चले जाते हैं और अच्छी नौकरी पाने के बाद बड़ी आसाना से उस लोन को भूल जाते हैं जो उन्होनें पढ़ाई के लिए लिया था। उनके लिए विदेश में नौकरी पाना और वहीं बस जाने की योजना को सफल बनाना लक्ष्य होता है लेकिन वो ये भूल जाते हैं कि भारत में छोड़े गए एजूकेशन लोन की छोटी राशि उन्हें भारी मुसीबत में डाल सकती है। इससे उनके लिए भारत के आर्थिक सहायता के दरवाजे हमेशा के लिए बंद हो सकते हैं। इसलिए अपने एजूकेशन लोन को समय पर चुकाएं और अपने अच्छे क्रेडिट स्कोर को बनाने की स्वस्थ शुरुआत करें।


ये लेख राजीव राज ने लिखा है जो क्रेडिट विद्या के को-फाउंडर और डायरेक्टर हैं।