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क्रेडिट कार्ड, इंश्योरेंस से जुड़ी जानकारियां

प्रकाशित Sat, 27, 2013 पर 12:41  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

मंदी के इस माहौल में आपका इन्वेस्टमेंट तो अच्छी कमाई नहीं कर रहा होगा लेकिन आप छोटी-छोटी सावधानियां बरतकर काफी पैसे बचा सकते हैं। इसलिए, योर मनी के खास सीरीज में बता रहे हैं कि कैसे इस स्लोडाउन में भी सही स्ट्रैटेजी अपनाकर आप बचा सकते हैं अपना पैसा।

इस कड़ी में बात करेंगे क्रेडिट कार्ड की। क्रेडिट कार्ड के इस्तेमाल में सावधानी बरत कर आप कैसे बच सकते हैं फिजूल के चार्जेस से आइए जानते हैं फाइनेंशियल प्लानर अर्णव पंड्या से। साथ ही इंश्योरेंस से जुडे सवालों के जवाब जानेंगे बजाज कैपिटल के मैनेजिंग डायरेक्टर संजीव बजाज से -


एटीएम पर क्रेडिट कार्ड के इस्तेमाल से बचना चाहिए। एटीएम पर क्रेडिट कार्ड से पैसे निकालने पर दो तरह के चार्ज लगते हैं। पहला निकाली गई रकम पर 2-2.5 फीसदी का फ्लैट चार्ज लगता है और दूसरा एटीएम से पैसे निकालते ही ब्याज जुड़ना शुरू हो जाता है।


क्रेडिट कार्ड का बकाया ऑनलाइन या चेक से भरना उचित होता है। क्योंकि कैश में क्रेडिट कार्ड बिल चुकाने पर अतिरिक्त चार्ज लगता है। हर कार्ड की एक क्रेडिट लिमिट होती है। अगर कोई बकाया नहीं हो तो क्रेडिट लिमिट से ज्यादा खर्च किया जा सकता है। लेकिन लिमिट से ज्यादा खर्च करने पर भी पेनाल्टी लगती है। इसलिए क्रेडिट लिमिट के अंदर रहें और पेनाल्टी से बचे रहें।


ज्यादा पेमेंट पर कार्ड में क्रेडिट बैलेंस रहता है। इसलिए क्रेडिट बैलेंस इस्तेमाल करने से पहले इसकी शर्तें जांच लेना जरूरी है। कार्ड कैंसिल कराने पर क्रेडिट बैलेंस तुरंत क्लेम करें। अगर तय अवधि में बैलेंस क्लेम नहीं किया तो पैसे डूबने की संभावना होती है।


आइए अब गौर करते हैं इंश्योरेंस से जुड़े सवालों पर -


सवाल : म्यूचुअल फंड और यूलिप में क्या अंतर है? मेरे पास एगॉन रेलिगेयर आईमैक्स यूलिप प्लान है जिसमें मैं सालाना 60,000 रुपये प्रीमियम भर रहा हूं। इतने ही पैसे और लगाना चाहता हूं। इसे कहां लगाऊं?


संजीव बजाज : यूलिप प्लान में 80सी के तहत टैक्स छूट मिलती है। साथ ही मैच्योरिटी पर मिलने वाली रकम सेक्शन 10 (डी) के तहत टैक्स फ्री होती है। इंश्योरेंस प्रोडक्ट में निवेश का फायदा भी मिलता है और इसमें आप ऑप्शनल राइडर जोड़कर कवर बढ़ा सकते हैं। लंबे वक्त तक लगातार प्रीमियम भरने पर लॉयल्टी एडिशन भी मिलता है। लॉयल्टी एडिशन में अतिरिक्त यूनिट मिलते हैं। पॉलिसीधारक को फंड एलोकेशन बदलने की सहूलियत मिलती है। आप भारती एक्सा फ्यूचर इन्वेस्ट में निवेश कर सकते हैं।


म्यूचुअल फंड की इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम (ईएलएसएस) में आपको 80सी के तहत टैक्स छूट मिलता है और इसमें आपको निवेश के ढेरों विकल्प मिलते हैं। साथ ही म्यूचुअल फंड में लक्ष्य की अवधि के मुताबिक फंड चुनने की सहूलियत मिलती है। आपको जरूरत के मुताबिक डेट, इक्विटी और बैलेंस फंड में निवेश करना चाहिए।


भारती एक्सा फ्यूचर इन्वेस्ट में 5 साल प्रीमियम भरना जरूरी होता है। इसमें आपको 10 साल तक बेनेफिट मिलते हैं। भारती एक्सा फ्यूचर में कोई एलोकेशन चार्ज नहीं हैं और इसमें इनबिल्ट एक्सिडेंटल डेथ बेनेफिट भी मिलता है। बीच में मौत होने पर नॉमिनी को एडिशनल सम अश्योर्ड मिलता है। इसके अलावा फंड चुनने के 6 विकल्प मिलते हैं। आप मैच्योरिटी के बाद 5 साल और बने रह सकते हैं। 5 साल पूरे होने के बाद कुछ पैसे निकालने की सुविधा मिलती है। दो तरह के लाइफ इंश्योरेंस बेनेफिट ऑप्शन मौजूद हैं।


सवाल : मैने एचडीएफसी क्लासिक अश्योर की 2 पॉलिसी में निवेश किया है। सालाना प्रीमियम 25,000 रुपये और 60,000 रुपये है। इस पॉलिसी के फायदे जानना चाहता हूं?


संजीव बजाज : एचडीएफसी क्लासिक अश्योर प्लान में आपका निवेश डेट में होता है। इस प्लान में मार्केट रिस्क नहीं होता लेकिन साथ ही ज्यादा रिटर्न भी नहीं होता। एचडीएफसी क्लासिक अश्योर प्लान में 7 साल तक प्रीमियम देना होता है। इसमें सम अश्योर्ड, रिवर्सनरी बोनस और टर्मिनल बोनस मिलाकर मैच्योरिटी बेनेफिट मिलता है। रिवर्सनरी बोनस सम अश्योर्ड पर तय होता है और हर साल जुड़ता है। बोनस एक बार जुड़ गया तो उसका मिलना तय है। सम अश्योर्ड और एक्योर्ड बोनस मिलाकर डेथ बेनेफिट मिलता है। 


सवाल : भारती एक्सा और एचडीएफसी लाइफ से 50-50 लाख रुपये का टर्म प्लान लेना चाहता हूं। क्या दो कंपनियों से टर्म प्लान लेने पर दोनों पॉलिसी से क्लेम किया जा सकता है?


संजीव बजाज : सही जानकारी देंगे तो क्लेम में कभी दिक्कत नहीं होगी। अलग-अलग कंपनियों से इंश्योरेंस लेने में कोई दिक्कत नहीं है। एक टर्म प्लान के बजाय आप अलग-अलग अवधि वाले प्लान ले सकते हैं।


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