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गिरते बाजार में कैसे बनाएं सुरक्षित पोर्टफोलियो

प्रकाशित Sat, 17, 2013 पर 13:55  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

आप बचत और निवेश करते हैं भविष्य के खतरों से निपटने के लिए। लेकिन अगर आपकी बचत और निवेश पर ही खतरा मंडराने लगे तो आप क्या करेंगे। शुक्रवार का दिन भी कुछ ऐसा ही था जब बाजार में इतनी बड़ी गिरावट आई कि एक झटके में निवेशकों का 1.5 लाख करोड़ रुपया स्वाहा हो गया। यहां इक्विटी में सीधे या म्युचुअल फंड के जरिए निवेश करने वालों और डेट मार्केट में पैसा लगाने वालों को बड़ा झटका लगा है।


अगर आपके पोर्टफोलियो में भी ये सब है तो अब आपको सोचना होगा कि क्या आपका पोर्टफोलियो सुरक्षित है। इसीलिए आज योर मनी में हम खास चर्चा करने जा रहे हैं आपके पोर्टफोलियो की सुरक्षा की ताकी बाजार के झटकों के बीच भी आपका निवेश सुरक्षित रहे।


आपके निवेश को शॉक प्रूफ बनाने के लिए ऑप्टिमा मनी मैनेजर्स के पंकज मठपाल और पर्सनल फाइनेंस के जानकार अर्णब पंड्या ने अपनी राय दी है।


पंकज मठपाल का कहना है कि इक्विटी में निवेश करते समय हमेशा ध्यान रखें कि अगर आपने लंबी अवधि के लिए निवेश किया हुआ है तो बाजार की गिरावट में घबराकर निवेश बाहर ना निकालें। अगर आप 1-2 साल के लिए निवेश कर रहे हैं तो फिक्स्ड डिपॉजिट अच्छा विकल्प है। आपके पोर्टफोलियो में इक्विटी, डेट गोल्ड, फिक्स्ड इकंम सभी तरह के ऐसेट क्लास होने चाहिए। इससे अगर एक ऐसेट में नुकसान होता है तो दूसरे ऐसेट में फायदा भी हो सकता है। अब देखा जाए तो शु्क्रवार को इक्विटी में नुकसान हुआ लेकिन सोने में जोरदार तेजी देखी गई।


इक्विटी में आपको हमेशा एक जैसा रिटर्न नहीं मिलता है लेकिन इसमें एक निश्चित अवधि तक निवेश करने पर औसत रिटर्न मिल जाते हैं। जब बाजार में गिरावट आए तो इससे घबराकर सारा पैसा ना निकाल लें और ना ही बाजार की गिरावट में ज्यादा एकमुश्त निवेश करें। मौजूदा स्थिति को देखते हुए म्यूचुअल फंड में निवेश ना करें लेकिन एसआईपी के जरिए कर रहे हैं तो निवेश जारी रखें।


म्यूचुअल फंड में हमेशा पिछले रिटर्न के आधार पर ही निवेश करने का फैसला ना करें। इसके बेंचमार्क के मुकाबले रिटर्न के आधार पर रिटर्न देखकर फैसला करें। इसमें कितना जोखिम उठाकर रिटर्न हासिल किया गया है इसे भी देखना जरूरी है। सबसे जरूरी है कि इक्विटी में रिटर्न छोटी अवधि के लिए ठीक नहीं हैं। जब तक आपको बाजार की अच्छी जानकारी नहीं है तब आप सेक्टोरियल फंड से दूर रहें। आप डाइवर्सिफाइड फंड के जरिए निवेश करेंगे तो आपको सेक्टोरियल फंड में थोड़ा बहुत एक्सपोजर मिल ही जाएगा।
 
अर्णब पंड्या का कहना है कि आपको पोर्टफोलियो के नुकसान से बचाने के लिए सबसे पहले अपने लक्ष्य को तय करना चाहिए। देखें कि आपको लगातार नियमित राशि चाहिए या आपको निवेश के जरिए मध्यम अवधि या लंबी अवधि का कोष बनाना है। इसका निर्धारण करने पर ही आप लगाने वाले पैसे को तय करें। इक्विटी में जोखिम तो है इसके चलते अगर सीधा निवेश कर रहे हैं तो छोटी-छोटी रकम लगाएं। कंपनी के फंडामेंटल पर जोर दें। लार्ज कैप इक्विटी फंड में निवेश कम जोखिम भरा है।


आप देखें कि आपकी जोखिम उठाने की क्षमता कितनी है। बाजार की गिरावट से अगर आपको फर्क नहीं पड़ता है तो आपकी जोखिम उठाने की क्षमता काफी अच्छी है। आपके लक्ष्य छोटी अवधि से लेकर मध्यम अवधि और लंबी अवधि तक के लिए पर्याप्त होने चाहिए। इसके अलावा आप देखें कि आपके पैसे बचाने और निवेश करने की क्षमता कितनी है। अगर आप इन तीन बातों का ख्याल रखकर निवेश करें तो आप एक संतुलित पोर्टफोलियो बना सकते हैं।


इक्विटी में निवेश कर रहे हैं तो 7 या 10 साल की अवधि लंबी अवधि कहलाएगी। अगर आपको इक्विटी बाजार की जानकारी है तो आप अपने आप निवेश कर सकते हैं। लेकिन अगर आप बाजार के जानकार नहीं हैं तो म्यूचुअल फंड के जरिए इक्विटी में निवेश करें जिससे जोखिम कम हो। शुरुआत में अच्छे फंडामेंटल वाली लार्जकैप कंपनियों में निवेश करें। बाद में जब जोखिम उठाने की क्षमता बढ़ जाए तो मिडकैप में भी निवेश कर सकते हैं।


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