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बाजार डांवाडोल, एफएमपी में पाएं टेंशन फ्री रिटर्न

प्रकाशित Tue, 20, 2013 पर 11:33  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

क्या अब वक्त आ गया है कि शेयर बेचकर पैसा डेट में लगा दिया जाए। क्योंकि शेयर बाजार में हाहाकार मचा हुआ है, किसी को पता नहीं है कि बाजार कितना गिरेगा और डॉलर किस स्तर पर सेटल होगा। ऐसे में एफएमपी सबसे सेफ इन्वेस्टमेंट बनकर उभरा है। क्योंकि ज्यादातर जानकारों में एक राय है कि इस समय किसी भी टाइम फ्रेम के लिहाज से शेयरों में निवेश नहीं करना चाहिए।


बैंक, इंफ्रास्ट्रक्चर, कैपिटल गुड्स सहित तमाम सेक्टर्स की हालत खस्ता है। एफएमसीजी, आईटी और फार्मा जो अब तक मजबूती से खड़े थे उनमें भी फिसलन शुरु हो गई है। मतलब ये हुआ कि इक्विटी में निवेश करना घाटे का सौदा होगा। सीएनबीसी आवाज की खास पेशकर सेफ इंवेस्टमेंट में आपको बताया जाएगा कि आप कहां पैसे लगाए जिससे न सिर्फ आपका मूलधन बचे बल्कि कमाई भी हो।


बाजार में 4 अहम एसेट क्लास हैं जिसमें शेयर, सोना-चांदी, डेट (फिक्स्ड डिपॉजिट और एफएमपी) और रियल एस्टेट शामिल हैं। डेट के तहत एफएमपी, फिक्स्ड डिपॉजिट और पीपीएफ में निवेश का मौका होता है।


यहां बताना चाहेंगे कि फिक्स्ड मैच्योरिटी प्लान (एफएमपी) के तहत डेट स्कीम, फिक्स्ड इनकम सिक्योरिटीज में निवेश किया जाता है। एफएमपी, बैंक के फिक्स्ड डिपॉजिट से थोड़ा सा अलग होता है। एफएमपी में फिक्स्ड डिपॉजिट की तरह रिटर्न गारंटीड नहीं होता है। एफएमपी के तहत फंड हाउस सिर्फ इंडिकेटिव रिटर्न ही बताते हैं।


एफएमपी का निवेश सर्टिफिकेट ऑफ डिपॉजिट, कमर्शियल पेपर, मनी मार्केट इंस्ट्र्यूमेंट, कॉरपोरेट बॉन्ड और बैंकों के फिक्स्ड डिपॉजिट में होता है। आमतौर पर एफएमपी 1 माह से 3 साल तक की अवधि का होता है। हालांकि एनएफओ बंद होने के बाद एफएमपी में निवेश नहीं किया जा सकता है। एफएमपी का एनएफओ 2-3 दिनों के लिए खुलता है। रिटेल निवेशक एफएमपी में 5,000 रुपये के साथ निवेश शुरू कर सकते हैं। एफएमपी में आमतौर पर बैंकों के फिक्स्ड डिपॉजिट से ज्यादा रिटर्न मिलता है।


एफएमसी के तहत मिलने वाले निवेशक के डिविडेंड पर कोई टैक्स नहीं लगता है। 1 साल से कम का रिटर्न आय में जुड़ता है फिर टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स कटता है। 1 साल से ज्यादा के एफएमपी में 10 फीसदी का कैपिटल गेन टैक्स (इंडेक्सेशन के साथ) जोड़ा जाता है।


वाइजइंवेस्ट एडवाइजर्स के हेमंत रुस्तगी का कहना है कि फिक्स्ड इनकम सेगमेंट हमेशा से निवेशकों के लिए अहम रहा है। वहीं बाजार की मौजूदा डांवाडोल वाली परिस्थिति में 2-3 साल की अवधि वाले निवेशकों के लिए डेट में निवेश करने का अच्छा मौका है।


मार्केट एक्सपर्ट निपुण मेहता का कहना है कि एफएमपी को बैंकों की फिक्स्ड डिपॉजिट स्कीमों की तरह मान सकते हैं। अमूमन एफएमपी में फिक्स्ड रिटर्न मिलता है। वहीं एफएमपी में मूलधन के नुकसान की आशंका बेहद कम होती है।


आनंद राठी फाइनेंशियल सर्विसेज के प्राइवेट वेल्थ मैनेजमेंट में डायरेक्टर और हेड ऑफ इंवेस्टेमेंट प्रोडक्ट्स फिरोज अजीज का कहना है कि एफएमपी में क्रेडिट रिस्क काफी कम होता है, लेकिन फिक्स्ड डिपॉजिट में क्रेडिट रिस्क थोड़ा ज्यादा होता है। दरअसल एफएमपी स्कीम ने जिस बैंक की एफडी में निवेश किया है और वो बैंक दिवालिया हो जाए तो दिक्कत आती है। वहीं एफएमपी में ब्याज दरों के उतार-चढ़ाव को लेकर भी ज्यादा जोखिम नहीं होता।


फाइनेंशियल एक्सपर्ट अर्णव पंड्या का कहना है कि फिक्स्ड इनकम इन्वेस्टमेंट रिस्क कम करने वालों के लिए सही है। एफएमपी तय अवधि वाले लक्ष्यों के लिए सही निवेश विकल्प है। 1 साल या ज्यादा का लक्ष्य हो तो पोर्टफोलियो में एफएमपी जरूर रखें। एफएमपी में एक बार निवेश करने से फंड मैनेजमेंट चार्ज काफी कम हो जाता है। मैच्योरिटी के वक्त एफएमपी में इंटरेस्ट रेट रिस्क लगभग न के बराबर होता है।


हालांकि अर्णव पंड्या के मुताबिक एफएमपी में निवेश के लिए काफी कम वक्त मिलता है इसलिए सचेत रहें। एफएमपी में निवेश के पहले से प्लानिंग जरूरी ताकि निवेश पर फैसले तुरंत ले सकें। दरअसल मौजूदा मौजूदा हालात में ज्यादा ब्याज बाले कॉरपोरेट फिक्स्ड डिपॉजिट में निवेश ठीक नहीं है।

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