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मौजूदा बाजार में कैसे होगी फाइनेंशियल सुरक्षा

प्रकाशित Sat, 31, 2013 पर 14:34  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

बाजार को बदलते दौर में निवेश की रणनीति फेल हो जाए या शायद अपने लक्ष्यों के लिए पर्याप्त पैसा ना बचे ऐसी चिंताएं सभी के मन में हैं। इस चिंता को कैसे दूर किया जा सकता है और आर्थिक डर को दूर करने के लिए कैसी फाइनेंशियल प्लानिंग होनी चाहिए इस पर योर मनी की खास पेशकश।


फ्रीडम फाइनेंशियल प्लानर के सीईओ सुमित वैद्य का कहना है कि जीवन के लक्ष्य स्थिर हैं। बाजार के उतार चढ़ाव से आपके लक्ष्यों में बदलाव नहीं होता केवल डर पैदा होता है। इस डर को दूर करने के लिए आप सबसे पहले एक इमरजेंसी फंड बनाएं। आप अपने सैलरी का हर महीने कुछ निश्चित हिस्सा इस इमरजेंसी फंड में रखें। ये राशि कुल मिलाकर आपकी 5-6 महीने की सैलरी या 1 साल तक की सैलरी के बराबर होनी चाहिए।


इसके बाद जोखिम की प्लानिंग होनी चाहिए। आय खोने का जोखिम, जीवन खोने का जोखिम, स्वास्थ्य खोने का जाखिम जैसे कई जोखिम हैं जिनके लिए समुचित प्लानिंग होनी चाहिए। जीवन की सुरक्षा के लिए टर्म कवर लेना चाहिए और स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए हेल्थ प्लान लेना चाहिए। हेल्थ प्लान में क्रिटिकल कवर जरूर लें।


ऐसेट की जोखिम भी फाइनेंशियल प्लानिंग का महत्वपूर्ण हिस्सा है। अपनी प्रॉपर्टी की सुरक्षा के लिए प्रॉपर्टी का इंश्योरेंस करना चाहिए। इस तरह के पॉलिसी का चलन काफी कम है लेकिन बदलते दौर की अनिश्चितता के चलते इस तरह के इंश्योरेंस कराना काफी जरूरी है।


फाइनेंशियल प्लानिंग के तहत कुछ पड़ाव आते हैं जैसे इमरजेंसी प्लानिंग, रिस्क प्लानिंग, लक्ष्यों के हिसाब से प्लानिंग, रिटायरमेंट और वसीयत जिन के आधार पर आपको अपने पैसे की सुरक्षा का ध्यान रखना चाहिए।


फाइनेंशियल प्लानिंग के तहत अपने सपनों को लक्ष्य का रुप दें और लक्ष्यों के लिए समय सीमा तय करें। एक परिवार के एक सम्मिलित लक्ष्य होने चाहिए। आप जो बचत कर रहे हैं उसके साथ सपनों को जोड़ना चाहिए। आपके लक्ष्य दो भागों में बांटा जा सकता है। एक वो लक्ष्य हैं जो टाले नहीं जा सकते हैं। दूसरे वो जो सपने के रुप में होते हैं। बच्चों की पढ़ाई, शादी, रिटायरमेंट, बीमारी पर खर्च आदि ऐसे खर्च हैं जो टाले नहीं जा सकते हैं। दूसरे वो सपने हैं जो लक्ष्य का भाग होते हैं जैसे महंगा घर, अच्छी गाड़ी, विदेश यात्रा आदि।


बच्चों की पढ़ाई के लक्ष्य को भी 2 भागों में बांटा जा सकता है। स्कूल की पढ़ाई और उच्च शिक्षा पर होने वाला खर्च। इसके लिए आप शुरुआत से ही खर्चों को सीमित करें और बच्चों की पढ़ाई के लिए पैसा बचाएं। इसके बाद बच्चों की शादी के लिए
प्लानिंग होनी चाहिए।


इसके बाद रिटायरमेंट की प्लानिंग करना बहुत जरूरी है। रिटायरमेंट के लिए प्लानिंग जल्दी शुरु करनी चाहिए। ईपीएफओ, पीपीएफ, इक्विटी, फिक्स्ड इंकम में निवेश करना चाहिए। 10 फीसदी कमोडिटी जैसे सोने में निवेश करना चाहिए।


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