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नए पेंशन बिल से सुरक्षित होगा बुढ़ापा

प्रकाशित Thu, 05, 2013 पर 12:50  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

लोकसभा में पेंशन बिल पास हो गया है। अब बिल को राज्यसभा में मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। नए बिल के तहत पेंशन रेगुलेटर पीएफआरडीए को वैधानिक अधिकार मिलेंगे। वहीं, न्यू पेंशन सिस्टम (एनपीएस) का नाम बदलकर नेशनल पेंशन सिस्टम हो जाएगा। इसके बाद बाजार में नए पेंशन प्रोडक्ट्स आएंगे। फिलहाल ज्यादातर पेंशन प्रोडक्ट्स बीमा कवरेज से लिंक्ड होते हैं। साथ ही, पेंशन फंड्स में 26 फीसदी एफडीआई का रास्ता खुलेगा।


नेशनल पेंशन सिस्टम- कंट्रीब्यूशन स्कीम है जो बुढ़ापे में नियमित आय के लिए बनाई गई है। 1 जनवरी 2004 के बाद भर्ती हुए सभी केंद्रीय कर्मचारियों (सैनिकों को छोड़कर) के लिए स्कीम लागू है। इसे रिटेलर्स, पेंशन फंड मैनेजर्स और रिकॉर्ड कीपर के जरिए लागू किया गया है। 2009 से एनपीएस सभी भारतीय नागरिकों के लिए खोला गया है।


नेशनल पेंशन सिस्टम के तहत हर सब्सक्राइबर का अलग पेंशन अकाउंट होगा। सब्सक्राइबर को फंड मैनेजर और स्कीम चुनने की छूट मिलेगी। सब्सक्राइबर को पेंशन स्कीम और फंड मैनेजर को बदलने की भी छूट दी जाएगी। असंगठित क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए एनपीएस वैकल्पिक है।


एर्नस्ट एंड यंग के पार्टनर, अश्विन पारेख का कहना है कि पेंशन बिल पास होने से पीएफआरडीए को ज्यादा अधिकार मिलेंगे। पीएफआरडीए पेंशन सेक्टर को रेगुलेट और डेवेलप कर पाएगा। पीएफआरडीए को पेंशन सिस्टम में बदलाव करने का अधिकार भी मिलेगा।


अश्विन पारेख के मुताबिक पीएफआरडीए अब नए और बेहतर प्रोडक्ट ला सकेगा। साथ ही, सरकार के साथ बातचीत करके जरूरी वित्तीय बदलाव भी लाए जा पाएंगे। आगे चल कर पेंशन प्रोडक्ट के रिटर्न बढ़ेंगे, जिससे पेंशन फंड में निवेश बढ़ेगा। पेंशन सेक्टर में 26 फीसदी एफडीआई को मंजूरी मिलने का फायदा अभी नहीं दिखेगा।


कोटक पेंशन फंड के सीईओ, संदीप श्रीखंडे का कहना है कि फिलहाल पेंशन फंड में ज्यादातर पैसा सरकारी कर्मचारियों का है। उम्मीद है कि अब बाकी लोग भी निवेश करेंगे। बाकी देशों के मुकाबले भारत में पेंशन फंड का एयूएम कम है। एनपीएस के जरिए बुढ़ापा सुरक्षित कर सकते हैं। पेंशन फंड सुरक्षित भी हैं और उनके रिटर्न भी अच्छे हैं।


पीएफआरडीए के चेयरमैन, योगेश अग्रवाल का कहना है कि पेंशन बिल पास होने से निवेशकों में भरोसा बढ़ेगा। विदेशी निवेशक पहले से ही पेंशन सेक्टर में दिलचस्पी दिखा रहे हैं। इंश्योरेंस सेक्टर में एफडीआई बड़ा मुद्दा है, क्योंकि इंश्योरेंस के लिए कैपिटल काफी चाहिए। एनपीएस आने के बाद निवेशकों सही विकल्प मिल गया है।


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