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एनपीएस में निवेश के क्या हैं फायदे

प्रकाशित Fri, 06, 2013 पर 18:35  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

पेंशन बिल कानून बनने से सिर्फ एक कदम पीछे है। लोकसभा और राज्यसभा से हरी झंडी मिल चुकी है, अब राष्ट्रपति की मंजूरी मिलते ही ये कानून बन जाएगा। इसी के साथ पेंशन सेक्टर के रेगुलेटर पीएफआरडीए के हाथ और मजबूत हो जाएंगे। पेंशन बिल की सबसे खास बात है एनपीएस नेशनल पेंशन सिस्टम (एनपीएस), जो आपके बुढ़ापे का साथी बन सकता है। लेकिन, एनपीएस के बारे में बहुत से लोग जानते ही नहीं। इसलिए सीएनबीसी आवाज़ लाया है ये खास पेशकश...


एनपीएस में करीब 53 लाख सब्सक्राइबर हैं, जिनमें ज्यादातर सरकारी कर्मचारी हैं। इसमें करीब 35000 करोड़ रुपये जमा हैं। अनुमान है कि 1 साल में एनपीएस की रकम 6000 करोड़ डॉलर हो सकती है। वहीं, 10 साल ये बढ़कर 30000 करोड़ रुपये होने का अनुमान है। पेंशन बिल पास होने से पेंशन फंड रेगुलेटर पीएफआरडीए को संवैधानिक दर्जा मिलेगा। साथ ही, पेंशन सेक्टर में 26 फीसदी एफडीआई की इजाजत मिलेगी। बाजार में प्योर पेंशन प्रोडक्ट आएंगे।


एनपीएस के तहत निवेशक गारंटीड मिनिमम रिटर्न का ऑप्शन चुन सकते हैं। एनपीएस सब्सक्राइबर को निवेश का 50 फीसदी तक शेयर बाजार में लगाने की छूट मिलेगी। सब्सक्राइबर अपनी मर्जी से फंड मैनेजर और स्कीम चुन सकता है। शर्तों के साथ 60 की उम्र के पहले भी पैसे निकालने का विकल्प है। केंद्रीय कर्मचारियों के लिए एनपीएस में पैसा डालना अनिवार्य है। अहम बात ये है कि निवेश का जोखिम सब्सक्राइबर को उठाना होगा। साथ ही, फंड से पैसा निकालने पर टैक्स देना होगा।


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