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मार्केट गाइड: इक्विटी की दूसरे निवेश विकल्प से तुलना

प्रकाशित Mon, 30, 2013 पर 14:05  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

लंबी अवधि में इक्विटी में निवेश के जरिए अन्य ऐसेट क्लास के मुकाबले जाहिर तौर पर अच्छे रिटर्न कमाए जा सकते हैं और इनमें लिक्विडिटी भी ज्यादा होती है। बीएसई मार्केट गाइड में आज हम इक्विटी और निवेश के दूसरे विकल्प की तुलना करेंगे। 


एक्यूएफ एडवाइजर्स के डायरेक्टर नितिन रहेजा का कहना है कि इक्विटी एक चुनौतीपूर्ण ऐसेट क्लास है। भारत जैसे देश में अभी कुल निवेश में से इक्विटी में निवेश का अनुपात काफी कम है। हालांकि इसमें जोखिम के चलते निवेशक इससे कुछ दूरी बनाकर रखना पसंद करते हैं। भारतीय निवेशकों का हमेशा सोने में निवेश करने का रुझान रहा है। सोने की तुलना में इक्विटी में निवेश करना थोड़ा नया विकल्प है।


इसके अलावा रियल एस्टेट में पैसा लगाना भी काफी अच्छी पसंद रहा है। हालांकि प्रॉपर्टी में निवेश करने से लिक्विडिटी की समस्या रहती है और इसे भी निवेशक लंबे समय तक रखने के बाद ही अच्छा रिटर्न हासिल कर सकते हैं। इतने ही समय अगर इक्विटी में भी निवेश रखा जाए तो ये भी अच्छा रिटर्न दे सकती है।


नितिन रहेजा के मुताबिक शेयर बाजार में निवेश शुरु करते समय सबसे पहले निवेशकों को अपने इक्विटी निवेश का समय लक्ष्य तय करना चाहिए। इक्विटी में निवेश के लिए आपके पास ब्रोकिंग अकाउंट होना चाहिए और इसके अलावा डीमैट अकाउंट होना चाहिए। इसके बाद आपको सेबी द्वारा रजिस्टर्ड स्टॉक ब्रोकर से ही ट्रेडिंग करनी चाहिए।


इक्विटी ट्रेडिंग एक संगठित क्षेत्र है जहां आप थोड़ी सी सावधानी के जरिए किसी भी तरह की धोखाधड़ी से बच सकते हैं। आप कुछ रिसर्च अपनी तरह से कर सकते हैं कि आपका स्टॉक ब्रोकर पूरी तरह सुरक्षित है या नहीं। आपको अपने जोखिम उठाने की क्षमता के आधार पर निवेश करने की शुरुआत करनी चाहिए। आप कितनी अस्थिरता को झेल सकते हैं और कितने रिटर्न की उम्मीद रखते हैं इसके आधार पर निवेश की रकम का निर्धारण करना चाहिए।


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