Facebook Pixel Code = /home/moneycontrol/commonstore/commonfiles/header_tag_manager.php
Moneycontrol » समाचार » टैक्स

डायरेक्ट टैक्स कोड: कितना होगा फायदा!

प्रकाशित Fri, 27, 2010 पर 08:29  |  स्रोत : Hindi.in.com

27 अगस्त 2010

सीएनबीसी आवाज़


 


 


जानकारों का मानना है कि अगर प्रस्तावित डायरेक्ट टैक्स कोड को संसद से मंजूरी मिलती है तो नौकरीपेशा लोगों को आयकर से कुछ राहत मिल सकती है। लेकिन, उद्योगों के लिए टैक्स रेट में बदलाव के प्रस्तावों से ज्यादा फायदा नहीं होगा।





डायरेक्ट टैक्स कोड के मुताबिक दो लाख रुपये तक की आमदनी पर आयकर नहीं चुकाना होगा। फिलहाल 4,000 रुपये का आयकर लगता है। पांच लाख रुपये की आमदनी पर प्रस्तावित डायरेक्ट टैक्स कोड के मुताबिक 30,000 रुपये का टैक्स लगेगा। मौजूदा पहले टैक्स स्लैब के हिसाब से 34,000 रुपये का आयकर चुकाना पड़ता है।


 


वैसे ही, 10 लाख रुपये से ज्यादा की आमदनी पर 1.54 लाख रुपये की जगह 1.3 लाख रुपये का आयकर चुकाना होगा।


 


 


टैक्स गुरू सुभाष लखोटिया का कहना है कि डायरेक्ट टैक्स कोड से ज्यादा फायदा नहीं होगा। अगर इंफ्रास्ट्रक्चर बांड पर छूट हटा दी जाती है, तो ये करदाताओं के लिए टैक्स बचत के लिए बहुत कम इंस्ट्रूमेंट रह जाएंगे।  


सुभाष लखोटिया का मानना है कि अगर शेयरों के 1 साल से ज्यादा अवधि के रिटर्न को टैक्स फ्री कर दिया जाए, तो निवेशकों के लिए अच्छा रहेगा।


 


मिनिमम ऑल्टर्नेटिव टैक (एमएटी) पर जानकार सरकार से खफा हैं। टैक्स एक्सपर्ट शैलेश हरिभक्ति का मानना है कि अगर बुक प्रॉफिट पर 20% टैक्स लगेगा, तो कंपनियां टैक्स डिडक्शन के मुताबिक बैलेंसशीट बनाने लगेंगी।


 



अर्न्स एंड यंग के पार्टनर, सुधीर कपाड़िया का कहना है कि सरकार ने डायरेक्ट टैक्स कोड में बैलेंस बनाने की कोशिश की है। डायरेक्ट टैक्स कोड के मसौदे से सुधीर कपाड़िया काफी हद तक सहमत हैं। लेकिन, उनके मुताबिक एमएटी पर सरकार ने ज्यादा बदलाव नहीं किए हैं।




वीडियो देखें