योर मनी: जल्द शुरू करें रिटायरमेंट की प्लानिंग -
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योर मनी: जल्द शुरू करें रिटायरमेंट की प्लानिंग

प्रकाशित Sat, 23, 2013 पर 11:15  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

रिटायरमेंट जीवन के वित्तीय लक्ष्यों में सबसे अहम लक्ष्य है। व्यक्ति के जीवन में एक वक्त ऐसा आता है जब उसे अपने काम को अलविदा कहना पड़ता है। रिटायरमेंट एक ऐसा शब्द है व्यक्ति के आनेवाले भविष्य की पूरी कहानी अपने-आप में बयां करता है। आज आपकी कमाई जैसी है, रिटायरमेंट के बाद ये पूरी तरह बंद हो जाएगी। ऐसे में भविष्य में अपने जीवन की गाड़ी खींचने के लिए आपको अभी से प्लानिंग करनी होती है। क्योंकि यदि आप रिटायरमेंट की प्लानिंग नहीं करते हैं, अपने बुढ़ापे के लिए कुछ राशि नहीं जोड़ते हैं तो ये रिटायरमेंट वाला जीवन आपको क्या दिन दिखलाए यह कह पाना मुश्किल है। लैडर-अप वेल्थ मैनेजमेंट के राघवेंद्र नाथ बता रहे हैं कैसे करें रिटायरमेंट की सही प्लानिंग।


रिटायर जिंदगी में सबसे बड़ी जिम्मेदारी खुद की होती है। यदि अपने भविष्य के लिए आज कुछ बचाते हैं तो यही आपके भविष्य में काम आएगा। ऐसे में जितना जल्दी हो सके रिटायरमेंट के लिए निवेश शुरू कर दें। हर व्यक्ति को इसके प्रति सजग होना चाहिए। क्योंकि 20-25 साल तो कमाने में निकल जाते हैं, इसी दौरान रिटायरमेंट का भी सोचना होना होता है। तभी अगले 20-25 साल शुकुन भरे बितते हैं। भविष्य की हर जरूरत के लिए अलग से प्लानिंग करना चाहिए। ताकि आगे चलकर किसी भी वित्तीय लक्ष्य से समझौता नहीं करना पड़े। अपनी प्लानिंग में निवेशक को महंगाई दर और उम्र बढ़ने के साथ खुद पर लगने वाले मेडिकल खर्च इत्यादि को ध्यान में रखकर रिटायरमेंट की प्लानिंग करना चाहिए।


40 साल में रिटायर होने की प्लानिंग-


हर व्यक्ति को अपनी मौजूदा आय का 10-15 फीसदी हिस्सा अपने रिटायरमेंट के लिए जमा करना चाहिए। मान लो यदि आप 40 साल की उम्र में रिटायरमेंट पर विचार कर रहे हैं तो आपको 18-20 साल की उम्र से ही कमाना और निवेश करना शुरू करना होगा। हालांकि केवल 40 साल की उम्र में रिटायरमेंट की सोचना थोड़ा कठिन है लेकिन यदि प्लानिंग सही है तो यह मुमकिन भी है। जल्द रिटायरमेंट की प्लानिंग करने वाले व्यक्ति को जल्द निवेश भी करना चाहिए। रिटायरमेंट जैसे लक्ष्यों को हासिल करने के लिए इक्विटी जैसे निवेश के विकल्पों को ज्यादा महत्व देना चाहिए। इसके अलावा निवेश का कुछ हिस्सा डाइवर्सिफाइड फंड के साथ भी रख सकते हैं। लेकिन ज्यादा फोकस इक्विटी पर होना जरूरी है।


व्यक्ति की आय और ओहदा बढ़ने के साथ-साथ उसके लाइफ स्टाइल में भी बदलाव आता है। ऐसे में आपकी रिटायरमेंट की प्लानिंग में लाइफ स्टाइल को मेनटेन करने के लिए लगने वाले खर्च का भी समावेश होना चाहिए। मान लीजिए यदि आज आपके के घर का खर्च करीब 30,000 रुपये प्रति महीने है। तो इतने ही पैसे आपको रिटायरमेंट के लिए भी जमा करने होंगे। पीएफ भविष्य के लिए निवेश का एक अच्छा माध्यम है, ऐसे में इस निवेश को हमेशा जारी रखना चाहिए। यदि आप नौकरी चेंज भी करते हैं तो अपने पीएफ के पैसों को निकालें नहीं। बल्कि नई नौकरी को इसी पीएफ के साथ शुरू कर सकते हैं।


रिवर्स मॉर्गेज-
यदि आप रिटायरमेंट की प्लानिंग नहीं करते हैं और आपके बुढ़ापे के समय आपके पास रोजमर्रा के खर्चों के लिए पैसे नहीं हैं और कोई मदद करने वाला भी नहीं है। ऐसे में आपके पास रिवर्स मॉर्गज एक विकल्प होता है। जिसके तहत आपके मकान को मॉर्गेज कर सकते हैं। इसके एवज में बैंक हर महीने आपको कुछ राशि मुहैया कराती है। वहीं आपके बाद जो इस घर का वारिस हो वह बैंक के कर्ज को चुकाकर घर छुड़ा सकता है।


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