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टैक्स प्लानिंगः ट्रस्ट का विकल्प और महत्व

प्रकाशित Sat, 30, 2013 पर 12:24  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

टैक्स बचत के साथ बेहतर और सही निवेश करना जरूरी है ताकि भविष्य में उसका अच्छा लाभ मिले। टैक्स प्लानिंग से लेकर बचत और निवेश से जुड़े हर मोड़ पर टैक्स गुरु सुभाष लखोटिया  करते हैं आपकी मदद और देते हैं आपको टैक्स के बेहतरीन टिप्स और फंडे ताकि आप रहे टैक्स टेंशन से फ्री।


सवाल : टैक्स प्लानिंग के लिए लिहाज से ट्रस्ट क्यों अच्छा विकल्प है और ट्रस्ट के महत्व क्या हैं?


सुभाष लखोटिया : टैक्स बचाने के लिए ट्रस्ट अच्छा विकल्प है। ये बच्चों के भविष्य और सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है। साथ ही उत्तराधिकार की योजना बनाने में भी फायदेमंद है। ट्रस्ट के करीब तीन प्रकार होते हैं - निजी या फैमिली ट्रस्ट, धार्मिक ट्रस्ट और चैरिटेबल ट्रस्ट।

ट्रस्ट बनाने से पहले करदाता को अपने लक्ष्य तय करना जरूरी है और फिर उसके बाद ट्रस्ट डीड बनाया जा सकता है। ट्रस्ट डीड बनाने के बाद नोटरी या सब-रजिस्ट्रार के यहां इसकी रजिस्ट्री भी करना जरूरी है। ट्रस्ट डीड में ट्रस्टीज का नाम, रजिस्टर्ड ऑफिस, ट्रस्ट के उद्देश्य जैसी सारी जानकारी जरूर दें। 
 
सवाल : निजी ट्रस्ट और धार्मिक ट्रस्ट के बारे में बताएं। क्या इस तरह के ट्रस्ट शुरू करने के लिए सरकार से मंजूरी लेनी पड़ती है?


सुभाष लखोटिया : ट्रस्ट शुरू करने के लिए सरकारी मंजूरी की जरूरत नहीं है। ट्रस्ट परिवार के सदस्यों के फायदे और उनकी जरूरत के हिसाब से बनाते हैं। बच्चों के लिए 100 फीसदी स्पेसिफिक बेनिफिशियरी ट्रस्ट बनाया जा सकता है। 


डिस्क्रिशनरी ट्रस्ट परिवार के सदस्यों के फायदे के लिए होते हैं। इसमें रकम बांटने का फैसला ट्रस्ट्रियों के पास होता है। डिस्क्रिशनरी ट्रस्ट में सदस्यों को अपनी इनकम पर 30 फीसदी टैक्स देना होता है। वसीयत के जरिए डिस्क्रिशनरी ट्रस्ट बना सकते हैं। इस तरह के ट्रस्ट व्यक्ति की मृत्यु के बाद प्रभावी होते हैं। इन डिस्क्रिशनरी ट्रस्ट पर स्लैब के हिसाब से टैक्स लगता है। एक वसीयत से सिर्फ एक डिस्क्रिशनरी ट्रस्ट बना सकते हैं।


निजी धार्मिक ट्रस्ट देवता की पूजा के लिए बनाए जाते हैं। आईटी कानून में निजी धार्मिक ट्रस्ट मान्य होते हैं। धार्मिक ट्रस्ट पर स्लैब के हिसाब से टैक्स लगता है।


सवाल : चैरिटेबल ट्रस्ट क्या हैं और इस तरह के ट्रस्ट के लिए क्या औपचारिकताएं पूरी करनी होती है। साथ ही इन ट्रस्टों की जरूरत क्या है?


सुभाष लखोटिया : चैरिटेबल ट्रस्ट चैरिटी/दान से जुड़ी गतिविधियों को लागू करने लिए बनाए जाते हैं। ट्रस्ट बनाने के लिए टैक्स अधिकारी से औपचारिक मंजूरी या नाम की जरूरत नहीं है। ट्रस्ट बनने के बाद सेक्शन 12ए के तहत रजिस्ट्रेशन करवाना जरूरी है। इसके बाद सेक्शन 80जी छूट सर्टिफिकेट के लिए आवेदन करना होता है। 80जी प्रमाणपत्र लेना भी बेहद जरूरी है। इससे ट्रस्ट को दान करनेवालों को टैक्स छूट का फायदा मिलेगा।


सवाल : रेसिडेंशियल प्लॉट का एक हिस्सा मां और भाई को गिफ्ट देना चाहता हूं, क्या नॉर्मल रजिस्ट्री और गिफ्ट देने से स्टैम्प ड्यूटी की बचत होगी? क्या मां और भाई जब चाहे गिफ्ट दिया प्लॉट का हिस्सा बेच सकते हैं?  


सुभाष लखोटिया : मां और भाई को प्लॉट का हिस्सा गिफ्ट कर सकते हैं। गिफ्ट लेने या देने पर कोई टैक्स नहीं लगेगा, परंतु स्टैम्प ड्यूटी देनी पड़ेगी। भविष्य में मां-भाई प्लॉट बेचेंगे तो कोई दिक्कत नहीं होगी। कैपिटल गेन्स टैक्स की भी कोई देनदारी नहीं होगी।


सवाल : अगर पत्नी गिफ्ट दी रकम बैंक में एफडी करती है, तो क्या बैंक एफडी पर मिलने वाले ब्याज पर टीडीएस लगेगा?  


सुभाष लखोटिया : एफडी से मिले ब्याज पति की इनकम से जोड़ा जाएगा और इस कारण टैक्स लगेगा। यहां सेक्शन 64 के तहत क्लबिंग प्रावधान लागू होगा। अगर म्यूचुअल फंड में रकम डाली जाएं तो उससे मिलने वाली इनकम पर टैक्स नहीं लगेगा। बैंक एफडी पर मिलने वाले ब्याज पर टीडीएस नहीं कटेगा क्योंकि आपके पत्नी की इनकम एक्सेप्शन लिमिट से कम होगी।    


सवाल : हर महीने पिता को घर खर्च के लिए 10,000 रुपये भेजते हैं। क्या इस रकम पर टैक्स छूट मिलेगी?


सुभाष लखोटिया : घर खर्च के लिए पिता को दिए पैसे पर छूट नहीं मिलेगी। पिता के अकाउंट में ट्रांसफर की गई रकम पर टैक्स छूट नहीं मिलती।


सवाल : पेंशन पर टैक्स की देनदारी कैसे बनेगी?


सुभाष लखोटिया : कुल पेंशन की रकम जोड़कर टैक्स की देनदारी निकाल जाती है। पेंशन पर टीडीएस ज्यादा कटा या नहीं ये वित्त वर्ष पूरा होने पर पता चल सकता है। यदि ज्यादा टैक्स कटा हो तो रिटर्न भरकर रिफंड लिया जा सकता है। पेंशनर बैंक को कुल सालाना पेंशन पर टीडीएस काटने के लिए कहें। सिर्फ पेंशन से इनकम है तो 64,000 रुपये सेक्शन 80C में निवेश करें, इससे टैक्स की देनदारी जीरो हो जाएगी।


सवाल : क्या बैंक डिपॉजिटी पर टीडीएस कटवाना जरूरी है या 15एच भरकर जुलाई में एकमुश्त टैक्स भर सकते है?  


सुभाष लखोटिया : कुल आय 7 लाख रुपये है और इसलिए बैंक में फॉर्म 15एच जमा नहीं कर सकते। अगर सालाना टैक्स जीरो हो तो ही फॉर्म आप 15एच भर सकते हैं। आईटी अधिकारी को पत्र लिखकर कम टीडीएस का सर्टिफिकेट ले लें और इस सर्टिफिकेट को बैंक में जमा कर दें।


सवाल : 6 महीने की एनआरई पोती को 1 लाख रुपये गिफ्ट करना चाहते हैं। क्या ऐसा कर सकते हैं?


सुभाष लखोटिया : आप अपनी पोती को 1 लाख रुपये गिफ्ट कर सकते हैं। पोती को ऑस्ट्रेलिया में गिफ्ट चेक भेज दें कोई परेशानी नहीं होगी। 

सवाल : हर साल पत्नी को कितना पैसा गिफ्ट कर सकते हैं। पत्नी पैसे का एफडी करेगी, तो क्या एफडी के ब्याज पर मुझे टैक्स नहीं लगेगा?


सुभाष लखोटिया : आप पत्नी को जितनी चाहे उतनी रकम गिफ्ट कर सकते हैं। गिफ्ट की रकम से हुई इनकम पति की इनकम में जुड़ेगी और सेक्शन 64 के तहत क्लबिंग प्रावधान लागू होगा। पत्नी टैक्स फ्री बॉन्ड में निवेश कर सकती है जिससे टैक्स नहीं लगेगा। 
 
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