14 साल बाद फिर खुला भोपाल गैस केस
31 अगस्त 2010
सीएनबीसी आवाज़
14 साल के बाद भोपाल गैस केस एक बार फिर खुल गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने भोपाल गैस कांड के दोषी 7 लोगों को नोटिस भेजा है। इन दोषियों में महिंद्रा एंड महिंद्रा के चेयरमैन केशव महिंद्रा भी शामिल हैं। सुप्रीम कोर्ट ने ये फैसला सीबीआई की अपील के बाद लिया है।
सीबीआई ने अपील की है कि भोपाल गैस कांड के दोषियों पर गैर इरादतन हत्या का केस दर्ज होना चाहिए। इस तरह के मामले में दस साल की सजा का प्रावधान है। इसके पहले सुप्रीम कोर्ट ने ही इनके खिलाफ लापरवाही का केस दर्ज करने को कहा था।
लापरवाही के मामले में केवल दो साल की सजा का प्रावधान है और भोपाल की निचली अदालत ने इस कांड के दोषियों को इस साल जून में दो साल की सजा सुनाई थी। सीबीआई की दलील है कि गैस लीक मामला बिल्कुल अलग है और इसके दोषियों को सख्त सजा मिलनी चाहिए। 1984 में भोपाल गैस हादसे में 15000 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी।
भोपाल गैस लीक मामले में सीबीआई ने 1996 में एपेक्स कोर्ट के उस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी जिसमें गैस लीक के लिए दोषियों के खिलाफ दुस्साहस और लापरवाही एक्ट के तहत केस चलाया गया था।
उस वक्त यूनियन कार्बाइड इंडिया के चेयरमैन केशव महिंद्रा समेत 6 लोगों को 304ए के तहत मामला दर्ज किया गया था जिसमें महज 2 साल सजा का प्रावधान है। भोपाल ट्रायल कोर्ट ने इसी साल जून में इन सातों को 2 साल की सजा सुनाई थी।
कोर्ट के फैसले की देश भर में काफी आलोचना हुई थी और इसके बाद सरकार ने फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील करने का फैसला लिया था। सीबीआई की दलील थी कि गैस लीक मामला रेयरेस्ट ऑफ रेयरेस्ट केस है इसलिए दोषियों के खिलाफ हत्या का केस दर्ज होना चाहिए। जिसके तहत 10 साल की सजा का प्रावधान है। भोपाल गैस हादसे में 15000 से ज्यादा लोगों की जान गई थी।
सुप्रीम कोर्ट के वकील प्रशांत भूषण का कहना है कि न्याय की प्रक्रिया में अगर गलती हुई तो सुधारने का मौका मिलता है। इसलिए भोपाल गैस के पीड़ितों को न्याय पाने का एक और मौका मिलेगा।
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