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यूलिप से जुड़े उलझनों के जवाब

प्रकाशित Sat, 04, 2010 पर 14:33  |  स्रोत : Hindi.in.com

4 सितंबर 2010



सीएनबीसी आवाज़


यूलिप को लेकर सेबी से झगड़े के बाद बीमा नियामक आईआरडीए ने कई सारे ऐसे बदलाव किए हैं जिससे यूलिप में पहले के मुकाबले लगने वाले चार्ज काफी कम हो जाएंगे और रिटर्न पहले के मुकाबले बेहतर होगा लेकिन डायरेक्ट टैक्स कोड में यूलिप पर मिलने वाले टैक्स फायदे खत्म करने के प्रस्ताव से यूलिप के भविष्य पर एक सवालिया निशान लग गया है कि क्या इसके बाद भी यूलिप ऐसा उत्पाद बना रहेगा जिसमें निवेश फायदेमंद हो।


नए नियमों के बाद यूलिप में निवेश फायदेमंद है या नहीं इस पर विनय अग्रवाल और हर्ष रूंगटा दोनों का मानना है कि अब इसमें निवेशकों को और अधिक फायदे मिलेंगे क्योंकि अब यूलिप उत्पादों की वैल्यू बढ़ गई है। यूलिप में निवेश करना पहले से बेहतर और सुरक्षित हो गया है।


नए नियमों के बाद यूलिप खरीदें या नहीं, इस सवाल पर दोनों ही जानकारों की राय है कि यूलिप पर रिटर्न थोड़ा बढ़ेगा लेकिन आप इसे निवेश के नहीं बल्कि जोखिम सुरक्षा के नजरिये से लें क्योंकि बीमा और निवेश दो अलग-अलग बातें हैं और आप इन्हें अलग-अलग ही रखें।



अब यूलिप में निवेश पर अब टैक्स छूट नहीं मिलेगी और मैच्युरिटी से पहले पैसे निकालने पर आपको टैक्स चुकाना होगा। यूलिप में 5 फीसदी का डिविडेंड डिस्ट्रिब्यून टैक्स देना होगा।


1 सितंबर से नए नियमों के आने के बाद लॉक-इन अवधि में बढ़ोतरी हो गई है। लॉक-इन पीरियड को 3 साल से बढ़ाकर 5 साल किया गया है और अब आप 5 साल से पहले पैसे नहीं निकाल सकेंगे। निवेशकों को यूलिप के लॉक-इन बढ़ने का ये लाभ होगा कि इनकी मिस-सेलिंग पर रोल लगेगी और अब लंबी अवधि का नजरिया रखने वाले ही इसमें पैसे लगाएंगे।


निवेशकों के हित में एक और खबर है कि अब यूलिप के पॉलिसी कवर में बढ़ोतरी कर दी गई है। अब 45 साल से कम उम्र के लोगों के लिए लाइफ कवर प्रीमियम का 10 गुना होगा और 45 साल से ज्यादा उम्र के लोगों के लिए लाइफ कवर प्रीमियम का 7 गुना कर दिया गया है। इंश्योरेंस कवर बढ़ने से लोगों का रुझान यूलिप की तरफ बढ़ेगा। इसके साथ ही टॉप-अप प्रीमियम को सिंगल प्रीमियम माना जाएगा। इससे निवेशक को अतिरिक्त इंश्योरेंस कवर मिलेगा।


इसके अलावा पहले जो लोग यूलिप पॉलिसी को पूरी अवधि तक नहीं चला पाते थे उन्हें इसका सरेंडर चार्ज ज्यादा लगने से नुक्सान होता था। नए नियमों के बाद 25 हजार से ज्यादा प्रीमियम वाली पॉलिसी पर सरेंडर चार्ज 3000 से ज्यादा नहीं होगा और 25 हजार से कम प्रीमियम की पॉलिसी पर सरेंडर चार्ज 6000 से ज्यादा नहीं लिया जाएगा।


अतः अगर किसी आर्थिक कारणवश कोई यूलिप से बाहर निकलना चाहता है तो भी पॉलिसी सरेंडर करने वाले को कम नुकसान होगा। अब सरेंडर चार्ज काटकर आपकी बाकी बची राशि 5 साल के बाद लौटा दी जाएगी। इसके अलावा एक और बदलाव भी तय किया गया है कि पहले 5 साल तक बीमा कंपनियां पॉलिसी के सालाना प्रीमियम का 4% से ज्यादा चार्ज नहीं ले सकतीं हैं और 10 साल तक की पॉलिसी पर सालाना प्रीमियम का 3% से ज्यादा चार्ज नहीं ले पाएंगी।


अगर आपने 10 साल से ज्यादा समय अवधि की पॉलिसी ले रखी है तो इसपर भी कंपनियां सालाना प्रीमियम का 2.25% से ज्यादा चार्ज नहीं वसूल पाएंगी। पेंशन यूलिप में भी कुछ बदलाव किए गए हैं जिसके बाद पॉलिसीधारक को कम से कम 4.5 फीसदी सालाना का गारंटीड रिटर्न मिलेगा। पेंशन यूलिप में भी अतिरिक्त सुविधाओं के रूप में एन्युटी, हेल्थ कवर की सुविधा देना आवश्यक कर दिया गया है।


पेंशन पॉलिसी सरेंडर करने पर कुल पॉलिसी वैल्यू का 1/3 ग्राहक को तुरंत मिलेगा और बाकी पैसे से एन्युटी उत्पाद खरीदा जाएगा। मौजूदा यूलिप धारकों के लिए विनय और हर्ष ने सुझाव दिए हैं कि वो पॉलिसी में बने रहें और प्रीमियम भरते रहें क्योंकि आप ज्यादातर शुरुआती चार्ज दे चुके हैं। अब अगर आप बीच में इसे रोकते हैं तो आपको कोई लाभ नहीं होगा।


पॉलिसी के मैच्युरिटी तक बने रहने से आपको अच्छे रिटर्न मिलने की उम्मीद है क्योंकि वर्तमान बाजार स्तर भी अच्छे हैं और जानकारों के मुताबिक भारतीय शेयर बाजार आगे भी बेहतर स्थिति में बना रहेगा। कवर के लिए टर्म प्लान लें और अगर आप निवेश के लिए विकल्प तलाश रहे हैं तो अलग से म्यूचुअल फंड में पैसे लगाएं।


पूरी जानकारी के लिये वीडियो जरूर देखें