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टैक्स गुरू: नए वित्त वर्ष में ये काम जरूर करें

प्रकाशित Thu, 03, 2014 पर 13:06  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

नए वित्त वर्ष की शुरुआत हो चुकी है, इस नए वित्त वर्ष की शुरुआत के साथ हमें कुछ नए संकल्प भी कर लेने चाहिए। ऐसे संकल्प जो हमें टैक्स भुगतान के सुकून और सम्मान के साथ-साथ कुछ टैक्स बचत के भी गुण सिखाए। यदि हमारा टैक्स लक्ष्य टैक्स बचाने का है को इसकी प्लानिंग अंतिम क्षणों नहीं, अपितु वित्त वर्ष की शुरुआत से ही करना चाहिए।


टैक्स गुरू सुभाष लखोटिया बता रहे हैं कि नए वित्त वर्ष की शुरुआत के साथ कैसे प्लानिंग करें की आगे टैक्स की बचत हो सके।


हर सदस्य के लिए अलग आईटी फाइल बनाएं-
टैक्स प्लानिंग की शुरुआत परिवार के हर सदस्य के लिए अलग-अलग इनकम टैक्स फाइल बनाकर करना चाहिए। इससे आपको टैक्स प्लानिंग और टैक्स का भुगतान करने में मदद मिलेगी। वहीं पत्नी की इनकम टैक्स फाइल जरूर बनाएं। पत्नी को गिफ्ट अथवा लोन इत्यादि की मदद से इनकम टैक्स की फाइल बना सकते हैं। बता दें कि पत्नी को पति, सास-ससुर को छोड़कर कोई भी गिफ्ट दे सकता है। वहीं पति, सास-ससुर द्वारा दिए गए गिफ्ट या फिर कर्ज पर टैक्स छूट नहीं मिलती है।


एचयूएफ जरूर बनाएं-
यदि आप वेतनभोगी हैं यानि नौकरीपेशा हैं तो आपको हिंदु अनडिवाइडेट फैमिली(एचयूएफ) बनाना चाहिए। यहां आपको बता दें कि एचयूएफ की अलग फाइल होती है। खास बात ये है कि एचयूएफ में 2 लाख रुपये तक की छूट के साथ सेक्शन 80सी के तहत छूट मिलती है। इसके अलावा एचयूएफ को होम लोन के ब्याज पर भी छूट प्राप्त होती है। वहीं एचयूएफ के लिए परिवार में बेटा, बेटी या बच्चे होना जरूरी नहीं है। केवल यदि पति-पत्नी ही हैं वह भी एचयूएफ बना सकते हैं।


बचत खाते में राशि रखें-
नए वित्त वर्ष की प्लानिंग करते समय बचत खाते में भी पैसे रखने की सोचें, क्योंकि आपकी टैक्स बचत का अब यह भी हिस्सा है। नए नियम के अनुसार वित्त वर्ष 2014-15 से बचत खाते में जमा राशि पर ज्यादा ब्याज मिलेगा। साथ डाकघर अथवा सहराकी संस्थाओं के खाते में भी जमा राशि पर अधिक ब्याज प्राप्त होगा। सबसे बात ये है कि इस बचत खाते से मिलने वाले ब्याज पर 10,000 रुपये तक की छूट मिल सकती है।


बच्चे के लिए एसबीटी बनाएं-
वित्त वर्ष की शुरुआत के साथ ही नाबालिग बच्चे के भविष्य के लिए सही प्लानिंग करें।  बच्चे के लिए पर्याप्त पैसे जमा करें और क्लबिंग के लिए स्पेसीफिक बेनेफिशरी ट्रस्ट(एसबीटी) बनाएं। ट्रस्ट डीड में ऐसी शर्तें डालें कि बच्चे की आय और माता-पिता की आय एक साथ नहीं जोड़ी जाए। इसके अलावा बच्चे के नाम पीपीएफ खाता भी खोल सकते हैं। साथ ही बच्चे के लिए इंश्योरेंस पॉलिसी लेकर भी टैक्स की बचत कर सकते हैं।


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