Moneycontrol » समाचार » बजट प्रतिक्रियाएं

आवाज़ अड्डाः बजट में मिडिल क्लास को निराशा, चुनाव में मिलेगा फायदा!

प्रकाशित Fri, 02, 2018 पर 20:31  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

बजट से मिडिल क्लास को निराशा हाथ लगी है। वो भी तब, जबकि आजकल मिडिल क्लास को मोटे तौर पर बीजेपी का वोटर माना जाता है। अब वित्त मंत्री कह रहे हैं देश तरक्की करेगा तो उसका फायदा तो सबको होगा। यही नहीं वो मोदी सरकार के पिछले तमाम बजट का हवाला देकर कह रहे हैं कि आम टैक्सपेयर को उनकी सरकार पहले ही काफी राहत दे चुकी है। तो क्या माना जाए तो मोदी जी मिडिल क्लास के वोट को लेकर निश्चिंत हैं और अब गरीबों, किसानों को रेवड़ियां बांटकर 2019 में अपनी जीत पक्की करना चाहते हैं।    


बजट भाषण का ये अंश मिडिल क्लास में निराशा जगाने के लिए काफी है। 40 हजार का स्टैंडर्ड डिडक्शन थोड़ा मरहम लगा सकता था, लेकिन 34200 रुपए का मेडिकल और ट्रांसपोर्ट अलाउंस खत्म करने, और हेल्थ एंड एजुकेशन सेस को 3 से बढ़ाकर 4 फीसदी करने से स्टैंडर्ड डिडक्शन का मजा भी किरकिसा हो गया। ऊपर से शेयर बाजार की कमाई पर भी टैक्स लग गया। पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम के हिसाब से सरकार स्टैंडर्ड डिडक्शन के रूप में जितना पैसा दे रही हैं, उससे ज्यादा लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स और इनकम टैक्स सेस के रूप में पब्लिक से वसूल रही है। इसलिए आम टैक्सपेयर को बजट ने कुल मिलाकर झटका दिया है।


इधर वित्त मंत्री कह रहे हैं कि सभी को स्टैंडर्ड डिडक्शन के अलावा जिन बुजुर्गों को छूटें दी हैं वो भी तो मिडिल क्लास में आते हैं। यही नहीं उन्हें लगता है कि छोटे, मझोले कारोबारियों को कॉरपोरेट टैक्स में जो छूट मिली है, उसे भी मिडिल क्लास को दी गई राहत मानना चाहिए।


सवाल उठता है कि चुनावी बजट में मिडिल क्लास को घुमा-फिराकर फायदा दिखाने का क्या अर्थ निकाला जाए? क्या इस उपेक्षा की वजह ये है कि किसानों या गरीबों की तरह मिडिल क्लास संगठित होकर आवाज नहीं उठाता?