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टेक्सटाइल एक्सपोर्टर्स बेहाल, बजट में मिलेगा सहारा!

प्रकाशित Thu, 11, 2018 पर 17:15  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

रोजगार देने के मामले में दूसरे नंबर पर रहने वाला एक्सपोर्ट सेक्टर खुद बेरोजगारी का शिकार है। एक्सपोर्ट संगठन के आंकड़ों के मुताबिक पिछले चार महीने में एक लाख लोग बेरोजगार हो चुके हैं।


पिछले पांच महीने से मोहम्मद सैफुला इसी तरह नौकरी की तलाश में फैक्ट्रियों के चक्कर काट रहे हैं। लेकिन 25 साल तक गारमेंट एक्सपोर्ट की फैक्ट्री में काम करने वाले सैफुला को आज कोई नौकरी देने को तैयार नहीं है। सिर्फ सैफुला ही नहीं बल्कि इनके कई साथी भी महीनों से नौकरी की तलाश में भटक रहे हैं। इसकी वजह है बंद पड़ी ये फैक्ट्रियां।


गुरुग्राम के सेक्टर-36 की इस फैक्ट्री में पांच महीने पहले 250 सिलाई मशीनों की आवाज़ गूंजती थी। जिसकी मदद से महीने में करीब तीन हजार कर्मचारी 2 लाख पीस तैयार करते थे। लेकिन आज ऑर्डर मिलने के पीक सीजन के बावजूद ये यूनिट ठप पड़ा है।


गुरुग्राम के उद्योग विहार में इस फैक्ट्री का भी कुछ यही हाल है। इस फैक्ट्री में काम करने वाले करीब 100 लोग रातों रात बेरोजगार हो गए क्योंकि ऑर्डर नहीं मिलने की वजह से फैक्ट्री बंद करनी पड़ी। जीएसटी से पहले इस फैक्ट्री के मालिक राहुल सालाना डेढ़ करोड़ का कारोबार करते थे जो अब अपनी मशीनें बेचने की सोच रहे हैं।


ये आलम सिर्फ गुरुग्राम का ही नहीं बल्कि देश के कई हिस्सों का है। नोएडा अपेरल एक्सपोर्ट क्लस्टर की मानें तो देश भर में एक्सपोर्ट यूनिट बंद होने से पिछले 6 महीने में एक लाख से ज्यादा कारीगर बेरोजगार हुए हैं। सरकारी आंकड़े भी इस बात के गवाह हैं। अक्टूबर 2017 में एक्सपोर्ट 2016 के मुकाबले 41 फीसदी गिर चुका है। हालांकि नवंबर में थोड़ी तेजी जरूर दिखी।