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बजट में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को चाहिए सहारा

प्रकाशित Wed, 10, 2018 पर 17:42  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

इस बार बजट के मूल्यांकन का एक अहम पैमाना होगा रोजगार। अहम आर्थिक सुधारों के बावजूद रोजगार के मोर्चे पर चौतरफा आलोचना का शिकार हो रही सरकार बजट में बड़े कदम उठा सकती है। बजट से पहले सीएनबीसी-आवाज भी एक खास मुहिम चला रहे हैं- हमें रोजगार दो। इस सीरीज में सीएनबीसी संवाददाता निकल चुके हैं बजट यात्रा पर। इस बजट यात्रा के दौरान हम बेरोजगारी की असली तस्वीर आप तक पहुंचाने की कोशिश करेंगे।
 
नोएडा की मोजर बेयर फैक्ट्री के बाहर नारेबाजी कर रहे ये लोग कभी इस फैक्ट्री में काम करते थे। सीडी, डीवीडी बनाने वाली फैक्ट्री की इसी नौकरी के सहारे ये लोग पूरे परिवार का भरण-पोषण करते थे। हर रोज की तरह 2 नवंबर को ये कर्मचारी अपनी नौकरी पर पहुंचे तो नजारा बदला हुआ था।


इसके साथ ही एक ही झटके में फैक्ट्री के करीब ढ़ाई हजार कर्मचारी नौकरी से हाथ धो बैठे।


यह समस्या सिर्फ मोजर बेयर की नहीं है। देश में करीब एक तिहाई रोजगार देने वाले मैन्यूफैक्चरिंग और कंस्ट्रक्शन सेक्टर गहरी समस्या से दो चार हो रहे हैं।


आरबीआई के मुताबिक मौजूदा वित्त वर्ष में अप्रैल से सितंबर के दौरान मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर में ग्रोथ पिछले साल के 6.1 फीसदी से घटकर 1.9 प्रतिशत हो गई। एफआईसीसीआई के ताजा सर्वें में सेक्टर से जुड़े 73 फीसदी कंपनियों के कहा कि वो अगले 6 महीने में अपने प्रोडक्शन में किसी तरह की क्षमता बढ़ाने की स्थिति में नहीं है और 85 फीसदी अगले तीन महीने में नई नौकरियां नहीं दे पाएंगे। प्रोजेक्ट ट्रैकिंग एजेसी सीएमआईई के मुताबिक नई परियोजनाओं की घोषणा दिसंबर में अपने 13 साल के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई। ऐसी हालत में अगर सरकार रोजगार बढ़ाने पर जोर देगी तो बजट में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को सहारा देना होगा।