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उत्तर भारत में 1 हफ्ते की बारिश से भारी नुकसान

प्रकाशित Thu, 12, 2018 पर 11:33  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

बेमौसम बारिश ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी है। उत्तर प्रदेश समेत पूरे उत्तर भारत में पिछले 1 हफ्ते से जारी बारिश ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। किसान परेशान हैं लेकिन सरकार की ओर से अभी तक किसी ने सांत्वना तक नहीं दी गई है।


ये अप्रैल की बारिश है, बिल्कुल अगस्त जैसी। ऐसी न कभी देखी होगी और न सुनी होगी। ऐसा लग रहा है कि अप्रैल में ही सावन के मेघ उमड़ आए हैं। कल यूपी के आगरा में इस कदर आंधी-पानी आया कि अप्रैल की गर्मी हो गई है। लेकिन इस बारिश ने किसानों की कमर तोड़ दी है। पिछले 1 हफ्ते से उत्तर भारत में जारी बारिश खास करके गेहूं के किसानों पर भारी पड़ रही है। खेतों में गेहूं की फसल तैयार थी। इस साल जोरदार फसल थी। किसान इसे काटने की तैयारी में थे लेकिन बारिश ने सब चौपट कर दिया।


कल शाम तेज आंधी और बारिश ने आगरा में भयंकर तबाही मचाई। आगरा, मथुरा के आसपास के इलाकों में 12 लोगों की मौत हो गई। और 24 से ज्यादा लोग घायल हो गए। आंधी-तूफान, औऱ ओला गिरने से किसानों की फसल को नुकसान भी पहुंचा है। सैकड़ों एकड़ फसल खराब हो गई। तूफान का कहर ताजमहल पर भी देखा गया। 130 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से चल रही हवाओं के चलते ताजमहल के एंट्री गेट पर बनी एक मीनार और दो छोटे सफेद गुंबद गिर गए।


गेहूं, सरसों और चने की ज्यादातर खेती उत्तर भारत में होती है। यूपी के अमरोहा में खेतों में पड़ी फसल पानी में डूब गई है। अब सूखने के बाद भी ये किस काम की। क्वालिटी का तो सत्यानाश हो जाएगा। ऐसे गेहूं को भला कौन खरीदेगा। पंजाब का हाल भी इससे अगल नहीं है, यहां भी तैयार फसल पानी में बिछ गई है।


जिन किसानों ने पहले ही फसल काट ली थी कुदरत ने उन्हें भी नहीं बख्शा। हरियाणा की गोहाना मंडी में बेचने को लाया गया गेहूं पानी में तैर रहा है। बात मंडियों में ऑनलाइन करने की हो रही है लेकिन यहां तो जरूरी सुविधाएं तक नहीं है। सरकार प्रशासन सब चुप जैसे सबकी जबान पर ताला लग गया है।


एक तो किसानों को भाव नहीं मिल पा रहा है और उपर से मौसम की मार। मौसम विभाग की दलील है कि इस हफ्ते तक बारिश जारी रह सकती है। यानि नुकसान का दायरा बढ़ना तय है।