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अजब मध्य प्रदेश में प्याज की गजब बर्बादी

प्रकाशित Mon, 10, 2017 पर 11:18  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

एक तरफ कल प्रधानमंत्री किसानों की सुध लेने जा रहे हैं तो दूसरी तरफ मध्यप्रदेश में करोड़ों का प्याज सड़ रहा है। ये उसी प्रदेश की कहानी है जहां किसान कर्ज के बोझ तले मर रहा है, जहां सही कीमत के लिए हाथों में हल की जगह मशाल लेने को मजबूर है। पढ़िए सड़ते प्याज की परतों में सरकारी लापरवाही और बदइंतजामी की रिपोर्ट।


मध्य प्रदेश के आगर जिले की सुसनेर मंडी, यहां सड़ते प्याज के कारण सांस लेना दूभर है। जिले में 25 करोड़ का प्याज खरीदा गया। उसमें से आधा मंडी में पड़ा बारिश से बेहाल है। छतरपुर जिले में 18,000 क्विंटल प्याज आया। लेकिन आधे से ज्यादा प्याज बारिश की भेंट चढ़ गया।


राज्य में आप जहां जाएंगे। प्याज का यही हाल देखेंगे। भोपाल मंडी में प्याज खुद आठ-आठ आंसू हो रहा है। धार जिले में प्रशासन ने राज्य सरकार से सड़े हुए प्याज को जमीन में गाड़ने की इजाजत मांगी है ताकि लोगों को बीमारी और बदबू से बचाया जा सके।


आम आदमी से मिले टैक्स की ऐसी बर्बादी के बचाव में सरकार किसान हित की दुहाई दे रही है। लेकिन सच ये है कि जब एमपी सरकार किसानों से 8 रुपये किलो प्याज खरीद रही थी तब भोपाल के खुले बाजार में प्याज 15 और दिल्ली में 20 रुपये किलो बिक रहा था। ये वही प्याज है जो जब-तब बड़े शहरों में 80 रुपये किलो का होकर ग्राहकों को रुलाता है।


किसान आंदोलन से घबराई एमपी सरकार ने आनन-फानन में 650 करोड़ रुपये का प्याज तो खरीद लिया लेकिन ये नहीं सोचा कि रखेंगे कहां। ये लापरवाही नहीं तो और क्या है कि आप न तो किसानों को सही कीमत दिला सकते हैं और न ही जनता तक सस्ता प्याज पहुंचा सकते हैं।


मध्य प्रदेश में प्याज अचानक आसमान से नहीं टपकी है। बीते कई सालों से सूबे में प्याज का बंपर उत्पादन हो रहा है। सरकार को मालूम होता है कि कितनी प्याज बोई गई है और लगभग कितनी पैदावार होगी। लेकिन फिर भी सरकार के पास कोई ऐसी नीति नहीं होती है जो प्याज की दुर्गति को रोक सके।