ड्रेजिंग कॉरपोरेशन को बेचने का प्रस्ताव! -
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ड्रेजिंग कॉरपोरेशन को बेचने का प्रस्ताव!

प्रकाशित Sat, 17, 2017 पर 14:32  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

सरकार ड्रेजिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया समेत 5 सरकारी कंपनियों को बेचने की तैयारी में है। सीएनबीसी-आवाज़ को मिली एक्सक्लूसिव जानकारी के मुताबिक विनिवेश विभाग ने इन पांचों कंपनियों में सरकारी हिस्सेदारी पूरी तरह बेचने के लिए कैबिनेट ड्राफ्ट नोट जारी कर दिया है।


सरकार की ड्रेजिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया में 73.46 फीसदी हिस्सेदारी है और पूरी सरकारी हिस्सेदारी एक साथ बेचने का प्रस्ताव है। दरअसल नीति आयोग ने ड्रेजिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया में दो किस्तों में हिस्सेदारी बेचने की सिफारिश की थी, लेकिन सचिवों के समूह ने दो किस्तों की बजाय एक साथ पूरी हिस्सेदारी बेचने की सिफारिश की है।


बताया जा रहा है कि ड्रेजिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया में दो चरणों में नीलामी के जरिए हिस्सेदारी बेचने पर विचार किया जा रहा है। साथ ही कंपनी के वैल्युएशन के 3 तरीके अपनाए जा सकते हैं। डिस्काउंटेड कैश फ्लो, एसेट वैल्यूएशन और रिलेटिव वैल्युएशन का तरीका अपनाया जा सकता है। इसके अलावा ड्रेजिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया में सरकार की हिस्सेदारी बेचने की प्रक्रिया के तहत कर्मचारियों को वीआरएस देने पर विचार किया जा रहा है।


बता दें कि नीति आयोग के मुताबिक ड्रेजिंग के काम में कई निजी कंपनियां मौजूद हैं, ऐसे में नीति आयोग का मानना है कि ड्रेजिंग स्ट्रैटेजिक सेक्टर नहीं है। वहीं कैबिनेट ड्राफ्ट में ड्रेजिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया के अलावा 4 और कंपनियां भी शामिल हैं। कामराजार पोर्ट में भी पूरी हिस्सेदारी बेचने का प्रस्ताव है। कामराजार पोर्ट में केंद्र सरकार की 66.7 फीसदी हिस्सेदारी है, जबकि बाकी की हिस्सेदारी चेन्नई पोर्ट ट्रस्ट के पास है।


वहीं एचएलएल लाइफ केयर लिमिटेड में सरकार की पूरी हिस्सेदारी बेचने की तैयारी है। एचएलएल लाइफ केयर लिमिटेड में हिस्सेदारी बेचने से पहले वैक्सिन वेंचर और मेडीपार्क का अलग वेंचर बनाया जा सकता है। साथ ही इंडियन मेडिसिन एंड फार्मास्यूटिकल कॉरपोरेशन लिमिटेड में सरकार की पूरी हिस्सेदारी बेचने का प्रस्ताव है। इंडियन मेडिसिन एंड फार्मास्यूटिकल कॉरपोरेशन लिमिटेड में केंद्र सकार की 97.61 फीसदी हिस्सेदारी है, जबकि बाकी हिस्सेदारी उत्तराखंड सरकार के पास है। कर्नाटक एंटीबायोटिक्स एंड फार्मास्यूटिकल्स लिमिटेड में भी पूरी सरकारी हिस्सेदारी बेचने का प्रस्ताव है।