नोटबंदी का ज्यादा असर नहीं: बिसलेरी -
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नोटबंदी का ज्यादा असर नहीं: बिसलेरी

प्रकाशित Wed, 11, 2017 पर 18:55  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

नोटबंदी के बाद कंपनियों को अपने ग्रोथ प्लान में कटौती करनी पड़ी है। साक्षात्कार में सीएनबीसी-आवाज़ के संपादक, आलोक जोशी से बिसलेरी इंटरनेशनल के चेयरमैन, रमेश चौहान ने कहा कि उन्होंने 2016 के लिए 20-25 फीसदी की ग्रोथ की उम्मीद की थी लेकिन ग्रोथ 15 फीसदी के आसपास रही है। नोटबंदी से कुछ खास बदला नहीं है और नोटबंदी खुद में गलत शब्द है। करेंसी की कमी से कुछ परेशानी रही और शुरुआत में बिजनेस पर कुछ असर पड़ा।


बातचीत को आगे बढ़ाते हुए रमेश चौहान ने बताया कि 1962 में अमेरिका से लौटने पर वो पार्ले से जुड़े और उन्होंने बेहतर प्रोडक्ट बनाने पर हमेशा ध्यान दिया। लेकिन प्रोडक्ट की बेहतरी का कोई सीक्रेट फॉर्मूला नहीं है। साथ ही उनका कहना है कि कामयाबी में कर्मचारियों की भूमिका अहम है और होनहार कर्मचारी हों तो कामयाबी तय है।


थम्स अप सबसे अलग कैसे है, इस सवाल का जवाब देते हुए रमेश चौहान ने कहा कि हर सॉफ्ट ड्रिंक का टेस्ट अलग-अलग है, लेकिन प्रोडक्ट की बेहतरी पर पूरा फोकस जरूरी है। प्रोडक्ट की खासियत उसका प्रमोशन है और थम्स अप का प्रमोशन बहुत खास था। थम्स अप ने खिलाड़ियों और अभिनेताओं को अपने साथ जोड़ा। सुनील गावस्कर और कपिल देव थम्स अप के प्रमोशन में आए। विज्ञापन से सॉफ्ट ड्रिंक की खास पहचान बनी। किसी भी प्रोडक्ट के लिए पब्लिक अपील जरूरी है और एड एजेंसी को आइडिया ज्यादा रहता है, ऐसे में प्रोडक्ट के लिए विज्ञापन एजेंसियों की भूमिका काफी अहम होती है।


रमेश चौहान ने बताया कि थम्स अप के लिए तूफानी ठंडा कैंपेन हिंदी और अंग्रेजी दोनों में एक साथ बना। टेस्ट द थंडर और तूफानी ठंडा में मास अपील है। विज्ञापन में बहुत कुछ सिर्फ अपील के लिए होता है और हर बात के पीछे तर्क खोजना गलत है। सॉफ्ट ड्रिंक कारोबार को क्यों बेचना पड़ा, इस सवाल पर रमेश चौहान ने कहा कि फ्रेंचाइजी सिस्टम की वजह से दिक्कत हो गई थी। कोका कोला के आने से फ्रेंचाइजी जाने लगे थे, ऐसे में सॉफ्ट ड्रिंक कारोबार बेचने के सिवा कोई विकल्प बचा नहीं था।


रमेश चौहान का कहना है कि बिसलेरी के ज्यादातर प्लांट कंपनी के पास हैं और इसके लिए हम फ्रेंचाइजी बिजनेस मॉडल से सावधान रहते हैं। दरअसल फ्रेंचाइजी कारोबार से काफी परेशानी झेल चुके हैं। साथ ही बिसलेरी इंटरनेशनल, बिसलेरी पॉप पर अभी काम कर रहा है और ड्रिस्ट्रिब्यूशन सिस्टम पर काम बाकी है। अभी बिसलेरी पॉप शुरुआती चरण में है। इसके अलावा फ्रूट ड्रिंक्स पर अभी फोकस बढ़ा रहे हैं। फ्रूट ड्रिंक्स को बिसलेरी की तरह वर्चस्व बनाने का लक्ष्य है। ब्रांड को स्थापित करना सबसे बड़ा टारगेट है और ब्रांड को लेकर कोई उलझन नहीं होनी चाहिए।


रमेश चौहान का मानना है कि बिसलेरी के लिए पानी के बिजनेस में कोई मुकाबला नहीं है। लेकिन, बिसलेरी के प्लांट बढ़ाने की जरूरत है और प्लांट लगाने को लेकर रणनीति तैयार है। रमेश चौहान का कहना है कि प्लास्टिक बोतल में पानी काफी सुरक्षित है और प्लास्टिक बोतल में पानी खराब नहीं होता है। पानी खराब होना बेकार की बात है। बिसलेरी की ओर से पर्यावरण के लिए प्लास्टिक की रिसाइकलिंग पर फोकस किया जा रहा है।


बिसलेरी का आईपीओ कब तक आएगा, इस सवाल के जवाब में रमेश चौहान का कहना है कि कंपनी को पैसे की दिक्कत नहीं है और आईपीओ से पैसे जुटाने में आसानी होती है। साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि इंडस्ट्री में बेहतर काम करने वालों की कमी है और टैलेंट की कमी में बिजनेस बढ़ाना मुश्किल है। इंडस्ट्री में लेबर की काफी कमी है और मैनपावर की परेशानी से दिक्कत होती है। रमेश चौहान के मुताबिक काम में गलतियां कम करने वाला लेबर होना चाहिए और काम करने वाले को काफी सतर्क होना चाहिए। दरअसल लापरवाही करने वाले से काफी दिक्कत का सामना करना पड़ता है।


रमेश चौहान का कहना है कि जीएसटी से इंडस्ट्री को काफी फायदा होगा। सरकार को कारोबार में पेपर वर्क कम करना चाहिए और आइडिया को पेपर वर्क में फंसाना नहीं चाहिए। जीएसटी इंडस्ट्री के लिए काफी मददगार होगा। राजनीति की वजह से जीएसटी में देरी हुई है और सियासत की वजह से बिजनेस में रुकावट आई है। जीएसटी से कारोबार करना आसान हो जाएगा।


बिसलेरी का इंटरनेशनल प्लान क्या है, इस पर रमेश चौहान का कहना है कि यूएई में कारोबार बढ़ाने पर काम चल रहा है। शुरुआत में कारोबार जमाना प्राथमिकता है क्योंकि अभी स्टाफ की नियुक्ति ही बड़ी दिक्कत है। वहीं रमेश चौहान ने ये भी कहा कि उनका संगठन को मजबूत करना बड़ा फोकस है और संगठन बन जाए तो वो रिटायर होने का फैसला ले सकते हैं। नए आंत्रप्रेन्योर को सलाह देते हुए रमेश चौहान ने कहा कि रातों-रात फायदा हासिल नहीं होता और नफे के लिए लंबा इंतजार करना पड़ेगा। शुरुआती झटके से दिल छोटा ना करें और हर गलती से सीखें और आगे बढ़ें। कर्मचारियों की लगन बढ़ाने पर फोकस रखें।