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कैसे सिखाएं बच्चों को बचत और खर्च के बीच का बैलेंस

प्रकाशित Fri, 18, 2017 पर 18:58  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

हर मां-बाप की ख्वाहिश होती है कि वो अपने बच्चों को दुनिया की हर खुशी दें। उन्हें अच्छी से अच्छी शिक्षा दिलाना चाहते हैं। लेकिन इसके लिए बड़ी रकम की जरूरत होती है और बड़ी रकम के लिए फाइनेंशियल प्लानिंग की जरूरत भी होती है। तो बच्चों के लिए कैसे करें फाइनेंशियल प्लानिंग। साथ ही बच्चों में बचपन से ही बचत की आदत कैसे डाले ताकि वे पैसे की कीमत समझ सकें। इस पर चर्चा करने के लिए हमारे साथ हैं ऑप्टिमा मनी मैनेजर्स के एमडी पंकज मठपाल।


पंकज मठपाल का कहना है कि 3 से 6 साल के बच्चों गुल्लक या ग्लास जार देना जरुरी है। इससे बच्चों में पैसे की अहमियत बनी रहेगी और माता- पिता पैसे की अहमियत समझा सकते है। ताकि बच्चे में पैसे को बढ़ते देखने का उत्साह रहेगा। जरूरत की चीजों को कीमतों से जोड़कर अहमियत सिखाएं।


7 से 12 साल के बच्चों के लिए माता-पिता उनका एटीएम न बनें। पैसे कमाने में लगने वाले मेहनत की अहमियत समझाएं। उन्हें पैसे तुरंत मिलते ही खर्च करने से रोकें। पैसे की बचत करना सिखाएं।  उन्हें अपने हिसाब से छोटे-छोटे लक्ष्य रखने की सीख दें। बचत के पैसे से इन लक्ष्यों को पूरा करने पर जोर दें। बच्चों के फिजूल खर्ची पर नियंत्रण रखें। बच्चों की जिद के दबाव में न आएं बल्कि उन्हें भी पैसे की अहमियत समझाएं। बचत और खर्च के बीच का बैलेंस समझाएं। बच्चों के साथ मोनोपली, गेम ऑफ लाइफ जैसे गेम्स खेलें। आरबीआई की वेबसाइट पर बच्चों के लिए ई-बुक्स हैं। इनमें मनी कुमार के कॉमिक्स के जरिए दी गई है मनी प्लानिंग की सीख दे सकते है। आरबीआई की     www.rbi.org.in/financialeducation/basic.aspx वेबसाइट पर कॉमिक्स मौजूद है।


किशोरावस्था में बच्चों को विश लिस्ट बनाने को कहें। मनपसंद चीजों को खरीदने के लिए इंतजार करना सिखाएं। खुद के जोड़े हुए पैसों से मनपसंद चीजें लेने पर भी जोर दें।बैंक खाते, क्रेडिट कार्ड और लोन के बारे में समझाएं। उन्हें अच्छे और बुरे लोन के बीच का फर्क समझाएं। क्रेडिट कार्ड के ज्यादा इस्तेमाल की दिक्कतों के बारे में बताएं। पैसे से जुड़े फ्रॉड के बारे में जानकारी दें। फाइनेंशियल फ्रॉड के खतरे समझाएं। लंबे समय की बचत पर होने वाले फायदों के बारे में बताएं। साथ ही खुद भी फिजूल खर्ची न कर पैसे बचाने का उदाहरण दें। पॉकेट मनी से पैसे बचाने पर जोर दें।


माता- पिता ध्यान दे कि बच्चों के नाम पर बिकने वाले प्लान से बचें। बच्चों के नाम पर ज्यादातर यूलिप प्लान हैं। बच्चों के लिए बीमा खरीदने की जरूरत नहीं है। बच्चों के लिए पैसों की जरूरत का आकलन करें। म्युचुअल फंड में एसआईपी के जरिए निवेश बेहतर है। बच्चों के नाम पर पीएफ खाता भी खुलवा सकते हैं। बच्ची के लिए सुकन्या समृद्धि योजना भी बेहतर है।