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बप्पा के अंगों में समृद्धि का संदेश, जानें खुशहाल निवेश के मंत्र

प्रकाशित Thu, 24, 2017 पर 18:58  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

लंबोदर, पीताम्बर, विघ्नहर्ता श्री गणेश के आगमन का समय हो चुका है। देवों में सबसे प्रथम देव, गणपति का स्वरूप मनोहर एवं मंगलदायक है। वे अपने उपासकों पर जल्दी ही प्रसन्न होकर उनकी समस्त मनोकामनाएं पूरी करते हैं। गजान्न की पूजा अर्चना के साथ हमें उनसे काफी कुछ सीखने को भी मिलता है। बुद्धि के देवता महागणेश मंगलमूर्ति कहे जाते हैं क्योंकि इनके सभी अंग जीवन को सही दिशा देने की सिख देते हैं। तो कैसे गणपति एक समृद्ध, सुखी, संपन्न जीवन का प्रतीक हैं, आज योर मनी की खास पेशकश इसी पर है। हम आपको बताएंगें, कैसे बप्पा से सीखें निवेश के महामंत्र और इसमें हमारा साथ देने के लिए मौजूद हैं वाइस इनवेस्ट एडवाइजर के हेमंत रूस्तगी।


गणेश जी की सबसे पहले पूजा करने की कथा शिवपुराण में बताई गई है। एक बार सभी देवता में कौन सर्वश्रेष्ठ है इस बात को लेकर बहस हो गई। तब इस समस्या को लेकर सभी देवता भगवान शिव के पास पहुंच गए। तब भगवान शिव ने सभी देवताओं के सामने एक प्रस्ताव रखा कि जो भी पहले पृथ्वी की तीन बार परिक्रमा लगाकर कैलाश लौटेगा वह ही सभी देवताओं में सबसे पहले पूजा जाएगा। भगवान शिव का आदेश मिलते ही सभी देवता पृथ्वी के चक्कर लगाने के लिए निकल पड़े। भगवान गणेश अपने पिता शिव और माता पार्वती के ही तीन बार परिक्रमा करके उनके सामने खड़े हो गए। तब भगवान शिव ने प्रसन्न होकर कहा कि जो भी मनुष्य किसी कार्य को करने से पहले भगवान गणेश की पूजा करेगा उसमें कभी भी किसी प्रकार की बाधा नहीं आएगी।


हेमंत रूस्तगी का कहना है कि समृद्धि के देवता विघ्नहर्ता के रूप में पूजे जाते है। शुभ काम की शुरूआत करने से पहले गणेश पूजा का रिवाज है। ठीक उसी तरह बप्पा के हर अंग में समृद्धि का संदेश देता है जिसके कारण निवेशकों को भी निवेशक करते समय इन गुणों से प्रेरणा लेनी चाहिए।


बड़ा मुख बड़ी सोच का प्रतीक होता है। ठीक उसी तरह फाइनेंशियल प्लानिंग में दूर की सोच रखना जरूरी होता है। छोटी, मध्यम और लंबी अवधि के लक्ष्य तय करें ताकि लक्ष्य तय करने से निवेशको में रिस्क और रिटर्न की समझ बढ़ेगी।


गणेश जी का मस्तक काफी बड़ा है। अंग विज्ञान के अनुसार बड़े सिर वाले व्यक्ति नेतृत्व करने में योग्य होते हैं। इनकी बुद्घि कुशाग्र होती है। गणेश जी का बड़ा सिर यह भी ज्ञान देता है कि अपनी सोच को बड़ा बनाए रखना चाहिए। बड़ा माथा समय के सही इस्तेमाल का सूचक होता है। पिछले बुरे अनुभवों को भूलकर नई शुरूआत करें। भविष्य की प्लानिंग के लिए अभी से निवेश करें।


गणपति की आंखें छोटी हैं। अंग विज्ञान के अनुसार छोटी आंखों वाले व्यक्ति चिंतनशील और गंभीर प्रकृति के होते हैं। गणेश जी की छोटी आंखें यह ज्ञान देती है कि हर चीज को सूक्ष्मता से देख-परख कर ही कोई निर्णय लेना चाहिए। ऐसा करने वाला व्यक्ति कभी धोखा नहीं खाता। निवेशक अपने निवेश पर पैनी नजर रखें। निवेश में एकाग्रता जरूरी है। लंबे समय तक निवेश जारी रखना जरूरी होता है। बार-बार अपना एसेट एलोकेशन ना बदलें।


गणेश जी के कान सूप जैसे बड़े हैं इसलिए इन्हें गजकर्ण एवं सूपकर्ण भी कहा जाता है। अंग विज्ञान के अनुसार लंबे कान वाले व्यक्ति भाग्यशाली और दीर्घायु होते हैं। गणेश जी के लंबे कानों का एक रहस्य यह भी है कि वह सबकी सुनते हैं फिर अपनी बुद्धि और विवेक से निर्णय लेते हैं। बड़े कान हमेशा चौकन्ना रहने के भी संकेत देते हैं। गणेश जी के सूप जैसे कान से यह शिक्षा मिलती है कि जैसे सूप बुरी चीजों को छांटकर अलग कर देता है उसी तरह जो भी बुरी बातें आपके कान तक पहुंचती हैं उसे बाहर ही छोड़ दें। बुरी बातों को अपने अंदर न आने दें। बड़े कान ज्ञान का प्रतीक हैं। अपने निवेश के बारें में सतर्क रहें। निवेश से जुड़ी हर जानकारी पर ध्यान दें। एक्सपर्ट की बातों और सलाह पर ध्यान दें।


गणेश जी की सूंड हमेशा हिलती डुलती रहती है जो उनके हर पल सक्रिय रहने का संकेत है। यह हमें ज्ञान देती है कि जीवन में सदैव सक्रिय रहना चाहिए। जो व्यक्ति ऐसा करता है उसे कभी दुखः और गरीबी का सामना नहीं करना पड़ता है। श्री गणेश की वक्र सूंड, सफलता का सीधा रास्ता नहीं। सफल निवेश के लिए लचीलापन चाहिए। निवेश के परफॉरमेंस के हिसाब से अपने पोर्टफोलियो कर सकें। छोटी अवधि का परफॉर्मेंस देखकर बड़े फैसले ना लें। 


गणेश जी के छोटे से मुंह यानि कम बोलने का सूचक होता है। निवेश को लेकर सबसे चर्चा ना करें। निवेश से पहले चिंतन करें। हर किसी की सलाह पर यकीन ना करें। 


बचपन में भगवान गणेश का परशुराम जी से युद्घ हुआ था। इस युद्घ में परशुराम ने अपने फरसे से भगवान गणेश का एक दांत काट दिया। इस समय से ही गणेश जी एकदंत कहलाने लगे। गणेश जी ने अपने टूटे हुए दांत को लेखनी बना लिया और इससे पूरा महाभारत ग्रंथ लिख डाला। यह गणेश जी की बुद्धिमत्ता का परिचय है। गणेश जी अपने टूटे हुए दांत से यह सीख देते हैं कि चीजों का सदुपयोग किस प्रकार से किया जाना चाहिए। अच्छे पर ध्यान और बुरा छोड़ देने की सीख मिलती है। पोर्टफोलियो में बदलाव के लिए तैयार रहें। फंड को परफॉर्म करने का मौका दें और कोई भी फैसला जल्दबाजी में ना लें।


गणेश जी का पेट बहुत बड़ा है। इसी कारण इन्हें लंबोदर भी कहा जाता है। लंबोदर होने का कारण यह है कि वे हर अच्छी और बुरी बात को पचा जाते हैं और किसी भी बात का निर्णय सूझबूझ के साथ लेते हैं।
अंग विज्ञान के अनुसार बड़ा उदर खुशहाली का प्रतीक होता है। गणेश जी का बड़ा पेट हमें यह ज्ञान देता है कि भोजन के साथ ही साथ बातों को भी पचना सीखें। जो व्यक्ति ऐसा कर लेता है वह हमेशा ही खुशहाल रहता है।


विशाल उदर में है निवेश की सीख के लिए निवेशक हर परिस्थिति से निपटने को तैयार रहें। निवेश में अड़चनों से उबरने की सीख मिलती है। निवेश में टिके रहें, धैर्य खोएं नहीं। साथ ही निवेशक बाजार की गिरावट से ना घबराएं।


हेमंत रूस्तगी का कहना है कि निवेश से जुड़ी जानकारियां इकट्ठी करनी चाहिए। एक जागरूक निवेशक अपने लक्ष्य से भटकता नहीं है। संयम और धीरज से निवेश में हमेशा अच्छा मुनाफा मिलेगा। अनुशासित निवेशक सभी आर्थिक जिम्मेदारियां निभाता है।


गणेश के चरण निवेश में एक पैर जमीन और एक घुटने पर जो कि संतुलन का प्रतीक है। लालच और भय से दूर रहने का संदेश मिलता है। ठीक उसी तरह निवेश में संतुलित पोर्टफोलियो बनाने की जरूरत है।  लालच में आकर जोखिम लेने से बचना चाहिए।