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फाइनेशिंयल प्लानिंग के लिए क्यों जरुरी योग!

प्रकाशित Wed, 21, 2017 पर 19:07  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

पैसे कमाने और बेहतर जीवन जीने की लालसा हमें कई बार जिंदगी के असली मकसद जो कि जीवन को सुकून से जीना है उससे दूर ले जाती है। यहीं पर काम आता है योग, जिसके जरिए आपको ना सिर्फ मन की शांति मिलती है बल्कि जीवन जीने का एक नया नजरिया मिलता है। योग, पैसों के लिए आपकी तमाम भानवनाओं को भी नियंत्रण में रखता है। योर मनी पर अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के मौके पर सीएनबीसी-आवाज़ आपको आपके मेहनत की कमाई के प्रति साफ भावनाओं के रूबरू कराएगा और हम आपको समझाएंगे वो सारी भावनाएं जो पैसों को लेकर जो नुकसानदेह हो सकती हैं। आपको ये सब समझाने के लिए हमारे साथ हैं फाइनेंशियल प्लानर गौरव मशरूवाला।


गौरव मशरूवाला ने बताया कि पैसों से जुड़ी भावनाएं हैं भय, असुरक्षा, चिंता, लालच, हीन भावना, जलन, निराशा और गुस्सा। उन्होने आगे कहा कि ध्यान रखिए कि केवल पैसों से आर्थिक आजादी नहीं मिलती बल्कि आर्थिक आजादी के लिए पैसों के प्रति अपनी भावनाओं को बदलने में ही समझदारी है।


आर्थिक आजादी के लिए पैसों से जुड़ी भावनाओं पर नियंत्रण रखें और इन भावनाओं को नियंत्रित करने के लिए प्राणायाम करें, अनुलोम-विलोम, भ्रामरी, उज्जयी, ध्यान लगाएं। साथ ही प्रकृति की ओर लौटें और खुली हवा के साथ ज्यादा रोशनी में रहें। हालांकि आप अपने शौक पूरा जरुर करें लेकिन केवल पैसे के लिए नहीं बल्कि खुशियों के लिए। साथ ही अपने दोस्तों और रिश्तेदारों से मिलें।


गौरव मशरूवाला ने आगे कहा कि गीता में योग और धन की व्याख्या की गई है कि कैसे भगवान कृष्ण को योगेश्वर कहा जाता है।  गीता में कृष्ण ने उन भावनाओं का वर्णन किया जो व्यक्ति को असुर बना देता है। असुर वह है जो सैकड़ों इच्छाओं का दास है और  अनुचित तरीकों से धन जमा करता है। लेकिन धन का इस्तेमाल सिर्फ अपनी इच्छाएं पूरी करने के लिए करता है बल्कि रोज अधिक से अधिक धन जमा करना चाहता है और धन के प्रभाव में अपनी तुलना ईश्वर से करने लगता है। धन को अपनी शक्ति और खुशी मानने लगता है।