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आगे बड़ी तेजी की उम्मीदः रिधम देसाई

प्रकाशित Tue, 06, 2017 पर 17:43  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

बाजार के दिग्गज रिधम देसाई का मानना है कि अगले 3-4 महीने जीएसटी के लिहाज से बेहद नाजुक है। सीएनबीसी-आवाज़ की खास सीरीज लाइफ एट लाइफ हाई में मॉर्गन स्टैनली इंडिया के एमडी, रिधम देसाई ने कहा कि अगर विदेशी बाजार में गिरावट आती है तो निफ्टी 5-10 फीसदी तक फिसल सकता है। रिधम देसाई छोटी अवधि में भले ही गिरावट की आशंका जता रहे हों लेकिन वो मानते हैं कि बाजार बुल रन में है। रिधम देसाई के मुताबिक निफ्टी 5 साल में तीन गुना हो सकता है।


रिधम देसाई का कहना है कि बाजार में तेजी का माहौल है। दरअसल ग्लोबल ग्रोथ में सुधार से सेंटिमेंट सुधरा है और दुनियाभर के बाजारों में भी जोश नजर आ रहा है। हालांकि भारतीय बाजारों में जीएसटी को लेकर थोड़ा डर है। 50 फीसदी छोटी-मझौली कंपनियां जीएसटी के लिए तैयार नहीं हैं। जीएसटी के दायरे में 90 लाख से ज्यादा कंपनियां आएंगी और 90 फीसदी कारोबार को जीएसटी की ट्रेनिंग की जरूरत है। जीएसटी 1991 के बाद का सबसे बड़ा रिफॉर्म है और अगले 3-4 साल में जीएसटी का ग्रोथ पर असर दिखेगा।


रिधम देसाई का कहना है कि उभरते हुए बाजारों में एफआईआई का रुझान कम हुआ है, ऐसे में विदेशी बाजारों में कमजोरी से घरेलू बाजार टूट सकते हैं। हालांकि रिधम देसाई के मुताबिक विदेशी निवेशक भारत को लेकर बुलिश हैं। दरअसल बाजार के वैल्युएशन ठीक हैं। घरेलू बाजार ना तो सस्ते हैं और ना महंगे हैं। सरकार को निजी निवेश बढ़ाने पर जोर देने की जरूरत है।


रिधम देसाई का कहना है कि बाजार में एकतरफा तेजी नहीं रहेगी, ऐसे में उनकी रिटेल निवेशकों को धीरे-धीरे बाजार में पैसे लगाते रहने की सलाह है। रिधम देसाई का मानना है कि बाजार में यहां से 10 फीसदी तेजी और संभव है क्योंकि अब बाजार में बुल रन की शुरुआत हो रही है। अगले कुछ महीने में सेंसेक्स 39000 के स्तर जा सकता है। साथ ही अगले 3-4 साल में बाजार में बड़ी तेजी की उम्मीद है। निफ्टी कंपनियों की सालाना कमाई में 20 फीसदी की ग्रोथ संभव है, ऐसे में अगले 5 साल में निफ्टी 30000 के स्तर पर पहुंच सकता है।


रिधम देसाई के मुताबिक आगे खपत वाले सेक्टर में तेजी मुमकिन है और फाइनेंशियल सेक्टर में काफी दम नजर आ रहा है। भारत में लोन लेने का चलन बढ़ रहा है, ऐसे में फाइनेंशियल सेक्टर को लेकर बुलिश नजरिया है। प्राइवेट बैंक और एनबीएफसी के वैल्युएशन भी आकर्षक लग रहे हैं। वहीं, अभी भारत में खर्च का 60 फीसदी हिस्सा खाने-पीने में हो रहा है। लिहाजा आगे प्रति व्यक्ति आय बढ़ने से कंज्यूमर सेक्टर में मौके बन सकते हैं। हालांकि सरकारी बैंकों की ग्रोथ सुस्त रहने की उम्मीद है।


रिधम देसाई ने कहा कि महंगाई रोकने के लिए सरकार ने काम किया है। इंफ्रा पर भी सरकार को जोर दिखा है। वहीं हाउसिंग फॉर ऑल योजना से ग्रोथ को रफ्तार मिल सकती है। सरकार को अपना घाटा कम करने पर जोर देना चाहिए क्योंकि रेटिंग एजेंसियों की नजर सरकरा के कर्ज पर है। यही वजह है कि भारत की रेटिंग बढ़ने में समय लग रहा है। कर्ज कम होने के बाद रेटिंग में सुधार होगा। रिधम देसाई का कहना है कि क्रेडिट पॉलिसी में आरबीआई दरें नहीं घटाएगा और कर्ज सस्ता होने की कोई गुंजाइश नहीं है। महंगाई अपने निचले स्तर पर पहुंच गई है, ऐसे में अगले साल से दरों में बढ़ोतरी संभव है।


रिधम देसाई का आईटी सेक्टर पर बुलिश नजरिया है। उनका कहना है कि आईटी शेयरों के वैल्युएशन आकर्षक नजर आ रहे हैं। अमेरिका में निवेश बढ़ने से घरेलू आईटी कंपनियों को फायदा होगा। हालांकि उन्होंने फार्मा शेयरों में निवेश की सलाह नहीं दी। साथ ही उनका कहना है कि मिडकैप शेयरों में तेजी की रफ्तार सुस्त होगी और अगले 6 महीने में लार्जकैप शेयर ज्यादा रिटर्न देंगे।


रिधम देसाई का मानना है कि घरेलू बाजारों में एफआईआई निवेश की रफ्तार जारी रहेगी। साथ ही इंश्योरेंस सेक्टर, एनपीएस और पीएफ का पैसा भी बाजार में आएगा। अगले 10 साल में 400-500 अरब डॉलर तक निवेश हो सकता है। पिछले 12 महीने में म्युचुअल फंडों ने 20 अरब डॉलर निवेश किया है। रिधम देसाई ने कहा कि भारतीयों का इक्विटी में अभी 300-350 अरब डॉलर निवेश है, जबकि भारतीयों के पास 1700 अरब डॉलर का सोना मौजूद है। रिधम देसाई के मुताबिक आगे सोने से निकलकर शेयर बाजार में पैसा आएगा।