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बाजार पर बना रहेगा दबाव, फिर कहां लगाएं दांव

प्रकाशित Wed, 27, 2017 पर 10:59  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

आईसीआईसीआई प्रुडेंशियल एएमसी के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट, योगेश भट्ट का कहना है कि ग्लोबल अनिश्चितता और एफआईआई की बिकवाली ने घरेलू बाजारों पर दबाव बनाने का काम किया है। साथ ही कुछ घरेलू मोर्चे से भी भारतीय बाजारों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। जैसे कि अब सितंबर तिमाही के नतीजे आने शुरू होंगे, लेकिन जीएसटी के चलते कंपनियों के नतीजों में सुस्ती के संकेत हैं। इस डर से भी भारतीय बाजारों पर दबाव बन रहा है।


योगेश भट्ट के मुताबिक लगातार तेजी के बाद अब भारतीय बाजारों में कंसोलिडेशन का दौर बनता नजर आ रहा है। निफ्टी के लिए 10000-10100 के आसपास कंसोलिडेशन बरकरार रह सकता है। जब तक कंपनियों के नतीजों को लेकर तस्वीर साफ नहीं हो जाती तब तक घरेलू बाजारों में ठहराव देखने को मिल सकता है। कम से कम 1-1.5 महीने की अवधि तक भारतीय बाजारों में कंसोलिडेशन का दौर चल सकता है।


योगेश भट्ट का कहना है कि यूस एफडीए की मंजूरी, प्राइसिंग का दबाव और रुपये में मजबूती के चलते फार्मा शेयरों पर दबाव देखने को मिला है। हालांकि, अब योगेश भट्ट का मानना है कि अगर 3-5 सालों की अवधि का नजरिया है तो फार्मा सेक्टर पर दांव लगाया जा सकता है। लंबी अवधि में फार्मा शेयरों से अच्छा पैसा बन सकता है। साथ ही योगेश भट्ट को भरोसा है कि फार्मा के अलावा आईटी और इंफ्रा सेक्टर से भी अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद है।