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करेक्शन मुमकिन, म्युचुअल फंड के जरिए करें निवेश

प्रकाशित Tue, 05, 2017 पर 11:32  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

जोरदार तेजी के बाद बाजार में निवेशक अब थोड़ी सावधानी बरत रहे हैं। दरअसल घरेलू कंपनियों का प्रदर्शन कमजोर होने की वजह से एफआईआई के निवेश में कमी आई है, ये कहना है मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के फाउंडर मोतीलाल ओसवाल और कंपनी के एमडी नवीन अग्रवाल का। इनका ये भी कहना है कि उत्तर कोरिया और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के कारण बाजार में दबाव बना हुआ है। लेकिन ग्लोबल टेंशन के कारण बाजार में करेक्शन की आशंका कम है क्योंकि सभी देश अमेरिका के साथ हैं।


मोतीलाल ओसवाल की सालाना ग्लोबल इन्वेस्टर कॉन्फ्रेंस में सीएनबीसी-आवाज़ से हुई खास बातचीत में उन्होंने आगे कहा कि कंपनियों के नतीजों से निवेशक निराश हैं, इकोनॉमी में तो सुधार दिख रहा है लेकिन कंपनियों की हालत कमजोर है। कंपनियों का प्रदर्शन बाजार की चाल के मुताबिक नहीं है, जिसके चलते घरेलू बाजार में एफआईआई की खरीदारी घटी है।


नवीन अग्रवाल मुताबिक फिलहाल बाजार में निवेशक सावधानी बरत रहे हैं, इकोनॉमी की हालत अच्छी है लेकिन इंडस्ट्री की रफ्तार धीमी पड़ गई है। आईटी और फार्मा कंपनियों के नतीजों पर दबाव देखने को मिल रहा है। हालांकि स्मॉल फाइनेंस का कारोबार बेहतर है लेकिन पीएसयू बैंकों की हालत खराब है।


मोतीलाल ओसवाल ने कहा कि रामदेव अग्रवाल ने उन्हें किताबों की अहमियत बताई। किताबों से बहुत कुछ सीखने को मिला है, किताबें उनकी सबसे बड़ी गुरु रहीं हैं। मोतीलाल ओसवाल का कहना है कि रूचि की चीजों के लिए समय निकालने की जरूरत नहीं पड़ती। बाजार से शांत और सहज रहने की सीख मिलती है।


नवीन अग्रवाल का कहना है कि एनालिस्ट के लिए बिजनेस को स्टडी करना जरूरी है। कंपनियों के मैनेजमेंट से काफी कुछ सीखने को मिलता है। बिजनेस लीडर्स से बात करना सबसे बड़ी सीख है। वॉरन बफेट का मंत्र है कि बाजार में पैसा नहीं गंवाना चाहिए।


नवीन अग्रवाल ने कहा कि जियो पोलिटिकल टेंशन का सबसे खराब दौर चल रहा है। ग्लोबल टेंशन से बाजार में करेक्शन की आशंका है। बाजार में वेट एंड वॉच का सिचुएशन कायम है। इमर्जिंग बाजारों से एफआईआई पैसा निकाल सकते हैं। घरेलू निवेशक म्युचुअल फंड में पैसा लगाएंगे।