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खबरों वाले शेयर, इनसे न चूके नजर

प्रकाशित Thu, 03, 2017 पर 08:21  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

शेयरों की हर हलचल पर पैनी नजर रखकर अपने निवेश को सुरक्षित जरूर किया जा सकता है। यहां हम बता रहे हैं ऐसे शेयर जो रहेंगे आज खबरों में और जिन पर होगी बाजार की नजर।


एमटीएनएल


टेलीकॉम मंत्री ने कहा है कि एमटीएनएल के बीएसएनएल के साथ मर्जर का कोई प्लान नहीं है। एमटीएनएल बड़े कर्ज में है जबकि बीएसएनएल का प्रदर्शन सुधरा है।
 


आईओसी/बीपीसीएल/एचपीसीएल


केरोसिन पर मिलने वाली सब्सिडी खत्म करने के लिए काम शुरू हो गया है। अब तेल कंपनियां हर 15 दिन बाद 25 पैसे प्रति लीटर दाम बढ़ाएंगी। सब्सिडी खत्म होने तक पैसे बढ़ाए जाएंगे। 
 
बाटा


वित्त वर्ष 2018 की पहली तिमाही में बाटा का मुनाफा 19.7 फीसदी बढ़कर 60.4 करोड़ रुपये हो गया है। वित्त वर्ष 2017 की पहली तिमाही में बाटा का मुनाफा 50.5 करोड़ रुपये रहा था।


वित्त वर्ष 2018 की पहली तिमाही में बाटा की आय 10.1 फीसदी बढ़कर 743.1 करोड़ रुपये पर पहुंच गई है। वित्त वर्ष 2017 की पहली तिमाही में बाटा की आय 674.7 करोड़ रुपये रही थी।


सालाना आधार पर पहली तिमाही में बाटा का एबिटडा 85.1 करोड़ रुपये से बढ़कर 95.5 करोड़ रुपये रहा है। साल दर साल आधार पर अप्रैल-जून तिमाही में बाटा का एबिटडा मार्जिन 12.8 फीसदी से बढ़कर 13 फीसदी रहा है।
   
रिलायंस इंफ्रा


वित्त वर्ष 2018 की पहली तिमाही में रिलायंस इंफ्रा का मुनाफा 23.8 फीसदी घटकर 334.2 करोड़ रुपये हो गया है। वित्त वर्ष 2017 की पहली तिमाही में रिलायंस इंफ्रा का मुनाफा 438.8 करोड़ रुपये रहा था।


वित्त वर्ष 2018 की पहली तिमाही में रिलायंस इंफ्रा की आय 8 फीसदी बढ़कर 7559.4 करोड़ रुपये पर पहुंच गई है। वित्त वर्ष 2017 की पहली तिमाही में रिलायंस इंफ्रा की आय 7001.6 करोड़ रुपये रही थी।


सालाना आधार पर पहली तिमाही में रिलायंस इंफ्रा का एबिटडा 1486.5 करोड़ रुपये से बढ़कर 2014.4 करोड़ रुपये रहा है। साल दर साल आधार पर अप्रैल-जून तिमाही में रिलायंस इंफ्रा का एबिटडा मार्जिन 21.25 फीसदी से बढ़कर 26.65 फीसदी रहा है।



एमआरपीएल


एमआरपीएल पर सीएजी की ऑडिट रिपोर्ट के मुताबिक सितंबर 2016 तक कंपनी को 13.7 करोड़ रुपये का घाटा हुआ है। घाटे की वजह ईसीबी लोन की हेजिंग न करने को बताया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक एमआरपीएल ने बिना ब्याज के करेंट अकाउंट में 768.46 करोड़ रुपये रखे।


साथ ही सीएजी को प्लानिंग और प्रोजेक्ट लागू करने में काफी अंतर मिला है। रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि कंपनी को फंड के लिए वास्तविक मांग रखनी चाहिए और प्रोजेक्ट लागू करने से पहले मजबूत प्लान होना जरूरी है।