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चुनें सही इंश्योरेंस ताकि ना बनें मिस-सेलिंग का शिकार

प्रकाशित Fri, 08, 2017 पर 14:03  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

इंश्योरेंस में धोखाधड़ी या अगर कहें मिस सेलिंग, इनके मामले लगातार बढ रहे हैं। चाहें लाइफ इंश्योरेंस हो या जनरल इंश्योरेंस, ग्राहकों को अक्सर ज्यादा कमीशन के लिए गलत पॉलिसी बेच दी जाती है और जानकारी कम होने से वो ठगी के शिकार हो जाते हैं और सालों साल मोटा प्रीमियम भरते रहते हैं। अंत में पता चलता है की पॉलिसी से मिल रहा रिटर्न ना ही आपके लक्ष्य के मुताबिक है, ना ही महंगाई को मात दे रहा है।


अगर इंश्योरेंस की बात करें को सबसे ज्यादा मिस सेलिंग होती है लाइफ इंश्योरेंस में। जनरल इंश्योरेंस के मुकाबले, लाइफ इंश्योरेंस में मिल सेलिंग का आंकड़ा 49 फीसदी का है। हालांकि इंश्योरेंस कंपनियां अब हरकत में आई हैं। रेगुलेटर आईआरडीए ने कड़े कदम उठाने शुरू किए हैं, लेकिन आप कैसे बचे मिल सेलिंग से। इसपर चर्चा करने के लिए हमारे साथ मौजूद है 5फाइनेंस डॉटकॉम की इंश्योरेंस हेड मंजू ढ़ाके।


सबसे पहले समझ लेते हैं कि बीमा की मिस सेलिंग क्या है? ज्यादा कमीशन के लिए गलत प्रोडक्ट बेचना, बीमा के नाम पर निवेश वाली पॉलिसी बेचना, लोन के साथ बीमा पॉलिसी बेचना, एजेंट का पॉलिसी फॉर्म में गलत या अधूरी जानकारी भरना, एजेंट का पुरानी बीमारियां नहीं बताने को कहना और आप के नाम पर किसी और का मेडिकल टेस्ट कराना मिस सेलिंग के तहत आता है। जानकारों की सलाह है मिस सेलिंग बचने को लिए पॉलिसी फॉर्म को अच्छी तरह से पढ़ें, पॉलिसी फॉर्म को ध्यान से भरें, पॉलिसी फॉर्म में अधूरी या गलत जानकारी ना दें और पॉलिसी फॉर्म की एक कॉपी अपने पास रखें।


इंश्योरेंस मिस सेलिंग से बचने के लिए ध्यान रखें कि इंश्योरेंस और इन्वेस्टमेंट को ना मिलाएं। इंश्योरेंस में रिस्क कवर पर फोकस करें, ना कि रिटर्न पर। इंश्योरेंस-कम-इन्वेस्टमेंट पॉलिसी में कवर काफी कम होता है और उसके लिहाज से प्रीमियम काफी ज्यादाहोता है तो इस बात का ख्याल रखें।
 
इंश्योरेंस मिस सेलिंग से बचने के लिए समय-समय पर अपनी इंश्योरेंस जरूरतों की समीक्षा करें। जरूरत पड़ने पर अपना इंश्योरेंस कवर बढ़ाएं। पेंशन पॉलिसी, रिटायरमेंट पॉलिसी जैसे टर्म्स से भ्रमित ना हों।


इंश्योरेंस मिस सेलिंग से बचने के लिए समय पर अपना इंश्योरेंस करवाएं। सिर्फ इसलिए कि टैक्स सैविंग करनी है किसी भी इंश्योरेंस प्रोडक्ट को आनफानन में ना खरीदें। इंश्योरेंस एजेंट के बहकावों में ना आएं।


अगर इस सारी सवाधानियों को बावजूद ये गलती से मिस सेलिंग हो ही जाए तो फ्री लुक पीरियड में पॉलिसी रिटर्न कर सकते हैं, बीमा रेगुलेटर आईआरडीए से इसकी शिकायत कर सकते हैं। ये शिकायत http://www.igms.irda.gov.in/ पर ऑनलाइन की जा सकती है। अगर आपने बैंक से पॉलिसी ली है तो बैकिंग लोकपाल से शिकायत की जा सकती है।


आपको बता दें कि बैंकिंग लोकपाल को ज्यादा ताकतवर बनाया गया है। आरबीआई ने बैंकिंग लोकपाल को और ताकत दी है। बैंक से बिकने वाले सभी प्रोडक्ट्स बैंकिंग लोकपाल के दायरे में आ गए हैं। इंश्योरेंस मिस सेलिंग होने पर अब ग्राहक बैंकिंग लोकपाल से शिकायत कर सकते हैं। बैंक बीमा, म्युचुअल फंड जैसे प्रोडक्ट भी बेचते हैं इस लिए ग्राहकों की शिकायतों पर लोकपाल एक्शन ले सकेगा।