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पहला कदमः इंश्योरेंस के जरूरी टिप्स

प्रकाशित Sat, 20, 2016 पर 15:51  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

सीएनबीसी-आवाज़ की फाइनेंशियल लिटरेसी की मुहिम पहला कदम में आपका स्वागत है। पहला कदम के पिछले एपिसोड में हमने चर्चा शुरू की है इंश्योरेंस की। हमें उम्मीद है कि इंश्योरेंस से जुड़ी शुरुआती जानकारियां आपको मिल गई होंगी। फिर भी अगर आपके जेहन में कोई सवाल है तो आप हमें लिख सकते हैं सीएनबीसी-आवाज़ के फेसबुक पेज पर या फिर हमारी वेबसाइट pehlakadam.in पर अपना संदेश भी छोड़ सकते हैं।


केवल इंश्योरेंस ही नहीं बल्कि निवेश से जुड़ा कोई भी सवाल आप हम तक पहुंचा सकते हैं। तो चलिए आज बात करते हैं इंश्योरेंस से ही जुड़े नए टॉपिक पर। आज का हमारा टॉपिक है इंश्योरेंस में कितनी रकम डाली जाए? इंश्योरेंस में पैसा लगाने से पहले किन किन बातों का ख्याल रखा जाए। इन सब की जानकारी दे रहे हैं पर्सनल फाइनेंस एक्सपर्ट अर्णव पंड्या।


अर्णव पंड्या के मुताबिक इंश्योरेंस से पहले लायबिलिटी देखें और इंश्योरेंस से पहले सोच समझकर कैलकुलेशन कर लें। केवल टैक्स बचाने के लिए इंश्योरेंस ना करवाएं। प्रीमियम भरने की क्षमता की बजाय जरूरतों को ध्यान में रखकर इंश्योरेंस कराएं। टैक्स और निवेश को इंश्योरेंस से अलग रखें। इंश्योरेंस से पहले अपनी इनकम का कैलकुलेशन करें और फिर इनकम को किसी एक नंबर से मल्टीप्लायर करें। इस गणना में केवल नेट इनकम को ही कैलकुलेट करें और आगे होने वाली इनकम बढ़ोत्तरी का भी हिसाब लगाएं। इनकम का हिसाब में अपनी वर्किंग लाइफ का भी हिसाब लगाएं और महंगाई का भी ख्याल रखें।


अर्णव पंड्या ने बताया कि मौजूदा इनकम से रिटायरमेंट तक की इनकम का हिसाब लगाकर इंश्योरेंस करवाने को इनकम रिप्लेसमेंट वैल्यू कहते हैं और इसमें इनकम बढ़ोत्तरी को भी कैलकुलेट किया जाता है। कम उम्र में इंश्योरेंस कराने पर कम प्रीमियम पर बड़ा इंश्योरेंस मिलता है। नीड एनालिसिस के जरिए इंश्योरेंस से पहले जरूरत का पक्का हिसाब-किताब किया जा सकता है और इसमें रोजमर्रा के खर्च शामिल किए जाते हैं। आने सालों में अनुमानित अतिरिक्त खर्च का कैलकुलेशन भी होता है। इन सारे खर्चों का हिसाब लगाकर भविष्य की जरूरतों के मुताबिक इंश्योरेंस करवाया जाता है।


अर्णव पंड्या ने ये भी बताया कि ह्यूमन लाइफ वैल्यू यानि किसी व्यक्ति के जीवन का उसके परिवार के लिए मूल्य होता है। ह्यूमन लाइफ वैल्यू के जरिए किसी व्यक्ति की मृत्यू से उसके परिवार को होने वाले फाइनेंशियल नुकसान का अनुमान लगाया जा सकता है। ह्यूमन लाइफ वैल्यू में उस व्यक्ति की रिटायरमेंट तक होने वाली इनकम का कैलकुलेशन किया जाता है। इस इनकम में टैक्स और निवेश रकम को शामिल नहीं किया जाता है और इसमें केवल वो ही रकम शामिल होती है जिसे व्यक्ति अपने परिवार को देता है। ये फॉर्मूला अक्सर फाइनेंशियल प्लानर ही इस्तेमाल करते हैं।


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