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पहला कदमः इंश्योरेंस क्या है, क्यों है जरूरी

प्रकाशित Sat, 06, 2016 पर 17:49  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

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दरअसल इंश्योरेंस यानि नुकसान से भरपाई का वादा होता है और इसमें जिंदगी से लेकर संपत्ति तक के नुकसान का मुआवजा शामिल होता है। इंश्योरेंस दो तरह के होते हैं पहला लाइफ इंश्योरेंस और दूसरा नॉन-लाइफ इंश्योरेंस।


लाइफ इंश्योरेंस के तहत किसी व्यक्ति की जिंदगी के इंश्योरेंस के अलावा पूरे परिवार और ग्रुप इंश्योरेंस होता है। लाइफ इंश्योरेंस में व्यक्ति की मौत के बाद उसके परिवार को पैसा मिलता है। लाइफ इंश्योरेंस में मनीबैक और एंडोमेंट प्लान भी शामिल होते हैं। इंश्योरेंस मुनाफा कमाने के लिए नहीं होता, बल्कि इंश्योरेंस नुकसान की भरपाई के लिए होता है। लिहाजा निवेश और इंश्योरेंस को अलग अलग रखना चाहिए।


वहीं नॉन-लाइफ इंश्योरेंस में हेल्थ इंश्योरेंस, होम या प्रॉपर्टी इंश्योरेंस, बिजनेस प्रॉपर्टी का इंश्योरेंस, व्हीकल इंश्योरेंस और ट्रैवल इंश्योरेंस का समावेश होता है। गाड़ियों का इंश्योरेंस कराना अनिवार्य होता है और व्हीकल इंश्योरेंस के तहत गाड़ी के एक्सीडेंट, नुकसान या तोड़फोड़ की भरपाई होती है। लोन पर घर लेने पर होम इंश्योरेंस जरूर करना चाहिए। होम या प्रॉपर्टी इंश्योरेंस के तहत आग या किसी दूसरे तरह के नुकसान की भरपाई होती है।


लाइफ और नॉन-लाइफ इंश्योरेंस कंपनियां अलग-अलग होती हैं। इंश्योरेंस लेते समय कौन सी चीजें शामिल नहीं हैं, इसका ख्याल रखें। कवरेज केबारे में जानकारी लें और प्रीमियम की पूरी जानकारी जरूर लें। हेल्थ इंश्योरेंस में कवर होने वाली बीमारियों के बारे में जानकारी जरूर लें। पुरानी बीमारी कवर होगी या नहीं इसकी भी जानकारी लें। कई इंश्योरेंस पुरानी बीमारियां भी कवर करते हैं। कई प्लान 80 साल के बुजुर्गों के लिए भी होते हैं। हेल्थ इंश्योरेंस में जितना बड़ा प्रीमियम होगा, उतना बड़ा कवरेज होगा। पॉलिसी की सारी बातें लिखित में होनी चाहिए और एजेंट की बातों पर भरोसा ना करें। हर चीज लिखित में पॉलिसी डॉक्युमेंट में होनी चाहिए।


निवेश से पहले इंश्योरेंस जरूरी है। वहीं इंश्योरेंस के प्रीमियम पर टैक्स छूट भी मिलती है। इंश्योरेंस के 1.5 लाख रुपये तक के प्रीमियम पर टैक्स राहत मिलती है। लेकिन केवल टैक्स के नजरिए से इंश्योरेंस ना करवाएं। टैक्स प्लानिंग, निवेश और इंश्योरेंस को अलग-अलग देखना चाहिए। लायबिलिटी के साथ इंश्योरेंस जरूर होना चाहिए। कम उम्र में इंश्योरेंस कराने पर कम प्रीमियम देना होता है।


इंश्योरेंस लाइफ वैल्यु के आधार पर होता है और सालाना आय का 20-30 गुना तक इंश्योरेंस हो सकता है। बड़े इंश्योरेंस का बड़ा प्रीमियम होगा, ऐसे में बड़े लाइफ इंश्योरेंस के लिए टर्म प्लान का चुनाव करना चाहिए। मनीबैक या एंडोमेंट प्लान के साथ लाइफ इंश्योरेंस का प्रीमियम काफी महंगा होता है। याद रखें कि निवेश के मकसद से इंश्योरेंस नहीं करवाना चाहिए।


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