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हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस, कैसे करें कंफ्यूजन को करें दूर

प्रकाशित Tue, 20, 2018 पर 18:44  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

इंश्योरेंस को लेकर हमारे देश में समझ कितनी कम है, इस बात का अंदाजा हम इस से लग सकता है के आज भी लोग इंश्योरेंस में मुनाफा देखते हैं, और सूरक्षा नही और यहीं हम सबसे ज्यादा गलती कर लेते हैं। लेकिन योर मनी के रहते आपको फिक्र करने की जरूरत नही है, हम आपको इंश्योरेंस से जुडी तमाम बारीकियों से रूबरू करवाएंगें और हमारा साथ देने के लिए मौजूद हैं 5फाइनेसडॉटकॉम की इंश्योरेंस हेड मंजू धाके।


मंजू धाके का कहना है कि हेल्थ इंश्योरेंस को निवेश समझना गलत है। सेहतमंद होने पर भी हेल्थ इंश्योरेंस ना लेना, एम्प्लॉयर की तरफ से मिलने वाले इंश्योरेंस को काफी समझना ये सभी हेल्थ इंश्योरेंस को समझने की गलतफहमी है। क्लेम के लिए 24 घंटे तक अस्पताल में भर्ती होना जरूरी, पॉलिसी लेने के साथ ही कवर मिलऩा, पॉलिसी लेने के तुरंत बाद से सुविधाएं मिलना, पॉलिसी खत्म होने के बाद कागजात की जरूरत को खत्म समझना ये सभी हेल्थ इंश्योरेंस से जुड़ी कुछ गलतफहमियां है।


हेल्थ इंश्योरेंस लेते समय सावधानी बरतने की जरुरत है। हेल्थ इंश्योरेंस लेते समय सिर्फ कैशलेस सुविधा देखकर पॉलिसी ना खरीदें। पॉलिसी के नियम और शर्तों में बदलाव हो सकते हैं। अपनी जरूरत, लाइफस्टाइल और क्षमता के हिसाब से पॉलिसी लें। पॉलिसी के नियम और शर्तें ध्यान से पढ़ें।


अक्सर लोगों में जीवन बीमा से जुड़ी अलग-अलग  धारणाएं बनी हुई है जिसपर बात करते हुए मंजू धाके का कहना है कि अविवाहित होने पर जीवन बीमा की जरूरत ना समझना यह गलत है। एम्प्लायर से मिलने वाले जीवन बीमा को काफी समझना गलत है। लाइफ इंश्योरेंस को महंगा समझकर ना लेना गलत है। ये सोचना कि लाइफ इंश्योरेंस की रकम पर नॉमिनी को इनकम टैक्स भरना होगा यह गलत है क्योंकि नॉमिनी को इनकम टैक्स नहीं भरना होता।