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योर मनी: कैसे हो सकता है इंश्योरेंस ट्रांसफर

प्रकाशित Wed, 03, 2016 पर 21:03  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

योर मनी आपको फाइनेंशियल गुरूमंत्र देता है जो आपको आर्थिक आजादी की ओर ले जाता है। यहां योर मनी में फोकस है इंश्यरेंस पर। एटिका वेल्थ मैनेजमेंट के गजेंद्र कोठारी आपको बता रहे हैं कि लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी को आप कैसे ट्रांसफर कर सकते हैं और इंश्योरेंस मिस-सेलिंग पर आईआरडीआई के क्या हैं नियम जो आपको मिल सेलिंग के जाल ले बचा सकते हैं।


इंश्योरेंस ट्रांसफर पर गजेंद्र कोठारी ने बताया कि शर्तों के साथ लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी ट्रांसफर की जा सकती हैं। लाइफ इंश्योरेंस को गिरवी रखकर लोन लिया जा सकता है। दूसरे मामलों में भी लाइफ इंश्योरेंस गिरवी रख सकते हैं। असाइनर उसके कहते हैं जो इंश्योरेंस पॉलिसी गिरवी रखता है। वहीं असाइनी उसको कहते हैं जिसके पास पॉलिसी गिरवी रखी जाती है। शर्तें पूरी होने पर पॉलिसी फिर से पॉलिसीधारक को मिल जाती है। शर्तें पूरी न होने पर असाइनी के ही पास ही पॉलिसी रहेगी। शर्तें पूरी न होने पर असाइनी पॉलिसी सरेंडर कर सकता है। असाइनी पॉलिसी सरेंडर करके रिकवरी कर सकता है। ट्रांसफर के बाद पॉलिसी कैंसिल नहीं की जा सकती है।


इंश्योरेंस मिस-सेलिंग पर गजेंद्र कोठारी ने बताया कि इंश्योरेंस मिस-सेलिंग पर आईआरडीएआई ने सख्ती बरतते हुए निर्देश दिए हैं कि बैंक, एनबीएफसी जबरदस्ती  इंश्योरेंस ना बेचें। ग्राहकों की शिकायत के बाद आईआरडीएआई ने ये आदेश दिया है और कंपनियों से इंश्योरेंस बेचने वालों का नाम बताने को कहा है। आपको बता दें कि लोन, एफडी के साथ जोड़कर इंश्योरेंस की मिस-सेलिंग की जाती है। मिल सेलिंग का मतलब है इंश्योरेंस की ग्राहकों को बिना बताए या जबरदस्ती की जाने वाली बिक्री या गलत जानकारी देकर इंश्योरेंस की बिक्री।


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