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योर मनी: क्लेम रिजेक्शन से कैसे बचें

प्रकाशित Sat, 19, 2016 पर 16:28  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

इंश्योरेंस के नाम पर, हम अकसर ढेर सारी पॉलिसी खरीद लेते हैं, और इस चक्कर में जो सही इंश्योरेंस होता है, उसे छोड़ देते हैं। इंश्योरेंस का मतलब निवेश नहीं होता है, बल्कि जोखिम से बचने के लिए एक कवर लेना होता है। योर मनी पर यहां हमारा फोकस है इंश्योरेंस पर और आपके निवेश से जुड़े सवालों के जवाब दे रहे हैं पॉ़लिसीएक्स डॉट कॉम के फाउंडर नवल गोयल।


यहां हम सबसे पहले ये बता रहे हैं कि क्लेम रिजेक्शन से कैसे बचा जा सकता है। नवल गोयल के मुताबिक इंश्योरेंस क्लेम आसानी से पास हो जाए इसके लिए आपको इंश्योरेंस लेते समय सही जानकारी देनी चाहिए। हेल्थ कंडीशन के बारे में सही जानकारी देनी चाहिए। कोई पहले की बीमारी है तो उसकी जानकारी देनी चाहिए। कंपनी का क्लेम सेटलमेंट रेश्यो देखकर ही प्लान लेना चाहिए। पॉलिसी लेते समय सभी जरूरी दस्तावेज देनें चाहिए उम्र की सटीक जानकारी दें क्योंकि बीमा की राशि इसी पर निर्भर करती है।


सवाल: मैने इपीएफ में 1,50,000 रुपये और इक्विटी एमएफ में 10 लाख रुपये डाल रखे हैं। मेरे ये निवेश जीवन आनंद, जीवन संचय, चाइल्ड मनीबैक पॉलिसी, जीवनश्री और जीवन सुरक्षा में हैं, क्या इन पॉलिसी को सरेंडर करके इक्विटी एमएफ में निवेश करना बेहतर रहेगा?


नवल गोयल: इंश्योरेंस और म्युचुअल फंड में निवेश का मकसद अलग-अलग होता है। इंश्योरेंस में मैच्योरिटी या अनहोनी पर पूरी राशि मिलती है। म्युचुअल फंड में निवेश का मकसद बेहतर रिटर्न पाना होता है। आप मौजूदा इंश्योरेंस प्लान में निवेश जारी रख सकते हैं।


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