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योर मनी: 60 के बाद बीमा, क्या हैं विकल्प!

प्रकाशित Sat, 16, 2016 पर 12:37  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

फाइनेंशियल प्लानिंग का पहला नियम होता है, सही इंश्योरेंस। फिर चाहे वो हैल्थ हो, लाइफ हो, गाडी या प्रोपर्टी, बिना इंश्योरेसं के आप निवेश की प्रक्रिया की शुरूआत नही कर सकते हैं। योर मनी में आज हम बात करेंगें इंश्योरेंस की।  इंश्योरेंस से जुड़े आपके सावालों के जवाब देने के लिए हमारे साथ हैं ओएपैसा डॉटकॉम के उदय धूत।


आज यहां सबसे पहले बात की जा रही है सीनियिर सिटिजन के लिए के इंश्योरेंस के बारे में। अकसर हम देखते हैं के 60 की उम्र तक आपने इंश्योरेंस, चाहे हैल्थ हो या लाइफ, अगर नहीं लिया है तो आपके पास काफी कम विकल्प बचते हैं। और साथ ही प्रीमियम ज्यादा देना पडता है, वो अलग। तो आज योर मनी में इन्ही उलझनों को सुलझाने की कोशिश की जा रही है।


बता दें कि सभी कंपनियों के पास बुर्जुगों के लिए हेल्थ इंश्योरेंस प्रोडक्ट होते हैं। जिसमें को पेमेंट का फीचर सबसे अहम होता है। को पेमेंट 3 तरह के होते हैं। को पेमेंट का मतलब होता है कि क्लेम का एक हिस्सा आप भरेंगें, और एक कंपनी। को पेमेंट में आपका हिस्सा पहले से तय होता है। को पेमेंट का विकल्प लेने से प्रीमियम कम हो जाता है।


गौरतलब है कि हेल्थ कंडीशन के लिए को पेमेंट, अधिक उम्र से जुड़ी बीमारियों के लिए को पेमेंट और पहले से मौजूद बीमारियों के लिए को पेमेंट का विकल्प मौजूद होता है। पॉलिसी लेने के पहले मेडिकल टेस्ट जरूरी होता है। मेडिकल टेस्ट की फीस कंपनी देगी। बता दें कि डाइबिटीज, ब्लड प्रेसर के लिए विशेष प्रोडक्ट मिलते हैं। 65 साल की उम्र तक हेल्थ पॉलिसी मिलती है। जबकि सिनीयर सिटीजन के लिए लाइफ इंश्योरेंस की बता करें तो 60 साल की उम्र के बाद टर्म प्लान बहुत कम मिलते हैं। सीनियर सिटिजन एंडोमेंट प्लान खरीद सकते हैं।


सवाल: 1999 में न्यू इंडिया इंश्योरेंस की पॉलिसी ली थी। 2015 में मैक्स बूपा हेल्थ इंश्योरेंस को पॉलिसी पोर्ट की। पॉलिसी पोर्ट करते समय पिता की ब्लड प्रेशर की तकलीफ का खुलासा नही किया था। 2013 में पिता को ब्लड प्रेशर की तकलीफ शुरू हुई। अब मैक्स बूपा हेल्थ इंश्योरेंस मेरा क्लेम रिजेक्ट कर रहा है। क्या करें?


जवाब: पॉलिसी पोर्ट करना नए प्लान लेने जैसा ही होता है। पिछले प्लान का फायदा तभी मिलेगा जबकि दूसरी कंपनी इसे माने इसके लिए हेल्थ का रिकॉर्ड बताना जरूरी है। सभी जानकारी के आधार पर पॉलिसी पोर्ट होती है। इस मामले में कंपनी की गलती नहीं है।


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