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योर मनी: इंश्योरेंस कंपनियों का विलय, ग्राहकों पर कितना असर

प्रकाशित Thu, 23, 2016 पर 14:25  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

हाल ही में मैक्स लाइफ के एचडीएफसी लाइफ में विलय की खबर आई है। इससे पहले एचडीएफसी अर्गो ने एलएंडटी जनरल इंश्योरेंस को खरीदने का एलान किया था। इंश्योरेंस कंपनियों के विलय से ग्राहकों पर कितना असर होगा, इस पर जानते हैं एडवाइजश्योर के को-फाउंडर, अभिमन्यु सोफट की राय।


अभिमन्यु सोफट का कहना है कि लाइफ इंश्योरेंस और जनरल इंश्योरेंस के मर्जर को अलग-अलग नजरिये से देखना चाहिए। आने वाले दिनों में लाइफ इंश्योरेंस के और भी कई मर्जर होने की संभावना है। लाइफ इंश्योरेंस सेगमेंट में सिर्फ 4 कंपनियों की बाजार हिस्सेदारी 65 फीसदी हो गई है, जबकि 19 कंपनियां हैं जिनके पास बाकी की बाजार हिस्सेदारी है। इन आंकड़ों से यही लग रहा है कि अभी और भी कई कंपनियां विलय पर विचार कर सकती हैं।


अभिमन्यु सोफट के मुताबिक इंश्योरेंस रेगुलेटर आईआरडीए की नजर इंश्योरेंस कंपनियों पर बनी रहती है और इसका रेगुलेशन काफी सख्त है, ऐसे में इंश्योरेंस कंपनियों के मर्जर से आपकी पॉलिसी में बहुत ज्यादा बदलाव मुमकिन नहीं है। लिहाजा अगर आपने इंश्योरेंस पॉलिसी ली हुई है तो आपको ज्यादा चिंता करने की जरूरत नहीं है। अभिमन्यु सोफट की सलाह है कि बाजार में 3-4 अच्छी इंश्योरेंस कंपनियां हैं उनसे ही पॉलिसी लें तो वो ज्यादा बेहतर होगा। उन्होंने कहा कि ऐसा सोचकर पॉलिसी न लें कि ये काफी सस्ती हैं, क्योंकि कल को विलय होने की स्थिति में सर्विस को लेकर परेशानी खड़ी हो सकती है। लाइफ इंश्योरेंस में प्रीमियम पहले से तय होता है, ऐसे में विलय हो भी जाए तो आपके पॉलिसी के प्रीमियम या शर्तों में बदलाव मुमकिन नहीं है।


अभिमन्यु सोफट ने जनरल इंश्योरेंस पर अपनी राय देते हुए कहा कि इसके तहत मेडिक्लेम की बात करें तो इसकी अवधि 1-3 साल की होती है, ऐसे में मान लीजिए कि आपकी इंश्योरेंस कंपनी का विलय किसी दूसरी कंपनी के साथ हो गया है तो पॉलिसी रीन्युअल पर शर्तों में बदलाव मुमकिन है। हो सकता है कि आपके प्रीमियम और फीचर्स में थोड़ा बहुत बदलाव हो सकता है। हालांकि आपके जनरल इंश्योरेंस पॉलिसी में बहुत ज्यादा बदलाव की गुंजाइश नहीं होगी।


अभिमन्यु सोफट ने ये भी बताया कि इस तरह के विलय से ऐसा हो सकता है कि आपने यूलिप प्लान लिया है, तो आपके पॉलिसी को मैनेज करने वाली टीम में बदलाव हो सकता है, इनके निवेश की रणनीति पहले वाले टीम से कुछ अलग हो सकती है। इस तरह के बदलाव विलय के बाद पॉलिसी में संभव हैं। यही वजह है कि विलय की बात को ध्यान में रखते हुए यूलिप जैसी पॉलिसी के लिए बड़ी कंपनियों के साथ जाना आपके बेहतर साबित हो सकता है। साथ ही अभिमन्यु सोफट ने ये भी कहा कि विदेशी कंपनियों के अधिग्रहण से भी आपकी पॉलिसी की शर्तों में बदलाव नहीं होगा।


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