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फिक्स्ड डिपॉजिट में फिक्स नहीं कमाई, किस फंड से मिलेगा सहारा

प्रकाशित Tue, 01, 2017 पर 13:32  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

ब्याज दरें घटने की संभावना बढ गई हैं। आपके फिक्स्ड डिपॉजिट पर तो ब्याज दरें कम हो ही रही थी, अब सेविंग अकाउंट की भी ब्याज दरों पर कैंची चलनी शुरू हो गई हैं। ऐसे में अगर आपकी जमा पूंजी केवल सेविंग अकाउंट में ही रहती है, तो क्या वक्त आ गया है कि आप निवेश का एक नया विकल्प तलाशें। या अगर आपने एफडी करा रखी है, तो घटती दरों के चलते, क्या सेफ कमाई का और कोई विकल्प है? जहां आपको बेहतर रिटर्न मिल सकें। योर मनी पर आज हम इसी पर चर्चा करेंगें और हमारा साथ देने के लिए हमारे साथ मौजूद है रूंगटा सिक्योरिटीज के डायरेक्टर और सीएफपी हर्षवर्धन रूंगटा।


कर्ज सस्ता होने के आसार बढ़ गए हैं। 2 अगस्त को क्रेडिट पॉलिसी आने वाली है, जिसमें दरें घटने की उम्मीद है। इस बीच एसबीआई ने भी सेविंग अकाउंट्स पर ब्याज दरें घटा दी हैं।  बैंक का कहना है कि बचत पर ब्याज दरें ज्यादा थी इसलिए ये फैसला लेना पड़ा है।


एसबीआई ने भले ही अपने सेविंग्स अकाउंट पर ब्याज की दरें कम कर दी हैं, देश में ज्यादातर बैंकों में सेविंग्स अकाउंट पर ब्याज दरें 4 फीसदी ही हैं। इनमें सरकारी और प्राइवेट बैंक सभी शामिल हैं। मसलन, देश के सबसे बड़े प्राइवेट बैंक आईसीआईसीआई बैंक में आपको सेविंग्स अकाउंट पर सालाना 4 फीसदी ब्याज मिलता है। इसी तरह, एक्सिस बैंक, एचडीएफसी बैंक या पंजाब नेशनल बैंक में भी आपको 4 फीसदी ब्याज ही मिलेगा। हालांकि प्राइवेट सेक्टर के दो बैंकों में आपको ज्यादा ब्याज दर मिल सकती है। ये दो बैंक हैं कोटक महिंद्रा बैंक और यस बैंक, जिनमें सेविंग्स अकाउंट में आपके रखे पैसे पर 6 फीसदी ब्याज मिलता है।


जिन्हें निवेश के बारें में ज्यादा जानकारी नही होता, वो अपनी सारी कमाई सेविंग अकाउंट में रखते हैं, नाम तो बचत खाता है, लेकिन सारे खर्चें उसी में से होते हैं। लेकिन अब जहां देश के सबसे बडे सरकारी बैंक ने भी बचत खाते पर ब्याज दरें घटा दी है तो सेविंग में एक निवेशक को कितना पैसा पार्क करना चाहिए। 


हर्षवर्धन रूंगटा का कहना है कि सेविंग अकाउंट में अधिक पैसे ना रखें। निवेशक एक सीमित पैसे ही अपनी सेविंग अकाउंट में रखें क्योंकि एसबीआई के बाद आगे चलकर कई और बैंक भी अपने सेविंग्स अकाउंट पर ब्याज की दरों में कटौती कर सकती है। निवेशक सेविंग्स अकाउंट के बजाय डेट फंड्स में निवेश करें क्योंकि ब्याज दरें घटने पर डेट फंड के रिटर्न बढ़ते हैं और रेगुलर इनकम के लिए डेट फंड में निवेश सबसे सही है।


बता दें कि डेट फंड बॉन्ड, डिबेंचर, कॉरपोरेट डिपॉजिट में निवेश करते हैं। डेट फंड के रिटर्न में उतार-चढ़ाव कम होता है जिसका फायदा यह है कि ब्याज दरें घटने पर डेट फंड के रिटर्न बढ़ते हैं। हालांकि डेट फंड लेते समय क्रेडिट रिस्क, ब्याज और अवधि को ध्यान में रखना जरुरी है क्योंकि डेट फंड में लॉक-इन पीरियड नहीं होता है।


डेट फंड में निवेश का यह भी फायदा है कि 3 साल से कम के निवेश पर शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन टैक्स होता है। डेट फंड पर शॉर्ट टर्म टैक्स इनकम स्लैब के मुताबिक होता है। इसलिए 3 साल से ज्यादा के निवेश पर इंडेक्सेशन के बाद 20 फीसदी टैक्स है। हालांकि इंडेक्सेशन महंगाई पर निर्भर करता है।



हर्षवर्धन रूंगटा ने आगे कहा कि अक्सर निवेशक फंड्स को लेकर चिंता में रहते है। लेकिन डेट फंड समय की अवधि के हिसाब से फंड के प्रकार है। जैसे लॉन्ग टर्म डेट फंड में लंबी अवधि के लिए निवेश किया जाता है जबकि इनकम/डायनामिक बॉन्ड फंड में 1 से 3 साल के लिए निवेश किया जाता है।


शॉर्ट टर्म फंड में 1 साल के लिए निवेश किया जाता है। लिक्विड/अल्ट्रा शॉर्ट टर्म फंड में बहुत छोटी अवधि के लिए निवेश किया जाता है। गिल्ट फंड में कम जोखिम, सरकारी सिक्योरिटीज में निवेश करें क्योंकि छोटी अवधि के निवेश में उतार-चढ़ाव कम होता है जबकि लंबी अवधि के निवेश में उतार-चढ़ाव ज्यादा होता है। अक्रुअल फंड में मैच्योरिटी तक का निवेश किया जाता है और उतार-चढ़ाव कम होता है। वहीं ड्यूरेशन फंड में ज्यादा जोखिम होता है और इसे फंड मैनेजर की समझ से निवेश किया जाता है। ब्याज दरें घटने पर डेट फंड के रिटर्न में बढ़ोतरी होती है।  ब्याज दरें कम होने पर लॉन्ग टर्म डेट फंड में निवेश करें।