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निवेश में गलती पड़ेगी मंहगी, कैसे बनाएं संतुलित पोर्टफोलियो!

प्रकाशित Sat, 11, 2017 पर 08:58  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

योर मनी में अक्सर हम बात करते हैं निवेश के बारे में, एक सही, हेल्दी निवेश के सही तरीकों को समझाते है, लेकिन कई बार इसी निवेश के दौरान कई छोटी-छोटी गलतियां आपके निवेश के लक्ष्य को बिगाड़ सकती हैं यां फिर यूं कहें कि निवेश में रिस्क फैक्टर को बढ़ा सकती हैं। निवेश शुरू करने से लेकर, निवेश के फायदों तक, निवेश में होने वाली गड़बड़ियों से लेकर निवेश में होने वाले नुकसान तक, किन बातों और किन बारीकियों का ख्याल रखें, क्या है इसके लिए गुरु मंत्र, ताकि आपके लॉन्ग टर्म लक्ष्य को आप आसानी से हासिल कर सकें। हमारे साथ  मौजूदा है एटिका वेल्थ मैनेजमेंट के डायरेक्टर और चीफ फाइनेंशियल प्लानर निखिल कोठारी।


निखिल कोठारी का कहना है कि लक्ष्य और निवेश की रकम तय ना कर पाना यह निवेश की सबसे बड़ी गलती है। बाजार के बारे में खुद से कयास लगाना और निवेश के कागजात संभाल कर ना रखना निवेशकों के लिए बड़ी गलतियां साबित होती है। निवेश की जानकारी परिवार से साझा ना करना। कभी भी उधार लेकर निवेश करना साथ ही समय समय पर अपने पोर्टफोलियो की समीक्षा करते रहें। सिर्फ टैक्स बचत के लिए निवेश करना गलत होता है।


निवेश के लक्ष्य पर बात करते हुए निखिल कोठारी ने आगे बताया कि लक्ष्य तय करने के बाद ही निवेश का विकल्प चुनें। लक्ष्य के मुताबिक निवेश की रकम तय करें। आमदनी का 20 फीसदी हिस्सा निवेश करें और हर साल निवेश की राशि 10 फीसदी बढ़ाएं। जीवनशैली, मंहगाई के हिसाब से लक्ष्य तय करें।


बाजार के उतार-चढ़ाव से घबराएं नहीं बल्कि नए निवेशक अपने लक्ष्य पर ध्यान दें। बाजार के उतार-चढ़ाव से घबराए बिना निवेश जारी रखें। पोर्टफोलियो को शॉर्ट टर्म नजरिए से ना देखें बल्कि फंड को परफॉर्म करने का मौका दें। लंबे वक्त तक बेंचमार्क से नीचे रिटर्न पर ही निवेश स्विच करें।


निवेश में कुछ बातों का ध्यान रखना बेहद जरुरी है। निवेश से पहले कागजात ध्यान से पढ़े और उन निवेश के कागजात संभाल कर रखें। निवेश से जुड़ी हर जानकारी परिवार को जरूर बताएं। साथ ही परिवार का भी फाइनेंशियल प्लानिंग में हिस्सा होना जरूरी है।


ध्यान रहें संतुलित निवेश ही निवेशक के पोर्टफोलियो को मजबूत बनाता है। इसलिए पोर्टफोलियो में बहुत सारे फंड नहीं होने चाहिए। बहुत सारे फंड होने से हिसाब किताब मुश्किल हो जाता है। एक कैटेगरी के बहुत सारे फंड्स ना हों। हर अच्छे रिटर्न वाले फंड में निवेश जरूरी नहीं है क्योंकि सारे फंड्स की परफॉर्मेंस एक जैसी नहीं होती है। फंड की परफॉर्मेंस बेंचमार्क से तुलना करें।


सिर्फ टैक्स बचाने के नजरिए से निवेश सही नहीं होता है। कई म्युचुअल फंड्स पर टैक्स पर बचत मिलती है। ईएलएसएस फंड में निवेश पर टैक्स के फायदे मिलते है। सेक्शन 80सी के तहत टैक्स के फायदा मिलत है और ईएलएसएस फंड में 3 साल का लॉक-इन पीरियड है। इक्विटी फंड में एक साल बाद कैपिटल गेन पर टैक्स नहीं होता है। लेकिन इमरजेंसी फंड जरूरी है क्योंकि आर्थिक संकट से निपटने के लिए इमरजेंसी फंड बहुत काम में आता है। 6 से 8 महीने के खर्च के बराबर का फंड जमा करें।


इंश्योरेंस पर फंड जैसे रिटर्न नहीं मिलते है। आर्थिक सुरक्षा के लिए इंश्योरेंस जरूरी है। क्रिटिकल इलनेस, एक्सिडेंटल प्लान जरूर लें। अपने लिए टर्म प्लान जरूर लें। अनुशासित निवेशक की खूबियां है इसलिए निवेश का लक्ष्य और अवधि तय करें।


निवेश से पहले कर्ज से निजात जरूरी है। बहुत जरूरत पड़ने पर ही कर्ज लें। जरूरत से ज्यादा कर्ज ना लें। क्रेडिट कार्ड, पर्सनल लोन से दूर रहें। वक्त पर लोन की किस्त चुकाएं और लोन के सभी विकल्प अच्छे से देखें।


बार-बार एसेट एलोकेशन ना बदलें। शॉर्ट टर्म के लिए लंबी अवधि के निवेश से छेड़छाड़ ना करें। शॉर्ट टर्म में बाजार का उतार-चढ़ाव समझना मुश्किल है। फंड स्विच करनें में जल्दीबाजी ना करें।


हर निवेश में रिस्क-रिटर्न का तालमेल होना जरूरी है। रिस्क और रिटर्न का बैलेंस समझें। क्षमता से ज्यादा रिस्क ना लें। ज्यादा रिटर्न के चक्कर में आकर ज्यादा रिस्क से बचें। एसेट एलोकेशन रिस्क लेने की क्षमता के हिसाब से करें।