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एनपीएस या पीपीएफ, कौन सा विकल्प है बेहतर

प्रकाशित Sat, 26, 2016 पर 12:35  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

छोटी बचत योजनाओं में ब्याज दरों में कटौती से मध्यम वर्ग की जेब कटी है। लेकिन अब इसमें रियायत की उम्मीद कम है क्योंकि वित्त मंत्री ने दो टूक कह दिया है कि सस्ता कर्ज चाहिए, तो डिपॉजिट की दरों में कटौती करनी पड़ेगी। ऐसे में अब छोटी बचत योजनाओं में निवेश के क्या सूत्र हैं आइए जानते हैं ऑप्टिमा मनी मैनेजर के पंकज मठपाल और फाइनेंशियल प्लानर अर्णव पंड्या से। 


पीपीएफ

पीपीएफ में साल भर में अधिकतम 1.5 लाख रु तक की निवेश सीमा है और इसमें ब्याज का हिसाब मासिक आधार पर होता लेकिन मिलता सालाना है। हर महीने की 5वीं तारीख के बैलेंस पर ब्याज मिलता है। पीपीएफ में कंपाउंडिंग का फायदा मिलता है। पीपीएफ में हर स्तर पर टैक्स छूट मिलती है। पीपीएफ रिटायरमेंट के लिए अच्छा विकल्प है और इसमें पूरे बैलेंस पर ब्याज मिलता है। पीपीएफ में 15 साल पूरे होने पर, निवेश 5-5 साल के लिए बढ़ाया जा सकता है। पीपीएफ पर कुल बैलेंस के 25 फीसदी तक का लोन मिल सकता है। लोन पर पीपीएफ से 2 फीसदी ज्यादा ब्याज लगता है। सातवें साल के बाद 1 बार पैसा निकालने का विकल्प है।


एनपीएस

एनपीएस के पैसे का कई असेट में निवेश होता है। एनपीएस का पैसा शेयर बाजार में भी लगता है। पीपीएफ में पूरे जमा पर टैक्स छूट मिलता है। एनपीएस का सिर्फ 40 फीसदी पैसा टैक्स फ्री होता है। एनपीएस में अधिकतम 1.5 लाख रु तक निवेश की सीमा है, इसमें आप जितना चाहें निवेश कर सकते हैं। पीपीएफ में 80 सी के तहत टैक्स छूट मिलता है, वहीं एनपीएस में 80 सीसीडी के तहत टैक्स छूट मिलता है।


दरों में कटौती, अब क्या करें?

निवेशक एसेट एलोकेशन के बाद कुछ पैसा पीपीएफ में लगा सकते हैं। लेकिन ध्यान रहें कि लक्ष्य हासिल करने के लिए सिर्फ पीपीएफ पर निर्भर ना हों। पीपीएफ में आगे भी ब्याज दर कम होने के आसार है। पीपीएफ के अलावा रिटायरमेंट के लिए इक्विटी में भी निवेश कर सकते हैं। डेट स्कीम में सुकन्या योजना अभी भी बेहतर विकल्प है। निवेशक सीनियर सिटीजन स्कीम की बजाय म्युचुअल फंड में निवेश कर सकते है या सीनियर सिटीजन मंथली इनकम प्लान में भी निवेश कर सकते हैं।


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