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पहला कदमः डेट फंड्स में निवेश के फायदे

प्रकाशित Sat, 11, 2017 पर 15:14  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

पिछले एपिसोड में हमने बात की थी ऐसे निवेश के ऐसे ऑप्शन की जिसमें आप मुनाफा बनाने के साथ साथ टैक्स की प्लानिंग कर सके। इस बार हम एक बार फिर बात कर रहे हैं म्युचुअल फंड्स की। बतौर एक्सपर्ट हमारे साथ हैं सीएनबीसी-आवाज के मार्केट्स एडिटर अनिल सिंघवी।


हम बात कर रहे हैं डेट फंड्स में कैसे निवेश करें। पहले बता दें कि डेट फंड सरकार और कॉरपोरेट्स को कर्ज देते हैं। डेट फंड में 1 दिन से लेकर लंबी अवधि तक निवेश किया जा सकता है। डेट फंड्स के जरिए बैंक, कंपनियों और सरकार को उधार देते हैं। फिर कर्ज के ब्याज से हुई कमाई निवेशकों में बांटी जाती है।


ये भी जाने लें कि ब्याज दर घटने से बॉन्ड की वैल्यू बढ़ती है, जबकि ब्याज दर बढ़ने पर बॉन्ड की वैल्यू घटती है। ब्याज दर में उतार-चढ़ाव से बॉन्ड की वैल्यू बदलती है। इक्विटी की तरह बॉन्ड की वैल्यू भी रोज बदलती है।


दरअसल डेट निवेश सुरक्षित माना जाता है। बाजार में 1 दिन के लिए पैसा लगाने वाले फंड्स भी मौजूद है और एक दिन के निवेश पर भी ब्याज मिलता है। फिक्स्ड डिपॉजिट निवेश की अवधि निश्चित होती है, जबकि डेट फंड निवेश में वक्त की पाबंदी नहीं है।


छोटी अवधि के लिए लिक्विड फंड्स, अल्ट्रा शॉर्ट टर्म और शॉर्ट टर्म फंड्स हैं। डेट में मंथली इन्वेस्टमेंट प्लान का भी विकल्प है। डेट निवेश के कई विकल्प मौजूद हैं। रिस्क ना लेने वाले निवेशक डेट में निवेश करते हैं। लंबी अवधि के निवेश में डेट अच्छा विकल्प है। डेट फंड में निवेश से पहले पोर्टफोलियो देखें।


अब बात करते हैं लिक्विड फंड्स की, बैंक में पैसा रखने से लिक्विड फंड में निवेश बेहतर है। लिक्विड फंड में एक दिन के निवेश पर भी ब्याज मिलता है। लिक्विड फंड में कॉल मनी के हिसाब से रिटर्न आते हैं। ज्यादातर पैसा लिक्विड फंड का कॉल मनी में जाता है। लेकिन, डेट फंड में मूल धन सुरक्षित होता है और इसमें निगेटिव रिटर्न नहीं है।


डेट फंड में न्यूनतम 5000 रुपये निवेश जरूरी है, जबकि लिक्विड फंड की डिविडेंड कैटेगरी में कम से कम 1 लाख का निवेश जरूरी है। लिक्विड फंड में निवेश की अपर लिमिट नहीं है। लिक्विड फंड में हर रोज डिविडेंड डिक्लेयर होता है। डिविडेंड में 2 तरह के विकल्प है, डेली डिविडेंड और डेली डिविडेंड रीइन्वेस्टमेंट ऑप्शन। डिविडेंड ऑप्शन में कम से कम 1 लाख का निवेश जरूरी है। डेट में ग्रोथ ऑप्शन भी मौजूद है। डेट में एंट्री लोड और एक्जिट लोड नहीं होता है।


ध्यान दें कि अपनी आय के हिसाब से निवेश का ऑप्शन चुनें। इक्विटी में लॉन्ग टर्म 1 साल का और डेट में 3 साल का होता है। इंडेक्सेशन बेनिफिट लेने पर 20 फीसदी टैक्स देना होगा। इंडेक्सेशन बेनिफिट के बगैर 10 फीसदी टैक्स देना होगा। इक्विटी में शॉर्ट टर्म पर 15 फीसदी टैक्स देना होता है। शॉर्ट टर्म डेट में टैक्स स्लैब के मुताबिक टैक्स देना होता है।


1 करोड़ से ज्यादा आय वालों के लिए डिविडेंड रीइन्वेस्टमेंट ऑप्शन फायदेमंद है। अकाउंट में पैसे पड़े रहने से बेहतर लिक्विड फंड में निवेश करें। अब बता रहे हैं क्या है अल्ट्रा शॉर्ट टर्म फंड, अल्ट्रा शॉर्ट टर्म फंड की अवधि लिक्विड फंड से ज्यादा होती है। 1 महीने से 3 महीने की अवधि के लिहाज से अल्ट्रा शॉर्ट टर्म फंड में निवेश करें। अल्ट्रा शॉर्ट टर्म फंड में रिटर्न लिक्विड और फिक्स्ड डिपॉजिट से ज्यादा होता है।


अल्ट्रा शॉर्ट टर्म फंड में 5000 रुपये से निवेश कर कते हैं। डिविडेंड ऑप्शन चुनने पर कम से कम 1 लाख का निवेश करना होगा। सालाना 10000 रुपये से कम ब्याज लेने वालों के लिए फिक्स्ड डिपॉजिट ही बेहतर है, लेकिन 10000 रुपये से ज्यादा ब्याज कमाने वाले फिक्स्ड की जगह डेट में निवेश करें। डेट में निवेश के कई विकल्प है, ऐसे में आय के हिसाब से डेट फंड चुने हैं।